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Killer Robots: भविष्य के युद्ध का 'कैप्टन' बनेगा किलर रोबोट्स, क्या इंसानों के लिए होगा विनाशकारी?

किलर रोबोट्स पर प्रतिबंध लगाने को लेकर पिछले साल संयुक्त राष्ट्र ने एक बैठक का आयोजन किया था। 125 देशों वाले इस संगठन की बैठक बेनतीजा खत्म हो गई थी।

Killer robots

Killer robots: आज मानवता युद्ध के एक नए युग के कगार पर खड़ी हो चुकी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तेजी से विकास हो रहा है, जिसने हथियारों के एक नये प्लेटफॉर्म पर दुनिया को लाकर खड़ा कर दिया है। ये वो हथियार हैं, जो खुद निशाना लगा सकते हैं, खुद किसी को मारने का फैसला कर सकते हैं। ये किसी अधिकारी के आदेश की परवाह नहीं करेंगे, बल्कि ये खुद फैसला करेंगे, कि किसे मारना है।

किलर रोबोट्स... भविष्य के युद्ध के लिए तैयार होते ये मशीन, इंसानों की दुनिया के साथ साथ मानवता को भी बदलने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।

आधिकारिक तौर पर, इन किलर रोबोट्स को lethal autonomous weapons systems (LAWS) कहा जाता है, लेकिन आलोचक उन्हें हत्यारा रोबोट कहते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, यूनाइटेड किंगडम, भारत, ईरान, इज़राइल, दक्षिण कोरिया, रूस और तुर्की सहित कई देशों ने हाल के वर्षों में ऐसे हथियारों को विकसित करने में भारी निवेश किया है।

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है, कि पूरी तरह से स्वचालित मोड में तुर्की निर्मित Kargu-2 ड्रोन ने इस नए युग की शुरुआत को मार्क किया, जब उन्होंने 2020 में लीबिया संघर्ष के दौरान इस ड्रोन का भारी इस्तेमाल किया था। इसके साथ ही, यूक्रेन युद्ध में भी ड्रोन काफी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जहां मॉस्को और कीव, दोनों ही एक दूसरे के ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

किलर रोबोट्स.. बदल देंगे युद्ध का तरीका

युद्ध के मैदान में ऐसे मशीनों की तैनाती ने दुनिया भर के विशेषज्ञों, कार्यकर्ताओं और राजनयिकों के बीच गहन बहस चला रखी है, क्योंकि अब युद्ध में रोबोट के इस्तेमाल की संभावनाएं खोजी जा रही है, इससे युद्ध में होने वाले नफा या नुकसान का जायजा लिया जा रहा है, लेकिन एक तबका इसपर काम कर रहा है, कि युद्ध में इस्तेमाल होने से कैसे किलर रोबोट्स को रोका जाए।

लिहाजा, इस वक्त जब तेजी से भू-राजनीतिक स्थितियों में परिवर्तन आ रहे हैं और दुनिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, तो सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, इन मशीनों को लेकर किसी आम सहमति पर पहुंच सकता है?

क्या इस तरह के हथियारों से उत्पन्न नैतिक, कानूनी और तकनीकी खतरे, युद्ध के मैदान पर कब्जा करने से पहले उन्हें रोकने के लिए आवश्यक हैं? क्या किलर रोबोट्स पर पूर्ण प्रतिबंध संभव है, या नियम बनाकर इनके इस्तेमाल को रेगुलेट करना एक यथार्थवादी विकल्प है?

अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना ​​है, कि रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ एक वैश्विक निषेध तंत्र बनाना संभव हो पाया है। जिसे, प्रमुख सैन्य शक्तियां संभावित युद्धक्षेत्र लाभ उठाने में कामयाब रहे हैं, लिहाजा रोबोट को लेकर बनाई गई ऐसी प्रणालियाँ उन्हें कई तरह से भीषण असर से बचा सकती है। लेकिन, ऐसा लगता है कि किलर रोबोट्स को लेकर किसी तरह का कोई नियम बनाने का मन सरकारों को फिलहात तो नहीं है।

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खुल जाएगा तीसरे विश्वयुद्ध का द्वार?

मार्च के अंत में, लंदन स्थित चैथम हाउस में रिसर्चर यास्मीन अफिना ने ब्रिटेन की संसद के दूसरे सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स को बताया, कि कैसे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने गलती से एक अल जज़ीरा पत्रकार की पहचान एक अलकायदा कूरियर के तौर पर की ली थी।

जिसके बाद उस अलजीजरा के पत्रकार को अमेरिका ने यूएस वॉच लिस्ट में डाल दिया। ये खुलासा 2013 में उस वक्त हुआ, जब एडवर्ड स्नोडेन ने अमेरिका के कई सीक्रेट दस्तावेजो को लीक कर दिया था।

अफीना ने अपने बयान में कहा, कि उस घटना के पीछे की निगरानी प्रणाली अपने आप में "एक हथियार प्रणाली नहीं है, लेकिन यह घातक है।" उन्होंने कहा, कि "लेकिन, अगर आप किसी पत्रकार को अपना निशाना बनाना चाहते हैं, तो ये बिल्कुल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के विचारों के खिलाफ होगा।"

