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कौन है खूंखार ‘सुंदरी’ ? ट्रेनिंग देने के लिए हाईकोर्ट को देना पड़ा आदेश

भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान पहुँची बाघिन सुंदरी का जन्म मप्र के बांधवगढ़ नेशनल पार्क में हुआ था। जिसे 2018 में ओडिशा में बाघ स्थापना कार्यक्रम के तहत बांधवगढ़ से सतकोसिया टाइगर रिजर्व ओडिशा भेजा गया था। Who is this

जबलपुर, 14 जुलाई: 'सुंदरी' खूबसूरत दिखने वाली कोई महिला नहीं, बल्कि बेजुबान बाघिन है। कई जंगलों से नाता रख चुकी 'बाघिन सुंदरी' को मप्र के कान्हा नेशनल पार्क के बाड़े में रखा गया था। खूंखार हो चुकी बाघिन को एमपी हाईकोर्ट के एक ऑर्डर पर उसे दो साल ट्रेंड किया गया। फिर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइड लाइन के तहत कान्हा से भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भेजा गया है। बताया गया कि कान्हा पार्क के बाड़े में इस बाघिन को उड़ीसा के सतकोसिया से लाया गया था।

इसलिए कान्हा लाई गई थी ‘सुंदरी’

इसलिए कान्हा लाई गई थी ‘सुंदरी’

भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान पहुँची बाघिन सुंदरी का जन्म मप्र के बांधवगढ़ नेशनल पार्क में हुआ था। जिसे 2018 में ओडिशा में बाघ स्थापना कार्यक्रम के तहत बांधवगढ़ से सतकोसिया टाइगर रिजर्व ओडिशा भेजा गया था। जहाँ बाघिन द्वारा कई अवांछित घटनाओं को अंजाम देने के बाद नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को बाघ संरक्षण स्थापना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। इसके बाद अथॉरिटी ने बाघिन सुंदरी को वापस मध्यप्रदेश भेजने के निर्देश दिए थे।

जानवर हो या इंसान सभी के लिए हो गई थी खूंखार

जानवर हो या इंसान सभी के लिए हो गई थी खूंखार

दरअसल बाघिन सुंदरी को जब बांधवगढ़ से सतकोसिया टाइगर रिजर्व भेजा गया था, तो वहा जंगल में उसका सामान्य व्यवहार लगातार बदल रहा था। शिकार की प्रवृति विकसित हो गई थी। ऐसी स्थिति में उसके नजदीक या आसपास किसी इंसान का रहना भी खतरे से खाली नहीं था। इस वजह से उसे दो साल तक सतकोशिया टाइगर रिजर्व के बाड़े में भी रखा गया था।

हाईकोर्ट के निर्देश पर किया जा रहा था ट्रेंड

हाईकोर्ट के निर्देश पर किया जा रहा था ट्रेंड

नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के बाघ संरक्षण और स्थापना की समीक्षा के बाद बाघिन सुंदरी के सिलसिले में एमपी हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। जिसमें बाघिन की सभी गतिविधियों का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए निर्देश दिए कि बाघिन को वन्यजीवन हेतु दोबारा प्रशिक्षित किया जाए। जिसके बाद 23 मार्च 2021 को सुंदरी को कान्हा नेशनल पार्क लाया गया। उसे कान्हा प्रबंधन ने घोरेला बाघ बाड़े में रखकर करीब सवा साल प्रशिक्षित करने के प्रयास हुए।

इंसानों के बीच अभी भी शिकार की मानसिकता

इंसानों के बीच अभी भी शिकार की मानसिकता

कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र के घोरेला बाघ बाड़ा में सुंदरी को करीब सवा साल रखकर प्रशिक्षित करने के तमाम प्रयास किए गए। हर तरह की तकनीक अपनाई गई, लेकिन सुंदरी के रहन-सहन और इंसानों के बीच किसी तरह का बदलाव नहीं देखा गया। कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक एसके सिंह के मुताबिक सुंदरी वन क्षेत्र के चीतलों का शिकार भी करने लगी थी। ऐसी असामान्य स्थिति में इंसानों के बीच खुली जगह में रखा जाना बड़े खतरे से कम नहीं।

भोपाल भेजने के पहले किया बेहोश, हुआ चेकअप

भोपाल भेजने के पहले किया बेहोश, हुआ चेकअप

नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइड लाइन के मुताबिक एक स्थान से दूसरे स्थान किसी वन्य प्राणी को भेजने के पहले उसका स्वास्थ्य परीक्षण जरुरी होता है। इस बात का ख्याल रखते हुए विभाग द्वारा भोपाल वन विहार रवाना करने के पहले बाघिन सुंदरी का कान्हा पार्क में स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। बांधवगढ़ और कान्हा के वन्य प्राणी विशेषज्ञों की टीम ने सुंदरी को बेहोश किया फिर उसके शरीर की हर प्रकार से जांच की गई। जिसके बाद उसे भोपाल के लिए रवाना किया गया।

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