Ray-ban के नकली चश्मे, कहीं आपकी नजरें तो नहीं खा रही धोखा, जबलपुर में चल रहा था कारोबार
यह खबर चश्मों के शौकीनों के लिए हैं। मार्केट में ब्रांडेड रेबेन जैसी कंपनी के नकली चश्मे बिक रहे हैं। जिसका खुलासा मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ। एक ऑप्टिकल शॉप पर जब रेड हुई तो पुलिस नकली चश्मे देख पुलिस भी दंग रह गई।

Fake glasses of Ray-ban: कमजोर नजर के लिए चश्मा जरुरी है। साथ ही आजकल आंखो की सुरक्षा और अच्छे लुक के लिए चश्मा पहनने का क्रेज बढ़ता जा रहा है। समर सीजन में सनग्लास वाले चश्मों की भी डिमांड बढ़ जाती हैं। यदि आप भी ब्रांडेड कंपनी वाले फ्रेम के चश्मे खरीदने के शौक़ीन हैं, सावधान रहे। क्योकि मार्केट के कई ऑप्टिकल शो-रूम और दुकानों में नकली चश्मे बेचे जा रहे हैं। इसका खुलासा मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ है। एक दुकान में छापा मारकर बड़ी तादात में रेबेन कंपनी जैसे दिखने वाले नकली चश्मे और सामान बरामद किया हैं।

कही आपकी नजर तो नहीं खा रही धोखा
एक से बढ़कर एक और स्टाइलिश ब्रांडेड चश्मे पहनने के शौकीनों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण हैं। हो सकता है कि आप रेबेन जैसी ब्रांडेड कंपनी का चश्मा खरीदने शो-रूम या शॉप पर पहुंचे, और असली के नाम पर नकली माल टिका दिया जाए। असली की सही पहचान मालूम न होने का खामियाजा हमारी आंखो को भुगतना पड़ सकता हैं। कई बार नकली चश्मा पहनने की वजह से हमारी सेहत पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है।

रेबेन कंपनी के डुप्लीकेट चश्मे
चश्मे के फ्रेम बनाने वाली कंपनियों की दुनिया में रेबेन कंपनी भी शामिल है। मार्केट में इस कंपनी के असली चश्मे बताकर नकली चश्मों का धड़ल्ले से कारोबार होता पकड़ा गया है। हु-बहू असली जैसे दिखने वाले रेबेन कंपनी का लेबल लगे चश्मे मध्य प्रदेश के जबलपुर में बिक रहे थे। शहर के राज ऑप्टिकल शॉप से हो रहे इस धंधे की जब यूनाइटेड ओवरसीज ट्रेडमार्क कंपनी को भनक लगी तो मामले की पुलिस में शिकायत की गई।

छापे में बरामद एक हजार से ज्यादा चश्मे
कंपनी के अधिकारियों की शिकायत के आधार पर जब दबिश दी गई तो नकली चश्मों को देख पहली बार में तो पुलिस की नजरें भी धोखा खा गई। अलग-अलग कई बॉक्स में रेबेन लिखे 1 हजार 437 चश्मे बरामद किए गए। दुकान की छानबीन में 610 नकली कवर भी मिले। पुलिस ने दुकान संचालक पदम कुमार मेलानी के खिलाफ कॉपी राइट एक्ट समेत कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया हैं। असली के नाम पर हो रहे इस गोरखधंधे की खबर से कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ हैं।

आरोपी के नेटवर्क का लगाया जा रहा पता
एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने बताया कि नकली चश्मों के इस कारोबार में कौन-कौन लोग शामिल है, इस बारे में भी पता लगाया जा रहा है। नकली चश्मों के लेबल और कवर जबलपुर में ही बनाए जाते थे या फिर अन्य किसी दूसरी जगह से सप्लाई होते थे, इस बारे में भी आरोपी से पूछताछ की जा रही हैं। पुलिस को शक है कि समर सीजन में चश्मों की डिमांड बढ़ने पर अन्य दुकानों में ब्रांडेड कंपनी के चश्मों के नाम पर नकली का कारोबार हो सकता है। अब अन्य दुकानों में भी जांच की जाएगी।

नकली चश्मे पहनने से नुकसान
शहर के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन स्थापक बताते है कि आंखो की सुरक्षा बेहद जरुरी है। इसके लिए उपयोग होने वाले चश्मे भी गुणवत्ता युक्त रहे, इस बात का विशेष ख्याल रखना चाहिए। ब्रांडेड कंपनी के नाम पर मार्केट में बिक रहे चश्मे की क्वालिटी ठीक न होने की वजह से फ्रेम का साइज भी बिगड़ जाता है। ऐसी स्थिति में बिगड़े फ्रेम के चश्मे पहनने से आंखो को नुकसान पहुँचता है। कई घटिया ग्लास भी कई परेशानियों को उत्पन्न करता है। सिर दर्द होना आम समस्या हो जाती है।












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