मुइज्जू की जिद के बाद मालदीव से भारतीय सैनिकों की वापसी शुरू... कामकाज संभालने पहुंची टेक्निकल टीम
India In Maldives: राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के इंडिया ऑउट कैम्पेन के बाद भारत और मालदीव के बीच हुए समझौते के तहत भारतीय सैनिकों की वापसी शुरू हो गई है और उनकी जगह लेने के लिए भारत से टेक्निकल टीम अब मालदीव पहुंच गई है।
ये टेक्निकल टीम भारतीय सैनिकों की जगह लेगा और मालदीव में मेडिकल फैसिलिटी लोगों तक पहुंच करवाने के लिए नई दिल्ली की तरफ से उपलब्ध कराए गए हेलीकॉप्टरों को संभालेगा और उनकी देखरेख करेगा। मालदीव के रक्षा मंत्रालय की तरफ से सोमवार को इस बाबत बयान जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है, कि "वर्तमान में सीनू गण (अड्डू शहर) में तैनात भारतीय सैनिकों के स्थान पर हेलीकॉप्टर का संचालन करने वाला नागरिक दल आज शाम मालदीव पहुंच गया है।"

बयान में आगे कहा गया है, कि ये टीम मंगलवार से हेलीकॉप्टर के संचालन की जिम्मेदारी संभाल लेंगे। इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय ने जोर देकर कहा, कि एक हेलीकॉप्टर जो गण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात किया गया है, उसकी मरम्मत के लिए समुद्री मार्ग से नई दिल्ली पहुंचाया जाएगा और रिप्लेसमेंट बुधवार तक उसी क्षेत्र में आ जाएगा।
मुइज्जू का एंटी-इंडिया कैम्पेन
भारतीय बलों की वापसी उस वक्त हो रही है, जब राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव में लगातार भारत विरोधी अभियान चलाया और उनके चुनावी अभियान में भी इंडिया ऑउट कैम्पेन जोरशोर से जारी रहा। चीन परस्त माने जाने वाले मोहम्मद मुइज्जू के कार्यकाल संभालने के बाद से भारत और मालदीव के संबंध काफी खराब हुए हैं।
मालदीव के मंत्रियों ने प्रधनमंत्री मोदी के खिलाफ छिछले स्तर की बयानबाजी भी की है। वहीं, दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद सैनिकों को निकालने को लेकर समझौता तैयार किया गया, जिसके तहत दो चरणों में भारतीय सैनिकों की मालदीव से वापसी होगी, जबकि उनकी जगह टेक्निकल टीम लेगी।
राष्ट्रपति पद संभालने के बाद, मोहम्मद मुइज्जू ने दुबई में जलवायु शिखर सम्मेलन (सीओपी28) के मौके पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी, जहां मुइज्जू ने भारतीय सैनिकों की वापसी पर सहमति पर जोर दिया। बाद में, नई दिल्ली में बैठकों का एक दौर आयोजित किया गया, जिसमें दोनों देशों के अधिकारियों ने भाग लिया और शर्तों पर सहमति व्यक्त की, जिसमें कहा गया था, कि "अड्डू शहर में स्थित भारतीय सैनिकों को 10 मार्च से पहले वापस ले लिया जाएगा" और एल. कधधू और एचडीएच में स्थित सैनिकों को 10 मई से पहले भारत वापस बुला लेगा।
भारत ने मालदीव को गिफ्ट में दिए हैं हेलीकॉप्टर्स
आपको बता दें, कि मालदीव कई छोटे-छोटे द्वीपों में बंटा हुआ है और मेडिकल इमरजेंसी और किसी दूसरे आपातकालीन हालातों में तत्काल मानवीय मदद पहुंचाने के लिए भारत ने मालदीव को दो हेलीकॉप्टर्स गिफ्ट में दिए थे। इन दोनों हेलीकॉप्टर में एक एडवांस लाइट वेट हेलीकॉप्टर और दूसरा डोर्नियर विमान है, जिनका इस्तेमाल मालदीव में बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता पहुंचना और आपदा राहत कार्य पहुंचाने के लिए किया जाता है।
भारत ने ये हेलीकॉप्टर मालदीव को तब उपलब्ध करवाए थे, जब वहां भारत समर्थक मोहम्मद सोलिह की सरकार थी। लेकिन, मुइज्जू ने इसको लेकर जमकर प्रोपेगेंडा चलाया, जिसे चीन हवा दे रहा था। मुइज्जू का कहना था, कि इन हेलीकॉप्टर्स के बहाने भारतीय सैनिक मालदीव में रहते हैं, जो उसकी संप्रुभता का उल्लंघन है।
मालदीव में मुइज्जू का इंडिया ऑउट कैम्पेन काफी हद तक कामयाब रहा और राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने कहा, कि उनका मकसद मालदीव से भारतीय सैनिकों को बाहर करना है। लेकिन, वो पूरी तरह से अपने इस मकसद में कामयाब नहीं हो पाए और दोनों देशों के बीच समझौते में ये तय किया गया, कि भारतीय सैनिक तो मालदीव से वापस लौट आएंगे, लेकिन उनकी जगह पर टेक्निकल टीम की तैनाती की जाएगी।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का अनुमान है, कि आगे जाकर मोहम्मद मुइज्जू इस समझौते से भी पलटी मार सकते हैं और दोनों देशों के बीच का विवाद नये लेवल पर पहुंच सकता है।












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