वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो क्यों बोले- हम भिखारी नहीं

ख़्वान ग्वाइदो
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ख़्वान ग्वाइदो

वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर आम चुनाव कराने को लेकर अतंरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है.

फ्रांस, जर्मनी और स्पेन समेत यूरोपीय संघ के करीब 16 देशों ने ख़्वान ग्वाइदो को देश के अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर आधिकारिक मान्यता दे दी है. अमरीकी और ब्रिटेन भी ग्वाइदो को मान्यता दे चुके हैं.

इस बीच, ग्वाइदो ने राष्ट्रपति मादुरो की उस चेतावनी को खारिज कर दिया है, जिसमें राष्ट्रपति ने कहा था कि राजनीतिक संकट से देश में गृहयुद्ध भड़क सकता है.

उन्होंने इसे मादुरो की 'कल्पना' बताया है. मादुरो ने ग्वाइदो पर आरोप लगाया था कि वो लोगों के दिमाग में डर भर रहे हैं.

उधर, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने मादुरो पर तानाशाही चलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वो अपने देश के लोगों को ताक पर रखकर कुर्सी से चिपके हुए हैं.

ट्रूडो लैटिन अमरीकी देशों और कनाडा के समूह लिमा की ओर से बुलाई गई एक आपात बैठक में बोल रहे थे.

ट्रूडो ने कहा कि मादुरो सरकार शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर अत्यधिक बल प्रयोग कर रही है.

मादुरो को वेनेज़ुएला की सेना का समर्थन हासिल है
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मादुरो को वेनेज़ुएला की सेना का समर्थन हासिल है

रूस मादुरो के साथ

दरअसल वेनेज़ुएला भयानक आर्थिक तंगी के दौर से गुज़र रहा है. यहां दवाओं और खाने जैसी ज़रूरी चीज़ों की कमी हो गई है.

वेनेज़ुएला के लोग महंगाई की मार झेल रहे हैं. पिछले साल वेनेज़ुएला में हर 19 दिन में चीज़ों के दाम औसतन दोगुने हो रहे थे. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2014 से अब तक तीस लाख लोग देश छोड़कर जा चुके हैं.

वेनेज़ुएला के लोग इन्हीं मुद्दों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार पर आरोप है कि वो प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए सैन्य बल का प्रयोग करती है.

इस बीच हाल में हुए राष्ट्रपति चुनावों में धांधली के आरोप लगाकर देश की नेशनल असेंबली के प्रमुख और विपक्षी नेता ख़्वान ग्वाइदो ने खुद को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित कर दिया और अमरीका समेत बड़ी ताकतों का समर्थन हासिल कर लिया.

इस बीच मादुरो सरकार के पक्षधर रूस ने वेनेज़ुएला में विदेशी दखल की निंदा की है. रूस का कहना है कि ये "छीनी गई सत्ता को वैध ठहराने" की कोशिश है.

वेनेज़ुएला में आर्थिक संकट
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वेनेज़ुएला में आर्थिक संकट

यूरोपीय देशों की आर्थिक मदद

इस बीच ग्वाइदो को मान्यता देने वाले देशों ने कहा है कि वो वेनेज़ुएला के लोगों को मदद के तौर पर खाने का सामान और दवाएं देंगे. इसके लिए इन देशों ने वेनेज़ुएला को करोड़ों डॉलर की मदद देने की बात कही है.

ग्वाइदो ने देश की सेना से अपील की है कि वो इन ज़रूरी सामानों को लोगों तक पहुंचाने में मदद करें, जिससे लाखों लोगों के जीवन को बचाया जा सके.

ये मदद कोलंबिया से लगने वाली सीमा से लाई जाएगी. ग्वाइदो चाहते हैं कि सेना ये सामान वहां से लेकर लोगों में बांटने में मदद करे.

वेनेज़ुएला की सेना अबतक राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के प्रति वफादार रही है.

मादुरो ने यूरोपीय संघ की इस मदद की पेशकश को ये कहते हुए ठुकरा दिया था कि वेनेज़ुएला के लोग भिखारी नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि वेनेज़ुएला मानवीय मदद के झूठे वादे के झांसे में नहीं आएगा. "वेनेज़ुएला काम करेगा, उत्पादन करेगा और अपनी अर्थव्यवस्था को आगे ले जाएगा. हम भिखारी नहीं है."

वेनेज़ुएला में आर्थिक संकट
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वेनेज़ुएला में आर्थिक संकट

वहीं राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने घोषणा की है कि वो अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को एक खुला खत लिखेंगे, जिसके लिए वो देश के लोगों के हस्ताक्षर इकट्ठा कर रहे हैं. इस खत में वो लिखेंगे कि देश विदेशी सैन्य हस्तक्षेप को अस्वीकार करता है.

निकोलस मादुरो ने वेनेज़ुएला के लोगों से कहा है कि वो 'शांति की इस यात्रा' में शामिल हों.

उनका कहना है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप खून से सने हाथों से उन्हें कुर्सी से हटाना चाहते हैं.

निकोलस मादुरो
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निकोलस मादुरो

इटली किसका समर्थक?

वेनेज़ुएला संकट को लेकर इटली के सत्ताधारी गठबंधन की राय बंटी हुई है. लीग पार्टी ख़्वान ग्वाइदो को वेनेज़ुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता देने के पक्ष में है, तो उसकी सहयोगी फाइव स्टार मूवमेंट इसके खिलाफ है. फाइव स्टार मूवमेंट का कहना है कि किसी दूसरे देश को ये बताना कि वो क्या करे, ये ईयू का काम नहीं है.

फाइव स्टार के एक सांसद का कहना है कि यूरोप को अमरीका के आदेशों को मानना बंद करना चाहिए.

वहीं इटली के राष्ट्रपति सर्गियो मातरेला ने दोनों पार्टियों से ख़्वान ग्वाइदो के समर्थन में आने की अपील की है.

उन्होंने कहा, "वेनेज़ुएला और इटली के संबंध काफी मज़बूत हैं. इटली के कई लोग वेनेज़ुएला में रहते हैं और वेनेज़ुएला के कई लोग इटली में. यूरोपीय संघ के सहयोगियों के साथ एकमत होना भी हमारी ज़िम्मेदारी है. लोगों की मर्ज़ी व लोकतंत्र और सेना की हिंसा व लोगों की पीड़ा में से किसी एक को चुनने में हमें संकोच नहीं करना चाहिए."

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