कोरोना के बाद चीन की अर्थव्यवस्था में भी हाहाकार, वर्ल्ड बैंक ने घटाया विकास दर का अनुमान

चीन का रियल एस्टेट सेक्टर पहले ही शी जिनपिंग के तानाशाही फैसलों की वजह से टूट चुका है और चीनी बैंके के 400 अरब डॉलर पानी में मिल चुका है। वहीं, पिछले दो सालों से चीन ज़ीरो कोविड पॉलिसी पर चल रहा है।

WORLD BANK CHINA

World Bank China: कोरोना वायरस ने चीन में हाहाकार मचाकर रख दी है और चीन के अस्पतालों में मरीजों की भर्ती के लिए जगह नहीं बची है। लिहाजा, चीन में भारी संख्या में लोगों की मौत होने लगी है। वहीं, अब वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट से पता चला है, कि चीन की अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में पता चला है, कि चीन में ना सिर्फ बेरोजगारी में भारी इजाफा हुआ है, बल्कि चीन में कोरोना को रोकने के लिए जो कदम उठाए गये हैं, उसने देश की अर्थव्यवस्था की भट्टी बैठाकर रख दी है।

चीन की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान

चीन की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान

विश्व बैंक ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में चीन की अर्थव्यवस्था के लिए विकास दर के अनुमान में भारी कटौती कर दी है और कहा है, कि महामारी और खराब आर्थिक मैनेजमेंट की वजह से प्रॉपर्टी सेक्टर धाराशाई हो गई है। वर्ल्ड बैंक ने चीन के विकास दर के पूर्वानुमान को घटाकर 2.7 प्रतिशत कर दिया है, जो जून में अनुमानित 4.3 प्रतिशत था। वर्ल्ड बैंक ने कहा है, कि चीन की प्रॉपर्टी सेक्टर में महामारी की वजह से आफत आ गई है और दूसरी कमजोरियों ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। चीन को लेकर विश्वबैंक ने 'नेविगेटिंग अनसर्टिनिटी, चायना इकोनॉमी इन 2023' के नाम से रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि, कोरोना महामारी के दौरान चीन का पब्लिक हेल्थ पॉलिसी काफी ज्यादा कठोर रहा है।

चीन में बढ़ गई है बेरोजगारी

चीन में बढ़ गई है बेरोजगारी

विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन में बेरोजगारी दर में भारी इजाफा हुआ है और यह पढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसमें कहा गया है, कि नौजवानों को नौकरी देने में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बुरी तरह से नाकाम रही है और सरकार के द्वारा उठाए गये शॉर्ट टर्म और स्ट्रक्चरल फैक्टर्स की वजह से भी बेरोजगारी में भारी बढ़ोतरी हुई है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में इस स्थिति को असानान्य बताया है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, सरकार की प्रतिक्रिया काफी हद तक अल्पकालिक समर्थन पर भी निर्भर रही है और इसे स्ट्रक्चरल उपायों के जरिए इसमें सुधार किया जा सकता था। आपको बता दें कि, श्रम बाजार पर महामारी के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए, चीन के नीति निर्माताओं ने रोजगार सब्सिडी और सार्वजनिक कार्य कार्यक्रम पेश किए हैं।

आईएमएफ भी घटा चुका है अनुमान

आईएमएफ भी घटा चुका है अनुमान

वर्ल्ड बैंक के अलावा पिछले ही हफ्ते आईएमएफ के संकेतों में भी चीन की अर्थव्यवस्था में आए भारी नुकसान की चेतावनी दी थी। अक्टूबर महीने में आईएमएफ ने भी चीन के ग्रोथ रेट का अनुमान घटाकर 3.2 प्रतिशत कर दिया था, जो पिछले 10 सालों में सबसे न्यूनतम है। इसमें कहा गया है कि कोविड-19 के प्रकोप और विकास में मंदी के बाद असमान रिकवरी भी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल और मई में कड़े कोविड प्रकोप और कड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के कारण हुई मंदी के बाद, तीसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई, क्योंकि मामलों में फिर से कमी आई। लेकिन, एक बार फिर से कोरोना के मामलों में तेजी से वृद्धि हो गई है और अस्पतालों के बाहर भारी भीड़ देखने को मिल रही है।

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