फिर शुरू हुई दुनिया की विशालतम मशीन 'लॉर्ज हैड्रॉन कोलाइडर'

सर्न मशीन

नई दिल्ली, 22 अप्रैल। शुक्रवार को यूरोपीय ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूकलियर रिसर्च (सर्न) का स्विट्जरलैंड स्थित एलएचसी दोबारा शुरू किया गया. तीन साल तक 27 किलोमीटर लंबी इस मशीन में सुधार किए गए जिसके बाद यह मशीन पार्टिकल्स के अध्ययन के लिए तैयार है.

सर्न ने कहा कि कोलाइडर में पार्टिकल्स को दोबारा छोड़ दिया गया है. दिसंबर 2018 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है. सर्न के मुताबिक एलएचसी को अपनी पूरी गति हासिल करने में छह से आठ हफ्ते लगसकते हैं. सर्न ने एक बयान जारी कर बताया, "एक बार शुरू होने के बाद एलएचसी की ऊर्जा का स्तर नए रिकॉर्ड पर पहुंच जाएगा जिसका इस्तेमाल फिजिक्स में रिसर्च के लिए किया जाएगा."

स्विट्जरलैंड और फ्रांस की सीमा पर स्थित यह कोलाइडर सबअटॉमिक पार्टिकल्स को लगभग प्रकाश की गति से दौड़ाता है और उन्हें एक-दूसरे से टकराता है. वैज्ञानिकों ने 2012 में इस प्रयोग की शुरुआत की थी जिसका मतलब ब्रह्मांड के निर्माण की शुरुआत करने वाले बिग-बैंग सिद्धांत की गहराई को समझना है. माना जाता है कि 14 अरब साल पहले बिग बैंग यानी विशाल धमाके से ब्रह्मांड के निर्माण की शुरुआत हुई थी. इस प्रयोग को हिग्स बोसोन नाम दिया गया और कोलाइडर में छोड़े गए सबअटॉमिक पार्टिकल्स को हिग्स बोसोन कहा गया.

हिग्स बोसोन ने बदल दी दुनिया

सर्न ने हिग्स बोसोन के बारे में दुनिया को जानकारी दी, जो विज्ञान जगत की सबसे बड़ी खोजों में गिना जाने लगा. इसकी वजह से जल्द ही विज्ञान की किताबों में बदलाव होने वाले हैं और भौतकी का पूरा तंत्र फिर से तैयार होने वाला है.

इंजीनियर जहां तकनीकी मामलों पर नजर डाल रहे हैं, वहीं भौतिकशास्त्री आंकड़ों के पहाड़ के बीच बैठे माथापच्ची कर रहे हैं. लार्ज हाइड्रोजन कोलाइडर ने 2010 के बाद इन आंकड़ों को तैयार किया है. सर्न के तिजियानो कंपोरेसी ने कहा था, "जिन चीजों के बारे में आसानी से पता लग सकता था, वे हो गए हैं. अब हम दोबारा से पूरी प्रक्रिया पर नजर डाल रहे हैं. हम हमेशा कहते हैं कि खगोलशास्त्रियों का काम आसान होता है क्योंकि उन्हें सब कुछ दिखता है."

महामशीन महाप्रयोग के लिए फिर तैयार

हाइड्रोजन कोलाइडर में प्रयोग के दौरान टकराव से ऊर्जा द्रव्य में बदला. ऐसा इसलिए किया गया ताकि ब्रह्मांड में फैले अणुओं से छोटे कणों के बारे में पता लग सके, ऐसा प्रयोग जो इस ब्रह्मांड की उप्तपत्ति के बारे में भी बता सकता है. हाइड्रोजन कोलाइडर जब पूरे जोर शोर से काम कर रहा था, तो प्रति सेकेंड 55 करोड़ टकराव हो रहे थे.

लगातार बदलता एलएचसी

सर्न में पहले 1989 में लार्ज इलेक्ट्रॉन पोजीट्रॉन कोलाइडर लगा, जिसे 2000 में बदल दिया गया. उसके बाद यहां लार्ज हाइड्रोजन कोलाइडर लगाया गया, जिसे 2008 में शुरू किया गया. उस वक्त दुनिया में यह अफवाह भी उड़ी कि इसके शुरू होने से दुनिया खत्म हो सकती है.

लेकिन इसकी शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही. खराबी आने के बाद प्रयोग को एक साल टालना पड़ा. आखिरकार 2012 में वैज्ञानिकों ने उस कण का एलान किया, जिसके लिए पूरा प्रयोग शुरू किया गया था.

विशालकाय प्रयोग में लगातार नए आंकड़े मिले. भौतिक विज्ञानी जोएल गोल्डश्टाइन का कहना है, "जब भी किसी को नया आंकड़ा मिलता है, उसके पास शैंपेन की बोतल खोलने का बहाना होता है." पास में खाली बोतलों की ढेर दिखाते हुए उन्होंने कहा, "बताइए, हमारे पास जगह भी कम पड़ती जा रही है."

वीके/सीके (रॉयटर्स, एपी)

Source: DW

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