भारत और चीन के बीच चौधरी बन कर क्या हासिल करना चाहते थे चाचा ट्रंप ?

नई दिल्ली। चाचा ट्रंप क्या एशिया का चौधरी बनना चाहते हैं ? वे बार-बार एशिया के द्विपक्षीय मामलों में 'पंचैती’ की अनचाही पेशकश करते रहे हैं। अभी तक उनकी दाल गली नहीं है। राष्ट्रपति का चुनाव जीतने के लिए ट्रंप दुनिया में अपनी छवि एक एक 'ग्रेट मीडिएटर’ की बनाना चाहते हैं। 2017 में उन्होंने दक्षिण चीन सागर के विवाद में मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा था। 2019 में ट्रंप ने कश्मीर समस्या पर मीडिएटर बनने का बिन मांगा सुझाव दिया था। दो देशों के झगड़े में कूद कर ट्रंप एशिया में दखल बढ़ाना चाहते हैं। अब जब उन्होंने भारत-चीन सीमा विवाद में मध्यस्थता की पेशकश की तो उनकी भारी फजीहत हो गयी। भारत और चीन दोनों ने ट्रंप से कह दिया, मेरे अंगने में तुम्हरा क्या काम है। हम समस्या सुलझाने में खुद सक्षम हैं। जाहिर है कोई भी देश अपने द्विपक्षीय मामले में किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप को कभी स्वीकार नहीं करेगा। ऐसा इसलिए क्यों कि उसकी संप्रभुता इस बात की इजाजत नहीं देती।


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     क्या झूठे ट्रंप भारत-तीन में झगड़ा लगाना चाहते हैं ?

    क्या झूठे ट्रंप भारत-तीन में झगड़ा लगाना चाहते हैं ?

    वाशिंटन पोस्ट अखबार के मुताबिक राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप 10 हजार से अधिक झूठ बोल चुके हैं। एक और झूठ उन्होंने गुरुवार को बोला। चीन सीमा विवाद पर डोनाल्ड ट्रंप की भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कोई बात नहीं हुई थी। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने गुरुवार को वाशिंटन में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि उनकी मोदी से बात हुई है और मोदी चीन सीमा विवाद को लेकर अच्छे मूड में नहीं हैं। ट्रंप ने दो दिन पहले एक ट्वीट के जरिये कहा था कि भारत और चीन के बीच तनाव को दूर करने के लिए वे मध्यस्थता करने को तैयार हैं। जब पत्रकारों ने मध्यस्थता को लेकर उनसे सवाल पूछे तो ट्रंप ने मोदी से बातचीत का झूठा हवाला दे दिया। भारत ने तत्काल ट्रंप के इस बयान का खंडन किया। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल में डोनाल्ड ट्रंप से कोई बात नहीं हुई है। इन दोनों नेताओं के बीच आखिरी बातचीत 4 अप्रैल को हुई थी जो हाइड्रोक्सो क्लोरोक्वीन दवा को लेकर थी। ट्रंप ने आखिर क्यों कहा कि चीन को लेकर मोदी का मूड ठीक नहीं है? क्या ऐसा बोल कर वे भारत और चीन में लड़ाई कराना चाहते हैं? क्या ट्रंप चीन से खुन्नस निकालने के लिए भारत को इस्तेमाल करना चाहते हैं?

     दक्षिण चीन सागर विवाद और ट्रंप की पंचैती !

    दक्षिण चीन सागर विवाद और ट्रंप की पंचैती !

    दक्षिण चीन सागर दक्षिण पूर्व एशिया में है जो प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे से लगा हुआ है। इस सागर का दक्षिणी सिरा चीन की मुख्यभूमि को छूता है। दक्षिण पूर्वी हिस्से पर ताइवान का दावा है। पूर्वी किनारा वियतनाम और कम्बोडिया को छूता है। पश्चिम में फिलीपींस तो उत्तर में इंडोनेशिया इस सागर से सटा हुआ है। इस समुद्दी क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार है। यह विश्व का एक प्रमुख व्यापारिक जलमार्ग है। माना जाता है कि इस जलमार्ग से हर साल 5 लाख करोड़ डालर का व्यापार होता है। चीन दक्षिण चीन सागर के 90 फीसदी हिस्से को अपना मानता है। चीन पर आरोप है उसने इस क्षेत्र में अपना दबदबा बनाने के लिए समुद्र के बीच 32 हजार एकड़ क्षेत्र में एक कृत्रिम द्वीप बना लिया है। दूसरी तरफ इस सागर में स्प्राटल एक बड़ा प्राकृतिक द्वीप है जिस पर चीन, ताइवान और वियतनाम तीनों अपना दावा जताते हैं। अमेरिका ने 2012 से एशिया प्रशांत क्षेत्र में अपनी ताकत बहुत तेजी से बढ़ायी है। दक्षिणी चीन सागर में चीन की बढ़ती दखल से अमेरिका परेशान है। अमेरिका ताइवान और दूसरे मित्र देशों की मदद करना चाहता है। उसने 2017 में दक्षिण चीन सागर के विवाद पर भी मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था जिसे चीन ने सिरे से खारिज कर दिया था। हाल ही में जब गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद उग्र हो गया था तो अमेरिकी ने इसकी तुलना दक्षिण चीन सागर विवाद से की थी।

     कश्मीर मसले में भी टांग अड़ायी थी ट्रंप ने

    कश्मीर मसले में भी टांग अड़ायी थी ट्रंप ने

    जुलाई 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि कश्मीर पर मध्यस्थता को लेकर जो भी कर सकते हैं, करेंगे। कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए मैंने दोनों देशों को मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है। जनवरी 2020 में भी ट्रंप ने फिर वही राग अलापा था। भारत पहले ही स्पस्ट कर चुका है कि कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष का दखल बिल्कुल मंजूर नहीं है। भारत ने तब दो टूक कहा था कि ट्रंप के बार-बार मध्यस्थता की रट लगाने से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी। मध्यस्थता की बात से मुद्दा भटक जाएगा जिससे आंतकवाद को लेकर पाकिस्तान पर बनाया गया अंतर्राष्ट्रीय दबाव कम हो जाएगा। ट्रंप ने 2019 में भी झूठ बोला था। मोदी ने कश्मीर मसले पर उनसे मध्यस्थता करने की बात कही थी। जब भारत ने इस पर कड़ा विरोध जताया तो अमेरिकी विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी थी। तब अमेरिका को मानना पड़ा था कि कश्मीर समस्या भारत का द्वीपक्षीय मामला है। चौधऱी बनने की चाहत में चाचा ट्रंप झूठे और बतोलेबाज बानते जा रहे हैं।

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