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Jabalpur Fireworks: सिगरेट के धुंए जैसे गुबार से जहरीली हुई हवा, जबलपुर में दोगुना Air Pollution दर्ज

(Jabalpur Fireworks Air Pollution) एक पूरी सिगरेट पी लो या फिर एक हंटर जला लो.., ना जाने ऐसा कितना धुंआ इस बार दीपावली की आतिशबाजी से हवा में घुलता रहा। मध्यप्रदेश के जबलपुर में भी पटाखे जलाने सिर्फ दो घंटे की परमीशन थी, लेकिन आधी रात तक पटाखों के धमाकों से शहर गूंजता रहा। आलम यह हुआ कि धुएं के प्रदूषण से वायु की गुणवत्ता का मीटर 100 की बजाय 223 तक पहुंच गया। पीएम-10 और पीएम-2.5 यानी पार्टिकुलेट मैटर तो खतरनाक स्तर को भी पार कर गए।

चंद घंटों में डेढ़ करोड़ के पटाखे धुंआ

चंद घंटों में डेढ़ करोड़ के पटाखे धुंआ

कोरोनाकाल में दूसरे धंधों की तरह पटाखा कारोबार भी ठप रहा। लेकिन इस बार दीपावली पर बाजार ने खूब रोशन रहा। आतिशबाजी के शौकीनों के चेहरे खिले रहे, पटाखों के बाजार में ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ रही। मप्र के जबलपुर में कई जगहों पर लगने वाले पटाखा मार्केट में अच्छा कारोबार रहा। शहर के पटाखा कारोबारी राजू परिहार ने बताया कि ना सिर्फ जबलपुर बल्कि आसपास के शहरों से लोग पटाखे खरीदने आते है। करीब डेढ़ करोड़ का कारोबार होने का अनुमान लगाया है। जो चंद घंटो की आतिशबाजी में धुँआ हो गए।

वायु प्रदूषण का सूचकांक पहुंचा 200 पार

वायु प्रदूषण का सूचकांक पहुंचा 200 पार

चौकाने वाली बात यह है कि दीपवली में आतिशबाजी के बाद वायु की गुणवत्ता सामान्य स्तर पर जहां 100 के अंदर रहना चाहिए, वह 223 पर पहुंच गई। इसके साथ ही पीएम-10 और पीएम-2.5 तो खतरनाक स्तर को भी पार कर गए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक दीपावली की रात आतिशबाजी के पहले वायु गुणवत्ता लगभग 160 थी, जो रात होते सामान्य स्तर से दोगुनी हो गई। जो चिंता का बिषय है।

जानिए क्या होता है पीएम-10 और पीएम-2.5

जानिए क्या होता है पीएम-10 और पीएम-2.5

प्रदूषण नियंत्रण के जानकार बताते है कि पार्टिकुलेट मैटर को पीएम कहा जाता है। जो हवा के अंदर मौजूद बेहद सूक्ष्म कणों को मापता है। पीएम- 10 और पीएम-2.5 हवा में मौजूद कणों के आकार को प्रदर्शित करता हैं। पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम का माप जितना कम होगा, वायु में मौजूद कणों का आकर भी उतना ही सूक्ष्म होगा। पीएम 2.5 का लेवल धुंए से बढ़ता है। पीएम 10 के साथ पीएम 2.5 का स्तर जब 100 के ऊपर पहुंचता है तो यह खतरनाक स्तर माना जाता है। जबलपुर में इस बार दीपावली में ऐसी ही स्थिति बनी।

सिगरेट के धुएं जैसा पटाखों का धुँआ

सिगरेट के धुएं जैसा पटाखों का धुँआ

चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. अरविन्द जैन बताते है कि आतिशबाजी का स्मोक बेहद खतरनाक होता है। पटाखे चलाने के दौरान लोग सावधानी नहीं रखते। बगैर मास्क लगाए पटाखे चलाने से जो धुँआ होता है, उसका सबसे ज्यादा असर वहां मौजूद व्यक्ति पर प्रभाव डालता है। कई पटाखों का स्मोक तो सिगरेट के धुएं बराबर होता है। यदि आप पटाखे का एक हंटर जलाते है तो उससे निकालने वाला धुँआ एक सिगरेट के पीने के बराबर होता है।

धूल के गुबार से पहले से परेशान शहरवासी

धूल के गुबार से पहले से परेशान शहरवासी

सबसे बड़ी बात यह है कि जबलपुर में उखड़ी सड़के, निर्माणाधीन कार्य से धूल के गुबार उड़ रहे हैं। आम लोग पहले से ही वायु प्रदूषण की वजह से कई तकलीफों से जूझ रहे है। ऊपर से इस बार दिवाली की आतिशबाजी ने वायु को और जहरीला बना दिया है। प्रशासन द्वारा पटाखे चलाने की अवधि निर्धारित होने के बाबजूद आधी रात तक बे रोक टोक आतिशबाजी होती।

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