क्या बीजेपी में उमा भारती को फिर होने लगी है घुटन? सिलसिलेवार 41 ट्वीट से गरमाई सियासत

मध्यप्रदेश में नौ महीने राजकाज सँभालने वाली पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती को क्या फिर भाजपा में घुटन महसूस होने लगी है? उनके द्वारा किया गया ट्वीट ही लाख टके के इस सवाल को जन्म दे रहा है।

भोपाल, 11 जुलाई: देवशयनी एकादशी के दिन बीजेपी की धाकड़ नेत्री उमा भारती (Uma Bharti Tweet) के 41 ट्वीट के विस्फोट ने सनसनी मचा दी है। सिलसिलेवार ट्वीट के जरिए उमा का वह दर्द छलका है, जो गंगा मंत्रालय छिनने के बाद से अपने सीने में दबाए बैठी थी। उन्होंने ट्वीट में खुलासा किया है कि उनसे कैसे गंगा मंत्रालय वापस ले लिया गया। एक के बाद एक दना-दन ट्वीट करते हुए उमा बोली कि यदि जब वह अपने मन की बात नही कह पाती तो उनको घुटन होती है।

उमा भारती के मन की बात

उमा भारती के मन की बात

मध्यप्रदेश में नौ महीने राजकाज सँभालने वाली पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती को क्या फिर भाजपा में घुटन महसूस होने लगी है? उनके द्वारा किया गया ट्वीट ही लाख टके के इस सवाल को जन्म दे रहा है। रविवार को उन्होंने लगातार 41 ट्वीट किए, जिसमें बताया कि कैसे उनसे गंगा मंत्रालय वापस ले लिया गया। साथ ही बताया कि कौन उनके साथ उस वक्त खड़ा रहा। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और महादेव की महिमा मंडित करते हुए उमा भारती ने ट्वीट किए। जिसमें उन्होंने घोषणा की है कि वह गुरु-पूर्णिमा से रक्षाबंधन तक अपने जन्म से लेकर अभी तक के सभी महत्वपूर्ण प्रसंग शेयर करेंगी। जिसे रिपोर्ट कार्ड मानकर पढ़ने का समय निकाले।

बात निकली है, दूर तलक जाएंगी...

बात निकली है, दूर तलक जाएंगी...

मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित श्यामला हिल्स के सरकारी बंगले B-6 से जब बात निकली है, तो वह दूर तलक जाएंगी ही। चाहे कोई माने या न माने... उमा ने ट्वीट में बताया कि आखिर कैसे उनके हाथ से गंगा मंत्रालय छिटक गया? ट्वीट में उमा ने लिखा कि गंगा की अविरलता पर दिया गया मेरे मंत्रालय का एफिडेविट सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के विपरीत था। ऊर्जा, पर्यावरण और मेरे जल संसाधन मंत्रालय की एक कमेटी बनी, जिसमें तीनों को मिलाकर गंगा पर प्रस्तावित पॉवर प्रोजेक्ट पर एफिडेविट बनाना था। फिर कैबिनेट सेक्रेटरी और पीएमओ की सहमति के बाद हमारे मंत्रालय के माध्यम से वह सुप्रीम कोर्ट में पेश होना था। तीनों मंत्रालयों की गंगा की अविरलता पर सहमति नहीं बन पा रही थी। विश्व के, भारत के सभी पर्यावरण विशेषज्ञों की राय व अरबों गंगा भक्तों की आस्था दांव पर लगी थी। उन सबकी राय में हिमालय, गंगा एवं उसकी सहयोगी नदियों पर प्रस्तावित 72 पॉवर प्रोजेक्ट गंगा, हिमालय और पूरे भारत के पर्यावरण के लिए संकट का विषय थे।

मंत्रीमंडल से बर्खास्त भी किया जा सकता था !

गंगा मंत्रालय को लेकर उमा भारती ने ट्वीट के जरिए बताया कि मैंने और मेरे गंगा निष्ठ सहयोगी अधिकारियों ने बिना किसी से परामर्श किए कोर्ट में एफिडेविट प्रस्तुत कर दिया। उस एफिडेविट पर ऊर्जा एवं पर्यावरण मंत्रालय और उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत जी की सरकार ने अपनी असहमति दर्ज की। फिर कोर्ट ने तुरंत केंद्र सरकार से परामर्श करके उस एफिडेविट को अमान्य कर दिया। वह तो आज भी कोर्ट की सम्पत्ति है और शायद केंद्र की सरकार उसके विपरीत नया एफिडेविट पेश नहीं कर पाई है। स्वाभाविक है कि मैंने अनुशासनहीनता की, मुझे तो मंत्रिमंडल से बर्खास्त भी किया जा सकता था, लेकिन गंगा की अविरलता तो बच गई। गृहमंत्री अमित शाह जो हमारे उस समय के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, वह गंगा की अविरलता के पक्ष में हमेशा रहे। उन्हीं के हस्तक्षेप से मुझे निकाला नहीं गया, किंतु विभाग बदल दिया गया, इतना तो होना ही था।

राष्ट्रीय कार्यसमिति में पदाधिकारी बनने का रंज नहीं

2014 के लोकसभा चुनाव लड़ने के मसले पर भी उमा ने लिखा कि जब अमित शाह जब राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तो उन्ही की बात मानकर 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। बतौर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा ने अपनी आपत्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी व्यक्त की थी। उमा भारती ने लिखा कि हरियाणा में हमारी सरकार भी बन गई और पार्टी की साख भी बच गई। फिर तो जो होना था वही हुआ। अनुशासनहीनता तो की ही थी और इसीलिए जब नई राष्ट्रीय कार्यसमिति घोषित हुई तो मैं उसमें सदस्य तो थी, किंतु पदाधिकारी नहीं थी, लेकिन मुझे कोई रंज ही नहीं है। मेरे नेता पीएम नरेंद्र मोदी ही हैं और रहेंगे। जगत प्रकाश नड्डा हमारे संगठन के मुखिया होने के नाते मेरे लिए भी आदरणीय हैं।

दिग्विजय का तंज पता लगाओं शराब दवाई है या नशा ?

दिग्विजय का तंज पता लगाओं शराब दवाई है या नशा ?

उमा भारती ने अपने ट्वीट में मध्यप्रदेश में जारी शराब के खिलाफ मुहिम पर लिखा । उमा ने लिखा कि उनकी मुहिम पार्टी की नीति के अनुसार है और भाजपा शासित राज्यों में एक जैसी शराब नीति हो, यह मेरा आग्रह है। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह चुटकियाँ लेते नजर आ रहे है। दिग्विजय ने ट्वीट किया कि ' उमा पहले तो यह पता करो भाजपा व मोदी जी शराब बंदी के पक्ष में हैं या नहीं? यह भी पता लगाओ कि जैसे भाजपा के कुछ नेता मानते हैं, शराब दवाई है या नशा? शिवराज सरकार ने खुले आहतों में लोगों को शराब पीने का लाइसेंस दिया, उमा भारती ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र ... ।

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