पापुआ न्यू गिनी के पीएम जेम्स मारापे कौन हैं? जिन्होंने PM मोदी के पैर छूकर लिया आशीर्वाद.. ऐसा क्यों किया?
प्रशांत क्षेत्र को लेकर भारत हमेशा से उदासीन रहा है। पूर्व प्रधानंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 में पहली बार प्रशांत क्षेत्र स्थिति फिजी देश का दौरा किया था और उसके बाद 2014 में पीएम मोदी फिर से फिजी गये थे।

Papua New Guinea: जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पापुआ न्यू गिनी में प्रशांत नेताओं के साथ वार्ता के लिए पहुंचे, हवाईअड्डे पर उनका स्वागत उनके समकक्ष जेम्स मारापे ने किया।
हवाई अड्डे पर पहुंचकर किसी विदेशी नेता का स्वागत करना, सामान्य डिप्लोमेटिक गर्मजोशी का प्रतीक है, लेकिन किसी नेता का पैर छूकर प्रणाम करना, ये अपने आप में असामान्य है।
पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे एयरपोर्ट पर भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए पहुंचे थे और और जब पीएम मोदी फ्लाइट से उतरे, तो दोनों नेता गले लगे। लेकिन, इसके बाद मारापे ने नीचे झुककर पीएम मोदी के पैर छू लिए।
ये राजनीतिक शिष्टाचार से काफी दूर की बात है और किसी देश के प्रधानमंत्री का पैर छूना, ये आश्चर्य से परे है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।
लेकिन, पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री का भारतीय प्रधानमंत्री का पैर छूना बताता है, कि पापुआ न्यू गिनी और प्रशांत क्षेत्र के देश, भारत को किस नजरिए से देखते हैं और भारत से उन्हें क्या उम्मीदे हैं और पीएम मोदी का पैर छूना बताता है, कि इस क्षेत्र में भारत के लिए असीमित अवसर हैं और चीन को पैर जमाने से पहले ही भारत के पास एक बड़ा मौका है।
आईये जानते हैं, कि पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे कौन हैं और उन्होंने पीएम मोदी के पैर क्यों छुए?
प्रधानमंत्री जेम्स मारापे कौन हैं?
1. जेम्स मारापे 2019 से पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री हैं और PANGU Pati राजनीतिक दल से संबंधित हैं।
2. 52 साल के मारापे ने किसी देश के प्रधानमंत्री का पैर छूकर एक उदाहरण बना दिया है, और दुनिया के किसी अन्य नेता के लिए ऐसा नहीं किया है।
3. जेम्स मारापे ने साल 1993 में पापुआ न्यू गिनी विश्वविद्यालय से कला में स्नातक की डिग्री हासिल की।
4. उनके पास पर्यावरण विज्ञान में स्नातकोत्तर ऑनर्स और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री भी है।
5. वह पापुआ न्यू गिनी द्वीप राष्ट्र के 8वें प्रधान मंत्री हैं और अतीत में सरकारों में कई महत्वपूर्ण कैबिनेट पदों पर रहे हैं।
6. उन्होंने पापुआ न्यू गिनी में परिवहन विभाग के लिए संसदीय सचिव के रूप में भी काम किया है, और वो अंतर-सरकारी संबंधों पर संसदीय रेफरल समिति का हिस्सा रहे हैं।
7. उन्होंने 2019 में पीपुल्स नेशनल कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया और फिर पंगु पाटी में शामिल हो गए।
8. गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में, अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से उनकी सरकार को गिराने का असफल प्रयास किया गया था।
9. जेम्स मारापे के साथ वार्ता के बाद, पीएम मोदी ने ट्वीट किया, "जेम्स मारापे और मेरे बीच बहुत ही उपयोगी बातचीत हुई, जिसमें भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों की पूरी श्रृंखला शामिल थी। हमने वाणिज्य, प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की
10. आज पापुआ न्यू गिनी में फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FPIC) की बैठक हो रही है, जिसमें प्रशांत क्षेत्र में स्थिति सभी 14 द्वीप राष्ट्रों के राष्ट्रप्रमुख हिस्सा ले रहे हैं।
पैर छूने का डिप्लोमेटिक मतलब क्या है?
