सरकार ने बोला था कि फ्री में एंड्रायड मोबाइल देंगे, हो जाओगी हाईटेक, लेकिन यहां तो...

जबलपुर, 16 सितंबर: प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एंड्रायड मोबाइल दिए जाने की घोषणा की थी। कुछ जिलों में कार्यकर्ताओं को मोबाइल बंटे भी, लेकिन जबलपुर जिले में सात महीने बाद भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल नहीं उपलब्ध कराए जा सके। हालांकि विभाग के अफसर जल्द प्रक्रिया पूरी करने का दावा कर रहे हैं।

दिसंबर 2021 में हुई थी घोषणा

दिसंबर 2021 में हुई थी घोषणा

आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं में कसावट लाने के मकसद से केंद्र सरकार ने पिछले साल कहा था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सारी जानकारियां आनलाइन अपडेट करती रहें। अधिकांश आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पास एंड्रायड मोबाइल नहीं है, इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दिसंबर 2021 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शासन की ओर से निशुल्क मोबाइल उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। योजना के मुताबिक फरवरी 2022 तक कार्यकर्ताओं को मोबाइल उपलब्ध करा दिए जाने थे। लेकिन प्रक्रिया पूर्ण होने में विलंब होता गया और अब तक मोबाइलों का वितरण नहीं हो पाया।

सरकार का यह था मकसद

सरकार का यह था मकसद

स्मार्ट फोन के साथ आंगनबाड़ी सीधे सरकार से जुड़ेंगी। डिजीटलाइजेशन के दौर में हर एक आंगनवाड़ी हर दिन अपडेट रहेगी। सरकार भी हर दिन की गतिविधियां ऐप के माध्यम से देख पाएगी। वहीं कार्यकर्ताओं और विभागीय अमले को भी जानकारी इसी पर मिलेंगी। उन्हें भी जानकारी जुटाने में दिक्कत नहीं होगी। केंद्र सरकार के पोषण ऐप को कार्यकर्ता इसमें लोड करेंगी और पोषण आहार से लेकर आंगनवाड़ी की प्रत्येक गतिविधि को हर दिन इसमें अपडेट करेंगी। इससे आंगनबाड़ियां भी हाइटेक होगी।

जिले में करीब ढाई हजार मोबाइल वितरण का लक्ष्य

जिले में करीब ढाई हजार मोबाइल वितरण का लक्ष्य

महिला बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में इस योजना के तहत करीब 2500 मोबाइलों का वितरण होना हैं। मोबाइल सप्लाई के लिए 23 सितंबर को टेंडर बुलवाए गए हैं। एक बार पास भी हुआ, लेकिन संबंधित फर्म शर्त के हिसाब से सप्लाई नहीं कर पाई। मोबाइल तो नहीं मिले लेकिन अमानत राशि जरुर राजसात कर ली गई। विभाग के डीपीओ एमएल मेहरा का कहना है कि एक बार फिर टेंडर निकाला गया है।

इस बार मिल जाएंगे क्या मोबाइल ?

इस बार मिल जाएंगे क्या मोबाइल ?

विभाग के जिम्मेदारों का दावा है कि उनकी ओर से पूरा प्रयास किया गया, लेकिन परिस्थितियां ही ऐसी रहीं कि योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। उनका कहना है कि जिले में अनेक बार टेंडर बुलवाए गए, लेकिन किसी ने इस काम में रूचि नहीं दिखाई। एक बार किसी फर्म को टेंडर दिया भी गया, लेकिन वो मोबाइल सप्लाई कर पाने में असमर्थ रही। 23 सितंबर को फिर एक बार टेंडर काल किए गए हैं। विभाग के जिम्मेदारों को उम्मीद है कि इस बार रास्ता निकल जाएगा।

खिलौनों से भी लैस की गई आँगनबाड़ी

खिलौनों से भी लैस की गई आँगनबाड़ी

प्रदेश की आँगनबाड़ी केन्द्रों की तस्वीर बदलने आधुनिकीकरण के साथ आम लोगों में विश्वास बढ़ाने की कोशिशे भी हो रही है। कुछ महीने पहले सरकार ने इस केन्द्रों के लिए खिलौने भी इकट्ठे किए और वहां रखवाए गए। ताकि आँगनबाड़ी आने वाले बच्चों को खेल-कूद का माहौल मिल सकें। खासकर गरीब तबके के बच्चे अन्य बच्चों की तरह खिलौनों की कमी महसूस न कर सकें।

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