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अवैध होर्डिंग विज्ञापन किया तो अब जाओगे जेल, मप्र हाईकोर्ट ने दिए ये निर्देश

कई बार उनके विज्ञापन के ऊपर कुछ रसूखदार नेता और अन्य लोग अपने प्रचार-प्रसार की जबरदस्ती सामग्री लगा देते है। इससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। शिकायत करने के बाबजूद उन्हें समस्या से निजात नहीं मिलती थी।

जबलपुर, 15 जुलाई: मध्यप्रदेश में चाहे माननीयों का बर्थ-डे, कोई चुनावी या राजनीतिक प्रचार हो, या फिर अन्य किसी के द्वारा जेंट्री गेट पर अवैध रूप से बैनर-पोस्टर चस्पा हुए तो उनकी खैर नही। दरअसल विज्ञापन एजेंसियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अहम् निर्देश दिए है। कोर्ट ने कहा है कि इस तरह की कोई भी शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर एक्शन हो। अब जेंट्री गेट का ठेका लेने वाली संबंधित एजेंसी की शिकायत पर पुलिस को FIR दर्ज करना होगी।

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मप्र में कई शहरों में जेंट्री गेट और बस स्टाफ, विज्ञापन एजेंसियों को ठेके पर दिए गए है। लेकिन कई बार उनके विज्ञापन के ऊपर कुछ रसूखदार नेता और अन्य लोग अपने प्रचार-प्रसार की जबरदस्ती सामग्री लगा देते है। इससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। शिकायत करने के बाबजूद उन्हें समस्या से निजात नहीं मिलती थी। इससे निपटने एडवरटाइज एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निगम प्रशासन समेत अन्य संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी किए है।

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24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने निर्देश
हाईकोर्ट ने विज्ञापन एजेंसियों के यूनियन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि विज्ञापन एजेंसियों के लिए आवंटित विज्ञापन वाली जगहों पर यदि कोई अवैध रूप से अपने प्रचार-प्रसार की सामग्री लगाता है, तो उसकी शिकायत पर संबंधित पुलिस थाने जांच कर FIR दर्ज करे। कोर्ट में नगर निगम एक्ट की धारा 173 का हवाला भी दिया गया है। कोर्ट में कहा गया कि ऐसी उत्पन्न होने वाली स्थितियों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होती है। लिहाजा कार्रवाई के साथ ऐसे अवैध प्रचार-प्रसार को भी निगम-प्रशासन हटवाने की कार्रवाई करें।

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विज्ञापन एजेंसियों को होता है नुकसान
दरअसल विज्ञापन एजेसियाँ जब किसी शहर में जेंट्री गेट या अन्य पब्लिक प्लेस की अधिकृत जगह का ठेका लेती है, तो उसमें उन्हें धरोहर राशि भी जमा करना पड़ता है। साथ ही अन्य कई खर्चे होते है। अधिकृत तौर पर उन्हें विज्ञापन का जिस कंपनी से काम मिलता है, तो उनके विज्ञापन प्रदर्शित न होने की दशा में उन्हें पूरा भुगतान नहीं हो पाता।

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