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इमरान खान से हाथ मिलाएंगे जरदारी? नवाज शरीफ की जगह बेटे बिलावल को पीएम बनाने की प्लानिंग

पाकिस्तान में 8 फरवरी 2024 को आम चुनाव की वोटिंग होगी। इस बीच पाकिस्तानी मीडिया में इस बात के चर्चे तेज हो गए हैं कि अगले कुछ दिनों में दो कट्टर विरोधी पार्टियां एक हो सकती हैं।

कहा जा रहा है कि बिलावल भुट्टो की पाकिस्‍तान पीपुल्‍स पार्टी (पीपीपी) पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के साथ गठबंधन कर सकती है।

Zardari may form alliance with Imran

इस चुनाव से पहले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लंदन से पाकिस्तान आ चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ऐलान कर दिया है कि चुनाव के बाद नवाज शरीफ ही अगले पीएम बनेंगे।

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल की सलाखों के पीछे हैं और उनकी पार्टी को लगभग पूरी तरह से तोड़ दिया जा चुका है। ऐसे में इस विकल्पहीनता का लाभ नवाज शरीफ को मिल सकता है।

ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि नवाज शरीफ की पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग (पीएमएल-एन) को रोकने के लिए पीपीपी, इमरान के साथ जाने के लिए भी तैयार है।

पाकिस्‍तानी वेबसाइट डॉन ने पीपीपी के कार्यवाहक अध्‍यक्ष राणा फारूख के हवाले से लिखा है कि पार्टी दूसरे दलों के साथ चुनावी गठबंधन पर फैसला ले सकती है जिसमें पीटीआई भी शामिल है। दिलचस्‍प बात है कि पीपीपी और पीएमएल-एन ने अप्रैल 2022 में इमरान की सरकार गिरने के बाद गठबंधन की सरकार बनाई थी।

इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने से पहले नवाज शरीफ की PML-N और जरदारी की PPP ही पाकिस्तान की दो अहम पार्टियां हुआ करती थीं। इमरान खान के मजबूत होने के बाद पहली बार दो विरोधी पार्टियां एकजुट हुई थीं।

अब ऐसा माना जा रहा है कि जरदारी, इमरान खान की पार्टी के साथ मिलकर नवाज शरीफ को कड़ी चुनौती देना चाहते हैं। इससे पहले नवाज की पार्टी के नेता ने कहा था कि वे मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान और ग्रैंड डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ मिलकर सिंध में चुनाव लड़ने का इरादा रखते हैं।

जरदारी इसी बात से नाराज हैं। जैसे पंजाब को शरीफ परिवार का गढ़ माना जाता है ठीक उसी तरह सिंध को इस परिवार और पीपीपी का गढ़ माना जाता है। सिंध में MQM ही वो पार्टी है जो पीपीपी को चुनौती देने की ताकत रखती है। इसलिए, नवाज की पार्टी उससे गठबंधन की बातें कर रही है।

इससे पहले खबरें थीं कि PPP और PML-N अलायंस कर चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन नवाज शरीफ के लंदन से पाकिस्तान लौटने के बाद स्थिति बदल चुकी है। दरअसल, जरदारी अपने बेटे बिलावल भुट्टो को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहते हैं, लेकिन नवाज की वापसी ने सियासी पलड़ा PML-N की तरफ झुका दिया है।

पाकिस्तानी फौज जो नवाज शरीफ के खिलाफ थी अब उनके साथ खड़ी नजर आ रही है। पाकिस्तानी अदालतें भी नवाज शरीफ के पक्ष में फैसला सुनाती दिखाई दे रही है। ऐसे में जदरादी एक बार फिर से नवाज संग दुश्मनी निभाते दिखाई दे सकते हैं।

जरदारी और शरीफ के बीच कुछ गड़बड़ है इसके कयास लगाए जाने तब शुरू हुए जब नवाज शरीफ की लंदन से वापसी हुई। नवाज शरीफ के चार साल बाद मुल्क लौटने के बाद पीएमएल-एन ने ग्रैंड रैली का आयोजन किया मगर जरदारी परिवार का कोई सदस्य अब तक उनसे मुलाकात करने नहीं पहुंचा।

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