Jabalpur कैंट बोर्ड 6 महीने के लिए और भंग, पार्षद बनने की सोच रहे नेताओं के चेहरे मुरझाए

Jabalpur Cantt Board: केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय ने जबलपुर कैंट बोर्ड 6 महीने के लिए भंग कर दिया हैं। उसके बाद एमपी में विधानसभा चुनाव के तैयारियां शुरू हो जाएगी, फिर अगले साल लोकसभा चुनाव है। इस खबर से उन नेताओं के मंसूबों पर फिलहाल पानी फिर गया है, जो पार्षद बनने की तैयारी कर रहे थे। कुछ नेता दबी जुबान में यह भी कह रहे है कि इस तैयारी के लिए उन्होंने प्रचार प्रसार में खूब पैसा तक खर्च कर डाला।

जबलपुर में कैंट क्षेत्र में आने वाले समय में जो कामकाम होंगे वह सीईओ के सीधे फैसलों से ही होंगे। दरअसल रक्षा मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय ने अगले 6 माह के लिए बोर्ड को भंग रखने का फैसला लिया है। इससे पार्षद बनने की तैयारी कर रहे नेताओं की उम्मीदों पर अभी पानी फिर गया है। साल 2019 से केंट बोर्ड भंग है। 3 साल बीतने को है लेकिन चुनाव के हालात नहीं बन पाए है। कैंट एक्ट के प्रावधानों में सिविल एरिया से जुड़े मामलों में पक्ष रखने एक सिविल मेंबर नामित किया जाता है। देश के लगभग सभी केंट बोर्ड में नामित मेंबर की नियुक्ति हो चुकी है लेकिन जबलपुर केंट बोर्ड के लिए आज तक नाम फाइनल ही नहीं हो सका। आलम यह हैं कि जबलपुर केंट का हर निर्णय अधिकारियों के ही हाथ में है।
रक्षा मंत्रालय की ओर से एक गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ। जिसमें कैंट एक्ट 2006 की धारा 13 की उपधारा के खंड ख और उपधारा 4 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए देश की 56 केंट बोर्ड को 6 माह के लिए और भंग कर दिया गया है। यह अवधि 11 फरवरी 2023 से प्रारंभ होगी। इससे पहले जारी आदेश की कार्यावधि 10 फरवरी को समाप्त होने जा रही थी। जिसे ध्यान में रखते हुए रक्षा मंत्रालय ने नया आदेश जारी कर दिया। यह भी कहा जा रहा है कि कैंट एक्ट में संशोधन विधेयक रक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया है। संसद के बीते दो सत्रों में प्रस्तावित विधेयक संसद में रखे जाने के लिए सूचीबद्ध भी हुआ, लेकिन कई कारणों के चलते संसद में रखा नहीं जा सका।












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