Income Tax: चोरों का हथियार बने ‘सियासी दल’, 7 से 10 परसेंट कमीशन, घोटाला उजागर, नोटिस जारी

देश भर में अँगुलियों पर गिने जाने वाली बड़ी राजनीतिक पार्टियों को छोड़ कई ऐसी राजनैतिक पार्टियाँ भी है, जिनके नाम आम-तौर पर लोग इसलिए नहीं जानते, क्योकि उन दलों के नेता आज तक कोई चुनाव नहीं जीता

जबलपुर, 08 जून: सियासी दलों में 'चंदा वसूली' उनके सिस्टम का एक हिस्सा बन गया है। दलों को चंदा देने वालों की भी कमी नहीं है। लेकिन कई बार पर्दे के पीछे होने वाले चंदे के इस खेल में सरकार को लाखों-करोड़ों का चूना लग रहा है। इसका खुलासा इनकम टैक्स (Income Tax ) डिपार्टमेंट द्वारा जारी सैकड़ा भर उन नोटिस के जरिए हुआ है, जिसमें कई सियासी दल कमीशन लेकर चंदे की रसीद दे रहे है। ख़ास बात यह है कि बतौर कमीशन धंधा करने वाली ये राजनीतिक पार्टियाँ चुनाव आयोग से रजिस्टर्ड है और इन पार्टियों ने आज तक एक भी चुनाव नहीं जीता।

टैक्स-चोरों के हथियार राजनीतिक दल !

टैक्स-चोरों के हथियार राजनीतिक दल !

देश भर में अँगुलियों पर गिने जाने वाली बड़ी राजनीतिक पार्टियों को छोड़ कई ऐसी राजनैतिक पार्टियाँ भी है, जिनके नाम आम-तौर पर लोग इसलिए नहीं जानते, क्योकि उन दलों के नेता न तो आज तक कोई चुनाव जीते और न ही राजनीतिक रूप में उनके नेता राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। ऐसे में बड़ा सवाल है कि फिर देश में इन पार्टियों का क्या काम और ये अपनी किस तरह से भूमिका अदा कर रही है? इसका काफी हद तक जबाव इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी नोटिस से हुए खुलासे ने दे दिया है। पर्दे के पीछे छोटे राजनीतिक दलों को टैक्स चोरों ने अपना बड़ा हथियार बना लिया है। इनकम टैक्स बचाने के लिए बड़े स्तर पर इन दलों का उपयोग हो रहा है। जिसमें पार्टियाँ कमीशन लेकर करदाताओं को चंदे की रसीदें मुहैया करा रही है। इससे करदाताओं को टैक्स में धारा 80 तहत बड़ी राहत मिल रही है।

टैक्स चोरी और हो रहा लाखों-करोड़ों घोटाला

टैक्स चोरी और हो रहा लाखों-करोड़ों घोटाला

दरअसल जिन करदाताओं ने कुछ चिन्हित छोटे दलों को टैक्स बचाने का हथियार बना रखा है, वह अपनी रकम चंदे के नाम पर चेक से देते है। फिर उन राजनीतिक दल से वही पैसा 7 से 10 फीसदी काटकर वापिस मांग लेते है। इससे करदाता को धारा 80 के तहत इनकम टैक्स में राहत मिल जाती है। जिन टैक्स पेयर्स की सालाना इनकम 1 करोड़ से ज्यादा होती है, उन्हें 33 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता है। टैक्स में भरपूर फायदा और अपनी रकम एक नंबर में दिखाने के लिए लोग 10 लाख का चंदा देकर इनकम 91 लाख बताते है। इस राशि पर यदि टैक्स की गणना करे, तो करीब 29 लाख 08 हजार टैक्स होता है और सीधे-सीधे 4 लाख 14 हजार रुपए टैक्स की बचत हो जाती है। चालबाज टैक्स पेयर्स महज 70 हजार से 1 लाख रुपए का कमीशन देकर 3.44 से 3.14 रुपए का अतिरिक्त टैक्स बचा रहे है।

