जापान के युवाओं में बच्चे पैदा करने की 'क्षमता' क्यों हो गई कम? आप भी समस्याओं को जान लीजिए
जापान जिन स्थितियों का अनुभव कर रहा है, उससे पता चलता है, कि जब किसी देश में एक बड़ी आबादी में और लगातार जन्म दर में कमी आने लगे, तो फिर उसे रोकना कितना मुश्किल हो जाता है।

Japan Population Decline: जापान का नाम सुनते ही सबसे पहला ख्याल यही आता है, कि वहां के लोग खूब मेहनती होते हैं और टेक्नोलॉजी के मामले में जापान को महारत हासिल है। लेकिन, तमाम टेक्नोलॉजी के होते हुए भी जापान जनसंख्या समस्या से बुरी तरह से जूझ रहा है। जापान की आबादी तेजी से सिकुड़ रही है और बच्चे पैदा करने पर बड़ा ईनाम होने के बाद भी जापान का जन्मदर बढ़ने का नाम ही नहीं ले रहा है। स्थिति ये हो गई है, कि जापान की आबादी के एक चौथाई हिस्से की उम्र 62 साल से ज्यादा है। यानि, जापान तेजी से बूढ़ा होता जा रहा है और सरकार की हर कोशिशें नाकाम हो रही है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? जापान के युवा बच्चे पैदा करना क्यों नहीं चाहते हैं? जापान के युवाओं में किस बात का डर है, आखिर जापानी युवाओं में बच्चे पैदा करने से लेकर उन्हें पालने-पोसने और परिवरिश करने की क्षमता क्यों कम हो गई है? आइये समझते हैं।

जापान की जनसंख्या का गणित समझिए
जापान की जनसंख्या इस सदी के मध्य तक बुरी तरह से सिकुड़ जाने का अनुमान है। अनुमान लगाया गया है, कि साल 2065 तक जापान की आबादी घटकर 8 करोड़ 80 लाख हो जाएगी। यानि, वर्तमान जनसंख्या के मुकाबले कुल जनसंख्या में 30 प्रतिशत तक की कमी आ जाएगी। जापान की जनसंख्या फिलहाल 12 करोड़ 50 लाख के आसपास है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान की जनसंख्या में तेजी से कमी आने की मुख्य वजह जापानी युवाओं लगातार कम होती प्रजनन क्षमता है। 1970 के दशक के मध्य से जापान की प्रजनन दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और 2000 के दशक की शुरुआत में महिलाओं का प्रजनन दर (Total Fertility Rate) घटकर सिर्फ 1.3 के स्तर तक पहुंच गया था, जो चिंताजनक है। वहीं, साल 2005 में जापान का टीएफआर घटकर 1.26 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, सरकारी कोशिशों के बाद साल 2010 में इसमें मामूली सुधार हुआ और ये 1.4 के स्तर तक पहुंचा।

बच्चे पैदा करने में क्यों हो रही परेशानी?
जापान में पिछले कई सालों से लिव-इन रिलेशनशिप का चलन तेजी से बढ़ा है। लिहाजा, लिव-इन में रहने वाले युवा अपनी जिंदगी तो मजे से जीने लगे हैं, लेकिन उन्होंने मां-बाप बनने से छुटकारा पा लिया है। जापान में शादी के बाहर बहुत कम बच्चे पैदा हो रहे हैं। यानि, युवा अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भले ही साथ रहते हैं, लेकिन वो बच्चों को 'झंझट' मानने लगे हैं। 1950 के दशक के बाद से जापान में शादी के बाहर बच्चे का जन्म सभी जन्मों का लगभग 2% है। जापान की प्रजनन दर में गिरावट मुख्य रूप से कम युवा महिलाओं की शादी के कारण है। जापान में चरम प्रजनन उम्र (25 से 34) में अविवाहित रहने वाली लड़कियों का अनुपात 1970 तक स्थिर बना रहा, लेकिन 1975 तक ये अनुपात बढ़कर 21 प्रतिशत से उपर चला गया और आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे, कि साल 2020 में 25 से 29 साल की उम्र तक की 66 प्रतिशत लड़कियों ने शादी ही नहीं की है। वहीं, 30 से 34 साल की उम्र की 39 प्रतिशत लड़कियों ने शादी नहीं की है। जापान के लिए ये आंकड़ा चौंकाने वाला नहीं, बल्कि डराने वाला है।

