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WTO Summit: 9 साल के बाद ऐतिहासिक मौका, मोदी सरकार का अहम प्रस्ताव पास, भारत का रहा जलवा

स्विट्जरलैंड की राजधानी जेनेवा में 12वें विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का शुक्रवार को समापन हो गया है, जिसमें भारत अपने प्रस्ताव पर 164 देशों को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहा है।
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जेनेवा, जून 17: विश्व व्यापार संगठन की सलाना बैठक में 9 साल के बाद ऐसा मौका आया है, जब सभी सदस्य देश किसी एक प्रस्ताव पर सहमत हुए हैं। डब्ल्यूटीओ की बैठक में मोदी सरकार ने इस बार विकासशील और कम विकासशील देशों का नेतृत्व किया था और डब्ल्यूटीओ के सभी 164 देशों को अपने प्रस्ताव पर एकराय करने में कामयाब हो गया। विश्व व्यापार संगठन के 164 सदस्यों के मंत्रियों ने खाद्य सुरक्षा, ई-कॉमर्स, ट्रिप्स समझौते, मत्स्य पालन और भविष्य की महामारियों के लिए तैयारियों सहित विभिन्न निर्णयों को अपनाया है।

भारतीय प्रस्ताव पर बनी सहमति

भारतीय प्रस्ताव पर बनी सहमति

स्विट्जरलैंड की राजधानी जेनेवा में 12वें विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का शुक्रवार को समापन हो गया है, जिसमें भारत अपने प्रस्ताव पर 164 देशों को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहा है। डब्ल्यूटीओ की इस बैठक से मत्य्स पालन उद्योग को बहुत बड़ी राहत मिली है और भारत के प्रस्ताव पर डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश दो दिनों की आपसी बातचीत के बाद राहत पैकेज की घोषणा करने के लिए राजी हो गये। इसके साथ ही डब्ल्यूटीओ इस मुद्दे पर भी सहमत हुआ है, कि कोविड संकट में बीमार मछलियों के पकड़ने की सब्सिडी की जांच भी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

किन-किन मुद्दों पर बनी सहमति

किन-किन मुद्दों पर बनी सहमति

विश्व व्यापार संगठन के 164 सदस्यों के मंत्रियों ने औपचारिक रूप से COVID-19 महामारी और भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी करने, खाद्य असुरक्षा के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया, विश्व खाद्य कार्यक्रम खाद्य खरीद पर प्रतिबंध या प्रतिबंधों से छूट, इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य पर कार्य कार्यक्रम, TRIPS समझौते पर औपचारिक रूप से निर्णय लिए हैं, जिसमें मत्स्य पालन पर सब्सिडी शामिल है। एक अधिकारी ने एएनआई को बताया कि, गरीबों के कल्याण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान वैश्विक मंच पर चमकता है। अब भारत वैश्विक नेतृत्व की जिम्मेदारी उठा रहा हैस जब पूरी दुनिया कम / कम परिणाम की ओर बढ़ रही थी, तब भारत बेहतर परिणाम प्राप्त करने में सक्षम रहा है।

डब्ल्यूटीओ परिणाम पर क्या बोले अधिकारी?

डब्ल्यूटीओ परिणाम पर क्या बोले अधिकारी?

डब्ल्यूटीओ के सभी सदस्य देशों को अपने प्रस्ताव के लिए तैयार करना कतई आसान नहीं था, क्योंकि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश ही इसके खिलाफ थे। फिर भी भारत ने सभी देशों को अपने प्रस्ताव को समर्थन देने के लिए मनाया। भारतीय अधिकारी ने कहा कि, 'भारत विश्व व्यापार संगठन वार्ता के केंद्र में था, विश्व व्यापार संगठन की बैठक के हर परिणाम में भारत की दृढ़ मुहर दिखाई देती है। भारत ने प्रतिक्रियाशील होने के बजाय डब्ल्यूटीओ बैठक के सभी स्तंभों में आक्रामक मसौदा प्रस्तावों को रखा। भारत अपने एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए मजबूती के साथ खड़ा रहा'। अधिकारी ने कहा कि, 'गरीबों और कमजोरों की आवाज विश्व स्तर पर विश्व व्यापार संगठन में भारत के सैद्धांतिक रुख से मजबूत हुई है। वे दिन गए, जब भारत दूसरे देशों के प्रस्तावों पर परिणामों को स्वीकार करता था, जो गरीबों को चोट पहुंचाते थे। अब भारत विश्व व्यापार संगठन मंच पर विकासशील देशों के मुद्दों को उजागर करने में सबसे आगे खड़ा है'।

भारत के मसौदे में क्या था?

