Special Report: वैक्सीन के लिए दुनिया परेशान, भारत में वैक्सीन लेने वालों की कमी, डर से कैसे थमेगा संक्रमण?

दुनिया के दूसरे देश जहां कोरोना वायरस वैक्सीन के एक एक डोज के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, वहीं भारत में अभी भी वैक्सीन को लेकर डर व्याप्त है। भारत में अभी विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है

नई दिल्ली: दुनिया के दूसरे देश जहां कोरोना वायरस(Corona virus) वैक्सीन (Vaccine) के एक एक डोज के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, वहीं भारत की स्थिति पूरी तरह से अलग है। भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन तो प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन लोग वैक्सीन लेने से डर रहे हैं। भारत में इस वक्त फ्रंटलाइन कोरोना वर्कर्स और मेडिकल स्टाफ को कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है, लेकिन 25 जनवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में पहले चरण में जिन लोगों को वैक्सीन लगाई जानी है, उनमें सिर्फ 56 प्रतिशत लोग ही वैक्सीन लगाने के लिए राजी हैं।

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भारत में इस वक्त विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत हेल्थ वर्कर्स को पहले चरण में वैक्सीनेट करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन, दिक्कत ये है कि हेल्थ वर्कर भी अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए वैक्सीन का डोज लेने से कतरा रही हैं। भारत में स्वदेशी वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल अभी कंप्लीट नहीं हुआ है और इसी बात से हेल्थ वर्कर्स में डर है।

40% डॉक्टरों को भी वैक्सीन से डर

हालांकि, भारत में वैक्सीनेशन प्रोग्राम में तेजी जरूर आई है लेकिन भारत की जनसंख्या के लिहाज से वो तेजी काफी कम है। भारत सरकार ने जुलाई तक 3 करोड़ हेल्थवर्कर्स को पहले चरण के अंतर्गत वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा है, मगर इस रफ्तार से तय वक्त में लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल दिख रहा है। जिसके बाद आशंका जताई जा रही है कि कोरोना को नियंत्रित करने में और ज्यादा समय लग सकता है। वहीं, भारत के 40 प्रतिशत डॉक्टर भी इस वक्त वैक्सीन लेने से डर रहे हैं। ये डॉक्टर अभी वैक्सीन पर आखिरी रिजल्ट आने का इंतजार कर रहे हैं।

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भारत से मदद मांगते दूसरे देश

भारत के अलावार जापान और ब्राजील में भी कई लोग वैक्सीन लेने में हिचक रहे हैं। वहीं, चीन का पूरा वैक्सीन उद्योग ही सवालों के घेरे में है। अमेरिका और ब्रिटेन के पास उपयुक्त मात्रा में वैक्सीन के डोज नहीं है, लिहाजा वो सिर्फ जरूरतमंद लोगों को ही वैक्सीन लगा रहे हैं। तो ब्रिटेन, बेल्जियम, सऊदी अरब, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव और ब्राजील समेत कई और देश हैं जो भारत से वैक्सीनके लिए मदद मांग रहे हैं। भारत ने इन सभी देशों को वैक्सीन देने का वादा करते हुए कहा है, कि भारत के पास हर महीने 5 करोड़ वैक्सीन का डोज उत्पादन करने की क्षमता है। और भारत दुनिया के हर देश की मदद करने की कोशिश करेगा।

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सवालों में क्यों भारतीय वैक्सीन

फिलहाल, भारत में दो वैक्सीन लोगों को लगाई जा रही है। एक वैक्सीन कोविशील्ड (Covishield) का निर्माण ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने किया है, जिसका उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा है तो दूसरी वैक्सीन कोवैक्सीन (Covaxine) का निर्माण भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की मदद से की है। स्वेदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल अभी तक चल ही रहा है, लिहाजा इस वैक्सीन को लेने में लोग हिचकिचा रहे हैं। कई डॉक्टरों का कहना है कि स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन भविष्य में लोगों पर क्या असर करेगा, इसे लेकर अभी तक आखिरी डेटा नहीं आया है, इसीलिए लोग कोवैक्सीन लेने में डर रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार ने दोनों वैक्सीन को लेकर लोगों को आश्वस्त किया है कि निरिक्षण के दौरान दोनों वैक्सीन पूरी तरह से सही हैं और इनका मानव शरीर पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ रहा है।

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वैक्सीन लगवाने की सरकार की अपील

भारत सरकार ने कोरोना संक्रमण रोकने के लिए हेल्थ वर्कर्स से वैक्सीन लेने की अपील की है। खुद प्रधानमंत्री मोदी कई बार इसकी विश्वसनीयता पर मुहर लगा चुके हैं तो केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी कहा है किसी तरह के अफवाह पर ध्यान दिए बगैर हेल्थ वर्कर्स वैक्सीन लें। कोवैक्सीन पूरी तरह से प्रामाणिक और सही है। वहीं, नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने वैक्सीन की प्रामाणिकता की गारंटी देते हुए हेल्थ वर्कर्स से कहा है कि वो वैक्सीन लेने में कोई हिचकिचाहट ना रखें। क्योंकि, कोई नहीं जानता है कि भविष्य में कोरोना वायरस क्या रूप लेने वाला है। उन्होंने खुद कोवैक्सीन का डोज लिया है और वो पूरी तरह से ठीक है।

भारत में वैक्सीनेशन के आकड़े

भारत में अभी तक 20 लाख हेल्थवर्कर्स को कोरोना वायरस वैक्सीन का टीका दिया गया है। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 75 प्रतिशत लोगों ने वैक्सीन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है तो बिहार में सिर्फ 51 प्रतिशत हेल्थवर्कर्स ने ही वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है। तामिलनाडु में सिर्फ 23.5% हेल्थवर्कर्स ही स्वदेशी कोवैक्सीन लेने के लिए तैयार हैं। वहीं, 56% हेल्थवर्कर्स सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित वैक्सीन लेने के लिए तैयार दिख रहे हैं। दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर निर्मला मोहापात्रा ने कहा कि वो फिलहाल वैक्सीन के नतीजे को परख रही हैं। और नतीजे देखने के बाद ही वो वैक्सीन लेने के लिए हामी भरेंगी। हालांकि, अगर अभी दोनों वैक्सीन में से एक वैक्सीन चुनने को उन्हें कहा जाए तो वो कोविशिल्ड का चुनाव करेंगी। हालांकि, डॉक्टर निर्मला मोहापात्रा ये भी कहती हैं कि हो सकता है कि भविष्य में जाकर भारत की स्वदेशी कोवैक्सीन ही सबसे बेहतरीन वैक्सीन साबित हो जाए।

वैक्सीन को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति जरूर है लेकिन भारत के अलावा दूसरे देश जल्द से जल्द वैक्सीन लेना चाहते हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति वैक्सीन के लिए भारत का अभिनंदन कर चुके हैं तो कई देशों ने भारत सरकार से जल्द से जल्द वैक्सीन देने की गुहार लगाई है। ऐसे में कोविड संक्रमण को जल्द से जल्द रोकने के लिए भारत में वैक्सीनेशन की रफ्तार को बढ़ाना जरूरी है।

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