जियो-पॉलिटिक्स में नेताओं के हाव भाव, बोलने का तरीका, बात करने का तरीका, मिलने का तरीका बहुत कुछ बताता है। अकसर देखा जाता है, कि एक नेता हाथ नहीं मिलाकर किसी दूसरे देश के नेता को अपनी नाराजगी का संकेत देते हैं।
लिहाजा, पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री का पैर छूना, इस बात के संकेत हैं, कि पापुआ न्यू गिनी भारत के साथ अपने रिश्ते को एक नये लेवल पर ले जाना चाहता है। वो भारत पर, भारत की संस्कृति पर, भारत की विचारधारा पर विश्वास करता है।
पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी के पैर छूकर ये संकेत दे दिए हैं, वो प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ खड़ा रहने के लिए तैयार है और अब गेंद भारत के पाले में है, कि वो इस संबंध को कितनी तेजी से आगे ले जाता है।
पापुआ न्यू गिनी में पहली बार भारत के किसी प्रधानमंत्री का दौरा हो रहा है, जबकि प्रशांत क्षेत्र में ये सिर्फ तीसरी बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा है। 1991 में इंदिरा गांधी ने फिजी का दौरा किया था और 2014 में पीएम मोदी ने फिजी का दौरा किया था और अब 2023 में पहली बार पापुआ न्यू गिनी के दौरे पर पीएम मोदी हैं, लिहाजा अब भारत को अपनी प्रशांत क्षेत्र नीति को लेकर नये सिरे से विचार करना होगा और प्रशांत क्षेत्रों से नये सिरे से संबंधों का विस्तार करना होगा।
भारत के लिए अवसर क्या हैं?
पापुआ न्यू गिनी और दूसरे प्रशांत क्षेत्र के द्वीप देशों से रणनीतिक और सामरिक संबंध बनाकर भारत, चीन को काउंटर कर सकता है, जिसने सोलोमन द्वीप में सैन्य बंदरगाह बनाकर भारत के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।
इसके अलावा, नई दिल्ली में सेंटर फॉर न्यू इकोनॉमिक डिप्लोमेसी के एक सहयोगी साथी स्वाति प्रभु ने बताया, कि "पापुआ न्यू गिनी का कई अहम चुनौतियों का सामना करता है, जिसमें सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन और अनुकूलन है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारत सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सस्ती साझेदारी की पेशकश करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।"
इसके साथ ही पापुआ न्यू गिनी के पास प्राकृतिक गैस और खनिज हैं, लिहाजा वो इन उत्पादों के जरिए भी अपनी अर्थव्यवस्था को बेहतर बना सकता है। भारत पापुआ न्यू गिनी में गैस प्लेटफॉर्म में निवेश कर अपने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है।
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लिहाजा, चीन को काउंटर करने की भी जरूरत है। हालांकि, कुछ लोग प्रशांत द्वीप देशों तक भारत की पहुंच को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में देखे जाने की अपनी महत्वाकांक्षाओं के हिस्से के रूप में देखते हैं।
यानि, प्रशांत द्वीप देशों में प्रभाव बनाने की भारत की कोशिश एक महत्वाकांक्षी शुरुआत है, हालांकि, भारत की अपनी सीमाएं हैं। क्योंकि भारत, चीन के संसाधनों से मेल नहीं कर सकता है और नई दिल्ली का प्राथमिक ध्यान दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में अपने तत्काल पड़ोस पर ही रखना होगा, लेकिन फिर भी भारत इस क्षेत्र को नजरअंदाज नहीं कर सकता है और एक विशेष रणनीति बनाकर आगे बढ़ सकता है।












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