Bageswer Dham धीरेंद्र शास्त्री के प्रोग्राम में आई थी चंचल हथनी, बढ़ गया इंफेक्शन, जबलपुर में चल रहा इलाज

जबलपुर में हुई पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा में छतरपुर से एक हथनी बुलाई गई थी। महीने भर में तबियत सुधरने की बजाय और बिगड़ गई। अब जबलपुर में इलाज चल रहा है।

Bageswer Dham Dhirendra Shastris elephant

Bageswer Dham Dhirendra Shastri: बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री पीड़ितों के दुःख-दर्द दूर करने का दावा और कथा प्रसंगों के माध्यम से बेहतर जीवन जीने की सलाह देते है। लेकिन उनके ही आयोजन में आई एक हथनी बीमार पड़ गई। हालत ज्यादा बिगड़ने पर उसे जबलपुर इलाज के लिए लाया गया है।

दरअसल मार्च के आखिरी सप्ताह में जबलपुर के पनागर में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा का आयोजन हुआ था। जिसमें आयोजकों ने छतरपुर के महावत गोविंद को हथनी लाने का ऑर्डर दिया। हथनी का नाम चंचल है। जिसे वह आयोजन स्थल पर लेकर पहुंचा था।

आयोजन के वक्त भी जबलपुर में तपन भरी गर्मी का अहसास हो रहा था। हालांकि हफ्ते भर चली पंडित जी कथा शाम चार बजे शुरू होती थी। लेकिन छतरपुर से जबलपुर तक लंबी दूरी तय करके आना-जाना और भीड़-भाड़ में चंचल नाम की हथनी की तबियत बिगड़ गई।

Bageswer Dham Dhirendra Shastris elephant

महावत गोविंद ने बताया कि आयोजन के वक्त ही चंचल कुछ असामान्य रही। अपने स्तर पर महावत इलाज करता रहा लेकिन चंचल की हालत में सुधार नहीं हुआ। एक हफ्ते पहले जब उसकी तबियत और बिगड़ी तो उसे स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ के चिकित्सकों ने उचित इलाज की सलाह दी।

अब एक्सपर्ट डाक्टरों की निगरानी में चंचल हथनी का इलाज चल रहा हैं। डॉ. आर के शर्मा का कहना है कि हथनी के ब्लड के सैम्पल लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट में यूरिनरी इंफेक्शन की पुष्टि हुई है। जिसकी बड़ी वजह तेज गर्मी और पानी की कमी भी हैं। चंचल को फ्लूट थेरपी दी जा रही है।

Bageswer Dham Dhirendra Shastris elephant

हर रोज चंचल को 35 लीटर ग्लूकोज, 9 लीटर एंटीबायोटिक का सेवन कराया जा रहा है। सभी चिकित्सक उस पर नजर बनाए हुए हैं। पहले से कुछ सुधार जरुर हुआ है, लेकिन इंफेक्शन दूर होने तक जरुरी उपचार जारी रखा जाएगा।

इधर हथनी के महावत गोविंद का कहना है कि उसे इस बात यह अंदाजा नहीं था कि चंचल बीमार पड़ जायेगी। उसके और परिवार की गुजर बसर का सहारा हथनी ही है। चंचल जब बीमार हुई तो आयोजकों ने भी उसकी कोई मदद नहीं की। डाक्टरों ने अभी करीब दो हफ्ते और इलाज की बात कही है।

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