इंदौर के करीब एक सैकड़ा करदाताओं को नोटिस

इंदौर के करीब एक सैकड़ा करदाताओं को नोटिस

इस बड़े घोटाले का पता लगते ही इनकम टैक्स विभाग भी हैरान है। विभाग ने अब टैक्स चोरी के इस नए हथकंडे की तह तक जाने अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया है। मप्र के अकेले इंदौर रीजन में करीब सैकड़ा भर ऐसे करदाताओं को नोटिस भेजे गए है, जिन्होंने टैक्स चोरी करने छोटे राजनीतिक दलों का सहारा लिया। धारा 148 (A) के तहत जारी किए गए नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न आयकर में ली गई छूट को अमान्य किया जाए? करदाताओं द्वारा राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे को विभाग ने एक तरह से फर्जी दान माना है। इनकम टैक्स विभाग की रडार पर ऐसे करदाताओं की अब पुरानी हिस्ट्री भी खंगाली जा रही है। विभाग को शक है कि ये टैक्स पेयर्स जब टैक्स चोरी के लिए छोटे राजनीतिक दलों का सहारा ले सकते है, तो बाकी अन्य तरीकों से भी इन करदाताओं ने टैक्स चोरी के और दूसरे तरीके तो नहीं अपनाए?

इस टैक्स चोरी में सामने आया गुजरात कनेक्शन

इस टैक्स चोरी में सामने आया गुजरात कनेक्शन

एक अनुमान के मुताबिक देश भर में छोटे-बड़े ढाई हजार से ज्यादा राजनीतिक दल पंजीकृत है। बड़ी पार्टियों के काम-काज, उनके चंदे लेने, आय-व्यय के तौर तरीके किसी से नहीं छिपते, लेकिन छोटे पंजीकृत ऐसे दलों की भी भरमार है, जिनकी न तो चर्चा होती है और न ही आज तक उन दलों ने एक भी चुनाव जीता। कमीशन देकर इनकम टैक्स चोरी के इस बड़े घपले के शुरुआती तार गुजरात से जुड़े होना पाए गए है। जानकारी के मुताबिक टैक्स बचाने जिन करदाताओं ने छोटे राजनीतिक दलों को चुना, वह गुजरात से ताल्लुक रखते है। उन दलों में मानवाधिकार नेशनल पार्टी, किसान अधिकार पार्टी, किसान पार्टी ऑफ़ इण्डिया, लोकशाही सत्ता पार्टी शामिल है। ये दल जमकर कमीशनखोरी करते हुए करदाताओं के साथ इनकम टैक्स विभाग की आँखों में धूल झौकनें का काम कर रहे है।

क्या ‘सियासी दल’ टैक्स चोरी के लिए सेफ ज़ोन है?

क्या ‘सियासी दल’ टैक्स चोरी के लिए सेफ ज़ोन है?

इस बड़े खुलासे से यह चर्चा होने लगी है कि क्या टैक्स चोरी के लिए राजनीतिक दल सबसे सेफ ज़ोन में है? जानकारों का मानना है कि ऐसा इसलिए है क्योकि चुनाव 5 साल में एक बार आते है। कुछ राजनीतिक दलों का निर्माण चुनाव के लिए नहीं, बल्कि चुनाव के वक्त कमीशन का यह धंधा करने होने लगा है। बाकी वक्त में भी पार्टी अपने एजेंडे के मुताबिक चंदे के नाम पर लोगों की तलाश में लगी रहती है। अपनी ब्लेक मनी को व्हाइट और देय टैक्स की काफी रकम कम करवाने जैसे लालच शामिल है। खबर है कि ऐसे तथाकथित छोटे दलों ने अपना एक नेटवर्क तैयार कर रखा है। जिनके सक्रिय एजेंट बड़े धन्नासेठों, कारोबारियों से अपना प्लान साझा करते है। फिर एक चेन के जरिए टैक्स चोरी का यह धंधा बढ़ता जाता है।

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