भारत के मसौदे में क्या था?

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने भारत के साथ साथ तमाम विकासशील देशों के मछुआरों और मत्स्य पालन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मसौदा तैयार किया था। भारत में मछुआरों को सब्सिडी दी जाती है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, भारत में मत्स्य पालन के लिए सब्सिडी में डीजल बिक्री टैक्स में छूट, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को वित्तीय सहायता, नए जाल और नावों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता, समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास के अलावा जीवन रक्षक जैकेट और नेविगेशन सिस्टम में भी मछुआरों को मदद दी जाती है। जबकि, डब्ल्यूटीओ के मसौदे में कहा गया था कि, विकासशील देश गरीब, कमजोर, कम इनकम वाले और ऐसे मछुआरे, जिनके पास संसाधनों का अभाव है और जिनकी आजीविका कम है, उन्हें मछली पकड़ने में सब्सिडी तो दे सकते हैं, लेकिन सिर्फ 12 से 24 समुद्री मील तक ही उन्हें सब्सिडी हासिल है। लेकिन, इतनी सीमा रेखा के अंदर मछुआरे काफी कम मछली पकड़ पाते हैं, लिहाजा भारत ने मांग की थी, कि ये सीमा रखे बढ़ाई जाए और सब्सिडी को 25 सालों के लिए किया जाए।

क्या है विश्व व्यापार संगठन?

क्या है विश्व व्यापार संगठन?

आपको बता दें कि, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) एकमात्र वैश्विक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के बीच व्यापार के नियमों से निपटता है। इसके केंद्र में विश्व व्यापार संगठन के समझौते हैं, जिन पर दुनिया के अधिकांश व्यापारिक देशों द्वारा बातचीत और हस्ताक्षर किए गए हैं और उन देशों की संसदों से इसपर इजाजत ली गई है। विश्व व्यापार संगठन में विश्व के 164 देश शामिल हैं और ऐसा 9 सालों के बाद हुआ है, जब किसी एक देश के प्रस्ताव पर डब्ल्यूटीओ के सभी सदस्य देशों ने आम सहमति जताई हो। विश्व व्यापार संगठन में 164 सदस्य (यूरोपीय संघ सहित) और 23 पर्यवेक्षक सरकारें (जैसे ईरान, इराक, भूटान, लीबिया आदि) हैं। विश्व व्यापार संगठन की संरचना में इसके सर्वोच्च अधिकार, मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का प्रभुत्व है, जो सभी विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों के प्रतिनिधियों से बना है और हर दो साल पर डब्ल्यूटीओ का बैठक होना आवश्यर है।

डब्ल्यूटीओ सम्मेलन से भारत खुश

डब्ल्यूटीओ सम्मेलन से भारत खुश

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को 12वें विश्व व्यापार संगठन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के समापन के बाद कहा कि, भारत अवैध मछली पकड़ने पर नियमन लाने में सफल रहा। जेनेवा में विश्व व्यापार संगठन के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के बाद केंद्रीय मंत्री ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "भारत को 100 प्रतिशत सफलता मिली है। ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिसके लिए हमें किसी भी तरह की चिंता के साथ भारत लौटने की जरूरत है।" उनहोंने कहा कि, 'हम अवैध मछली पकड़ने में लिप्त लोगों के लिए विनियमन लाने में सफल रहे हैं। अवैध, अनियमित, गैर-रिपोर्टेड मछली पकड़ने को नियंत्रित करने की हमारी मांगों को भी स्वीकार कर लिया गया। यह देश के लिए एक बड़ी सफलता है, क्योंकि ऐसे कई देश हैं जो गहरे समुद्र में मछली पकड़ने में संलग्न हैं। इस प्रकार दुनिया की मछली प्रजातियों का शोषण और उन्हें खतरे में डाल रहा है'।

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English summary
India's important proposal in the World Trade Organization conference has been accepted unanimously.
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