Jabalpur Bhedaghat Rescue: 'अब तो कान पकड़े, जान बची तो लाखों पाए', नर्मदा के सैलाब से निकले युवकों की रात
Jabalpur Bhedagaht Rescue: 'जान बची तो लाखों पाए'। चारों तरफ अथाह नर्मदा के तेज वेग और बढ़ते सैलाब में फंसे जबलपुर के चार युवक जिंदगी की जंग जीत गए। भेड़ाघाट क्षेत्र में करीब 12 घंटे इनकी छोटा सा 'टापू' इनकी जिंदगी बना रहा। किस्मत थी कि रेस्क्यू के वक्त बारिश थमी रही।
विश्व प्रसिद्द भेड़ाघाट-धुआंधार वॉटर फॉल के नजदीक नर्मदा के बीच फंसे युवक जबलपुर के गढ़ा पुरवा क्षेत्र के ही रहने वाले हैं। घंटों मशक्कत के बाद उन्हें टापू से सुरक्षित निकाल लिया गया। लेकिन इस दरमियान युवकों की आप-बीती ऐसी, कि सुरक्षित निकलते ही उन्होंने कान पकड़े।
संतोष केवट ने बताया कि उसने अपने तीन साथी अमित, मनीष और शुभम के साथ छुट्टी के दिन रविवार को लम्हेटा-भेड़ाघाट घूमने का प्लान बनाया था। चारों लम्हेटा घाट पहुंचे तो घूमते हुए गोपालपुर की तरफ बढ़ते चले गए। करीब सौ मीटर नर्मदा के बीच एक टापू पर पहुंच गए।

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शाम के वक्त उन्होंने वही बैठकर खाना खाया ही था, कि अचानक नर्मदा का सैलाब बढ़ने लगा। संतोष अपने एक साथी के साथ नर्मदा के किनारे आ गए, लेकिन बाकी दो दोस्त जब तक लौट पाते जल-स्तर बढ़ गया। उन्हें बचाने दोनों वापस उसी टापू पर पहुंच गए। इस बीच बाढ़ का पानी और बढ़ गया। तेज वेग के साथ नर्मदा की लहरों के बीच से निकलना मुश्किल हो गया।
किनारे से टापू की दूरी लगभग 300 मीटर थी। सामने की तरफ कुछ लोग दिखे जिन्हें चिल्लाकर आवाज लगाईं। उसके बाद शाम को प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। सूरज ढला और रात हुई तो डर भी बढ़ता चला गया। लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आई टीम से कुछ हिम्मत बंधी रही। रात 11 बजे के बाद जल-स्तर कुछ कम होना शुरू हुआ। तो बचने की हिम्मत भी बढ़ने लगी।
घुप अंधेरे सहारा सिर्फ टापू ही था। इन लोगों की किस्मत अच्छी रही कि रात को बारिश थमी रही। टापू पर बैठे-बैठे चारों युवकों की रात कटी और अगले दिन का सूरज उगते ही नई जिंदगी की सुबह हुई। संतोष ने बताया जिस तरह बाढ़ का पानी बढ़ता जा रहा था, उससे लग रहा था कि वो लोग शायद ही बच सकें। अब चारों युवक उनकी जान बचाने वाली रेस्क्यू टीम और प्रशासन का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे।












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