ऑस्ट्रेलिया में न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के एआई विशेषज्ञ टोबी वॉल्श भी इस तरह के हथियारों को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है, कि "ये कुछ ऐसा है, कि अनिश्चित और प्रतियोगी माहौल में कम्युटर का इस्तेमाल करना, जैसे शेयर बाजार में किया जाता है, लेकिन शेयर बाजार में भी सर्किट का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि ऐसे परिणामों से बचा जा सके, जो हम नहीं चाहते हैं, जिसे सर्किट ब्रोकर कहा जाता है। ऐसी स्थिति आने पर शेयर बाजार में हम लेन-देन को आसानी से ब्लॉक कर सकते हैं। लेकिन, युद्ध के माहौल में ऐसा नहीं होता है, एक बार युद्ध शुरू होने के बाद विनाश को बदला नहीं जा सकता है"।

वॉल्श ने अल जज़ीरा को बताया, कि "इसका मतलब यह नहीं है, कि शोधकर्ताओं को स्वचालित हथियार प्रणालियों के पीछे की तकनीक विकसित करना बंद कर देना चाहिए, उन्हें बनाना चाहिए, लेकिन युद्ध के मैदान के लिए नहीं, बल्कि इंसानों की भलाई के लिए।"

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कैमिकल हथियारों पर है रोक

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि रोबोट युद्ध अगर शुरू होता है, तो एक वक्त ऐसा आएगा, जब ये इंसानों की पहुंच से दूर हो जाएगा और चाहकर भी इसे रोका नहीं जा सकता है। इसके अलावा, रोबोट क्या सिर्फ दुश्मन को ही मारेंगे, शायद नहीं, क्योंकि अंतत: ये सिर्फ प्रोग्राम पर ही आधारित है।

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है, कि जब रासायनिक हथियारों का उपयोग किया जाता है, तो वे पहले पन्ने की सुर्खियाँ बनाते हैं और वैश्विक आक्रोश को जन्म देते हैं। संयुक्त राष्ट्र का रासायनिक हथियार सम्मेलन उनके विकास, उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर रोक लगाता है। इसने, रासायनिक हथियारों के आसपास अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर, प्रमुख हथियार कंपनियों को उनके उत्पादन से सफलतापूर्वक रोक दिया है।

लिहाजा, वॉल्श ने कहा, "हम पेंडोरा को वापस एक बॉक्स में नहीं रख सकते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उन उपायों ने आज दुनिया भर के युद्धक्षेत्रों में रासायनिक हथियारों के दुरुपयोग को काफी हद तक सीमित कर दिया है।"

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    फायदे और नुकसान

    युद्ध में रोबोट्स का इस्तेमाल, सैनिकों के उपयोग के बिना युद्ध के कुछ कामों को अंजाम दे सकते हैं, जिससे हताहतों की संख्या कम हो जाती थी। समर्थकों का तर्क है, कि इन प्रणालियों में सोफिस्टिकेटेड तकनीक इस्तेमाल किए जाते हैं, लिहाजा ये मानवीय त्रुटि को समाप्त या कम कर सकती है और इसके फैसला करने की क्षमता को बढ़ाती हैं, लिहाजा इससे इंसानों की जान पर खतरा कम से कम होगा।

    लेकिन, कई विशेषज्ञों का कहना है, कि युद्ध में रोबोट के इस्तेमाल से फायदे से ज्यादा खतरे हैं और वैज्ञानिकों को ऐसे खतरों को किसी भी हाल में अनदेखा नहीं करनी चाहिए।

    किलर रोबोट्स के हाथ में युद्ध को छोड़ देने का मतलब है, कि जीवन और मौत का फैसला करने का अधिकार मशीनों के हाथ में सौंप देना। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इंसानों जानों का फैसला करने का अधिकार मशीनों के हाथ में देना, ना सिर्फ नैतिक तौर पर गलत है, बल्कि मानवता के लिए विनाशक स्थिति है।

    एक्सपर्ट्स का कहना है, किलर रोबोट के हाथ में एक बंदूक होगा और ट्रिगर पर उसकी ऊंगली होगी और उसके सामने टारगेट कौन होगा, उसे उससे कोई मतलब नहीं होगा। वो किसी बच्चे में, किसी बुजुर्ग में या कोई महिला में.... वो कोई फर्क नहीं करेगा।

    इसके साथ ही, अगर कोई सैनिक घायल हो चुका है और उसे इलाज की जरूरत है, या कोई सरेंडर करना चाहता है, इसका फैसला भी किलर रोबोट्स नहीं कर सकते हैं। लिहाजा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इंसानों की लड़ाई इंसानों के बीच होनी चाहिए और उसपर इंसानों का नियंत्रण होना चाहिए, नहीं तो ये पूरी दुनिया के लिए विनाशक स्थिति होगा।

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