विशेष: ‘महाभारत के कृष्ण’ का जबलपुर में बर्थडे, जानिए आखिर कृष्ण ने क्यों नहीं रोका महाभारत का युद्ध
B'day of 'Krishna of Mahabharata' in Jabalpur, know why Krishna did not stop the war of Mahabharata 90 के दशक में पूरी दुनिया में बीआर चोपड़ा के सीरियल महाभारत ने खलबली मचा दी थी।
जबलपुर, 03 जून: गीता दर्शन, शासन कला, जीवन के नैतिक मूल्य और सिद्धांतों को प्रतिपादित करने वाले काव्य ग्रंथ 'महाभारत' से कौन अनजान होंगा। विरले ही लोग होंगे जिन्होंने बीआर चौपड़ा निर्देशित महाभारत सीरियल को टीवी पर न देखा हों। सीरियल में कृष्ण का जिसने किरदार निभाया, उन नितीश भरद्वाज को भी आप बखूबी जानते होंगे। उन्होंने अपने जीवन के 60 बसंत पार कर लिए हैं। अपना जन्मदिन उन्होंने मप्र के जबलपुर में मनाया, जो बॉलीवुड की दूसरी सेलिब्रिटी से जुदा था।

अटल सरकार में रह चुके लोकसभा सदस्य
2 जून 1963 को जन्मे मूलतः पशुचिकित्सक डॉ नितीश भारद्वाज एक भारतीय फिल्म अभिनेता, निर्देशक तथा निर्माता है। डॉ नितीश भारद्वाज अटल बिहारी बाजपेयी के कार्यकाल में लोकसभा के सदस्य रह चुके है। किन्तु भारत में वे भगवान कृष्ण के किरदार में सर्वाधिक लोकप्रिय है। उनके द्वारा मोहेंजो दारो, केदारनाथ, नाचे नागिन गली गली आदि अनेक हिंदी फिल्मों में, खट्याल सासू नथल सूँ, पसंत आहे मुल्गी, तुझी माझी जमली जोड़ी जैसी अनेक मराठी फिल्मों में तथा महाभारत, विष्णु पुराण, गीता रहस्य, अजब गजब घर जँवाई जैसे प्रसिद्ध टीवी धारावाहिक में कार्य कर चुके है।

फाइव स्टार होटल नहीं, मंदिर में मनाया जन्मदिन
90 के दशक में पूरी दुनिया में बीआर चोपड़ा के सीरियल महाभारत ने खलबली मचा दी थी। टीवी परदे पर रामायण के बाद यही दूसरा ऐसा धार्मिक सीरियल था, जिसके दूरदर्शन पर प्रसारण के वक्त सड़के सूनी हो जाती थी। सीरियल में अन्य किरदारों की तरह कृष्ण का रोल अदा करने वाले नितीश भारद्वाज की अदाकारी आज भी लोगों के दिलों-दिमाग में बसती हैं। अब दौर बदल चुका है, फ़िल्मी सितारों का रुतबा भी अलग हैं। बॉलीवुड के सितारों के जन्मदिन भी आपने देखे पढ़े, सुने होंगे। पांच सितारा होटल में जलसे सजे होने की तस्वीरें देखने को मिलती हैं। लेकिन महाभारत का यह किरदार अपना 60वां जन्मदिन जबलपुर के एक मंदिर में पूजा-पाठ के साथ मनाते देखा गया। भारद्वाज ने पारिवारिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि विधान से दत्त मंदिर में षष्टिपूर्ति की पूजा की।

पत्नी-बच्चों की गैर-मौजूदगी मनाया जन्मदिन
डॉक्टर नितीश भारद्वाज के मुताबिक उन्होंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। जबलपुर के प्रख्यात डॉ जितेंद्र जामदार, डॉ शिरीष जामदार और उनके परिवार के साथ 60 वा जन्म दिवस मनाते हुए भारद्वाज ने कहा कि जामदार परिवार ने उनके हर कठिन समय में साथ दिया, एक अग्रज और भाभी की तरह। इस विशेष दिन जब उनके पत्नी और बच्चे साथ में न रहने पर भी उन्हें परिवार की कमी महसूस नहीं हुई। उनके कॉलेज का दोस्त पदमाशिश और उसकी पत्नी सलोनी विशेष रुप से चेन्नई से आए। जिन लोगों ने आज तक झूठा प्रेम दिखाया वह अब आप मेरे जीवन से दूर हो गए हैं। "परिवार" इस शब्द की सही परिभाषा यही है कि "वह लोग जो बिना किसी अपेक्षा के केवल प्रेम करें"

सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं देने वालों का आभार
नितीश के आज भी लाखों फैंस हैं। जन्मदिन पर उन्हें बधाई देने का तांता लगा रहा। ट्वीटर, फेसबुक हो या फिर इंस्टाग्राम पेज जन्मदिन पर शुभकामनाओं की बाढ़ थीं। सोशल मीडिया पर भारद्वाज से कई फ़ॉलोअर यह भी पूछ रहे थे कि लाइफ का सिक्सटी बर्थडे का सेलिब्रेशन कहाँ है। किस होटल में है और क्या आज के दिन किस रोल में नजर आएंगे। भारद्वाज ने सभी का आभार जताया और जबाब भी दिया कि जन्मदिन चकाचौंध वाला नहीं बल्कि अविस्मरणीय हो गया है।

आखिर महाभारत में कृष्ण ने क्यों नहीं रोका युद्ध?
बात महाभारत के कृष्ण की चलीं है, किरदार नितीश भारद्वाज का बर्थडे सेलिब्रेशन का है। तो एक सवाल हर किसी के मन में कौंधता है कि अगर कृष्ण चाहते तो महाभारत का युद्ध रोक सकते थे? यह जानते हुए भी कृष्ण ने युद्ध क्यों नहीं रोका? लाख टके के इस सवाल के पीछे यही सार है कि यदि महाभारत का युद्ध पूरा नहीं होता, तो आने वाले वक्त में आर्यावर्त तबाह हो गया होता। इस बात को श्रीकृष्ण अच्छी तरह से जानते थे। मकसद था कि द्रोपदी के चीरहरण फिर पांडवों द्वारा पांच गांव की मांग को कौरवों द्वारा ठुकराया जाना। आने वाले वक्त में मानव मानव कल्याण के लिए ये बातें नजीर बन सकें। कृष्ण ने युद्ध के दौरान विश्व शांति के लिए गीता में उपदेश भी दिया कि हे पार्थ जो हो रहा है वो अच्छा हो रहा है, और जो होगा वो अच्छा होगा तो किसी भी हानि लाभ की चिंता छोड़कर तुम सिर्फ अपना काम करो" ।
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