क्यों हुई पोटैशियम आयोडाइड पिल्स की किल्लत ? यूक्रेन युद्ध की वजह से बढ़ गई है मांग, इसके बारे में सबकुछ जानिए

नई दिल्ली, 15 मार्च: यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद पूरे यूरोप और अमेरिका में पोटैशियम आयोडाइड की गोलियों की किल्लत हो गई हैं। मांग में भारी इजाफे के चलते इसकी कीमते भी आसमान छूने लगी है। दरअसल, इसकी मांग बढ़ने के पीछे रेडियोऐक्टिव आयोडीन के रेडिएशन का डर है, जो यूक्रेन के अलग-अलग न्यूक्लियर प्लांट पर मंडरा रहा है। यह खतरा दोनों तरह का है। एक तो परमाणु संयंत्रों पर हमले का डर है और दूसरा मौजूदा संकट की वजह से दुर्घटनाओं की भी आशंका बनी हुई है। अगर ऐसा हुआ तो वातावरण में रेडियोऐक्टिव आयोडीन फैल सकता है, जो कि फेफड़ों या थायरॉयड ग्लैंड में जा कर उसे छलनी कर सकता है।

पोटैशियम आयोडाइड क्या है ? (केआई)

पोटैशियम आयोडाइड क्या है ? (केआई)

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक पोटैशियम आयोडाइड एक स्थिर (स्टेबल) आयोडीन नमक है, जो थायरॉयड ग्लैंड में रेडियोऐक्टिव आयोडीन के दाखिल होने से रोकने में मदद कर सकता है। यानि इस ग्लैंड को रेडिएशन के घात से बचा सकता है। इस तरह के आघात से थायरॉयड ग्लैंड को नुकसान पहुंच सकता है, जो कि शरीर में विभिन्न हारमोन को नियंत्रित करता है और इसकी वजह से कैंसर जैसे गंभीर रोग होने का भी खतरा पैदा हो सकता है। सीडीसी ने यह भी कहा है कि खाने वाले आयोडाइज्ड नमक और आयोडीन की अधिकता वाले खाने में इतना पर्याप्त आयोडीन नहीं होता, जो कि रेडियोऐक्टिव आयोडीन को थायरॉयड ग्लैंड में दाखिल होने से रोक सके। इसलिए खाने वाले नमक या आयोडीन की अधिकता वाले खाने को पोटैशियम आयोडाइड के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

पोटैशियम आयोडाइड कैसे काम करता है ?

पोटैशियम आयोडाइड कैसे काम करता है ?

थायरॉयड ग्लैंड स्थिर और रेडियोऐक्टिव आयोडीन में फर्क नहीं कर सकता। यह दोनों को अवशोषित कर लेगा। पोटैशियम आयोडाइड रेडियोऐक्टिव आयोडीन को थायरॉयड में दाखिल होने से रोकता है। जब कोई व्यक्ति पोटैशियम आयोडाइड की गोली खा लेता है तो दवा में मौजूद स्टेबल आयोडीन को थायरॉयड सोख लेता है। यानि अब थायरॉयड में प्रचूर मात्रा में स्टेबल आयोडीन मौजूद होता है, जिससे यह किसी भी तरह के और आयोडीन, चाहे स्टेबल हो या रेडियोऐक्टिव उसे अगले 24 घंटे तक अवशोषित नहीं कर पाएगा।

पोटैशियम आयोडाइड की टैबलेट कब लेनी चाहिए ?

पोटैशियम आयोडाइड की टैबलेट कब लेनी चाहिए ?

पोटैशियम आयोडाइड की टैबलेट तभी लेनी चाहिए, जब निश्चित तौर पर रेडिएशन का खतरा हो। सीडीसी की वेबसाइट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि इसकी ज्यादा डोज लेने से या ज्यादा बार लेने से ज्यादा सुरक्षा नहीं मिलती, बल्कि इससे गंभीर रूप से बीमार पड़ने का डर है और यहां तक की मौत भी हो सकती है। इसलिए इसमें सलाह दी गई है कि इसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक परामर्श के बाद ही लेना चाहिए।

अमेरिका में बढ़ी किल्लत, दाम में भी इजाफा

अमेरिका में बढ़ी किल्लत, दाम में भी इजाफा

सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से अमेरिका में उपलब्ध पोटैशियम आयोडाइड पिल्स की कीमतें बढ़ गई हैं। लंदन स्थित दवा कंपनी बीटीजी स्पेशियलिटी ने कहा है कि उसके पोटैशियम आयोडाइड प्रोडक्ट की भी अमेरिका में मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है। मांग बढ़ने का सीधा असर कीमतों में उछाल के रूप में देखने जाने की खबरें हैं। अमेरिका में सोमवार को ईबे पर थायरोसेफ पोटैशियम आयोडाइड के चार बॉक्स के दाम 132.50 डॉलर थे। इसी तरह आयोसैट-130 एमजी टैबेलट के एक बॉक्स की कीमत 89.95 डॉलर थी।

यूरोप में स्टॉक कर रहे हैं लोग

यूरोप में स्टॉक कर रहे हैं लोग

फॉर्चून की एक रिपोर्ट के अनुसार रूस और यूक्रेन में जारी जंग को देखते हुए यूरोप में डर की वजह से काफी लोगों ने आयोडीन टैबलेट का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। ब्रसेल्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से अपने न्यूक्लियर फोर्स को हाई अलर्ट पर रखने की घोषणा के बाद बेल्जियम के करीब 30,000 निवासी मुफ्त की आयोडीन टैबलेट लेने के लिए फार्मेसी पहुंच गए। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से फिनलैंड में पोटैशियम आयोडाइड टैबलेट की मांग में 100 गुना इजाफा हो गया है।

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