शादी से जापानियों का टूट रहा दिल?
जापान की युवा लड़कियां, देश में आर्थिक अवसरों में तेजी से सुधार के कारण शादी करने और बच्चे पैदा करने से कतराने लगी हैं। जापान में साल 1980 के बाद से चार सालों वाले प्रोफेशनल कोर्स में लड़कियों के दाखिले में भारी वृद्धि दर्ज की गई और साल 2020 में जापान की 51 प्रतिशत लड़कियां चार वर्षीय कॉलेज प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला लेने लगी हैं। वहीं, जापान में युवा महिलाओं की रोजगार दर में भी भारी वृद्धि हुई है। 25 साल से 29 साल तक की आयु वर्ग की महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 1970 में 45% से लगभग दोगुनी होकर 2020 में 87% हो गई है। जिसका असर सीधे तौर पर जापानी समाज पर पड़ा है और जापान में विवाह परंपरा का पतन होने लगा है। प्रोफेशनल लड़कियां अब शादी के 'बंधन' में बंधने के लिए तैयार ही नहीं हो रही हैं। जापान की लड़कियों के लिए शादी करना, बच्चे पैदा करना, उनकी परवरिश करना, घर संभालना अब बहुत बड़ा बोझ बन गया है। इसके साथ ही जापानी समाज में घरेलू कार्य में पुरूषों का योगदान अभी भी काफी कम है और इसने लड़कियों के मन को शादी करने से और तोड़ा है, लिहाजा जापानी समाज का तानाबाना ही गड़बड़ाने लगा है।

लड़कियों के साथ भी समस्याएं कम नहीं
जापान में एक तरफ लड़कियों के लिए आर्थिक अवसर तो काफी ज्यादा बढ़ चुके हैं, लेकिन इतने सालों के बाद भी जापानी समाज अपनी मानसिकता में परिवर्तन लाने में नाकाम रहा है। लिहाजा, प्रोफेशनल विवाहित महिलाओं के लिए अपने कामकाज और अपने घरेलू जीवन में तालमेल बिठाना काफी मुश्किल हो चुका है। जिन महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया है, उनके लिए अपने बच्चों को पालना एक 'मुसीबत' बन चुका है, लिहाजा जब प्रोफेशनल लड़कियां जब ऐसी महिलाओं को अपने आसपास, अपनी कंपनी में, परेशान देखती हैं, तो फिर वो शादी करने की बात से ही मुकर जाती हैं। उनमें शादी करने और बच्चा पैदा करने को लेकर खौफ बैठ जाता है और नतीजा आज की स्थिति के तौर पर नजर आता है।

सरकारी कोशिशें हो रही हैं नाकाम
जापान की सरकार ने प्रजनन क्षमता में आई भारी गिरावट की समस्या से निजात पाने के लिए 1990 के दशक के मध्य में कम प्रजनन क्षमता ('शौशिका-ताइसाकु') को संबोधित करने वाले कार्यक्रमों की एक श्रृंखला की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत जापानी सरकार ने चाइल केयर संस्थानों की सेवाओं में विस्तार करना शुरू किया और वर्क-लाइफ बैलेंस बनाने के लिए भी कई योजनाएं शुरू कीं। लेकिन, इसका असर नहीं दिख रहा है। पिछले कुछ सालों से जापानी सरकारों ने जन्म से लेकर युवावस्था तक दीर्घकालीन नीति सहायता बनाने की वकालत की है। ताकि, बच्चों के जन्म होने के बाद से लेकर युवावस्था तक उसकी पूरी देखभाल सरकार करे।

जापान के लिए आगे का रास्ता क्या है?
जापान के पास युवाओं में प्रजनन क्षमता को बढ़ाने और बच्चों को लेकर उनमें इमोशन पैदा करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। लिहाजा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि जापान सरकार को फौरन जनसंख्या में गिरावट से जुड़ी भारी सामाजिक और आर्थिक लागत को कम करने के लिए महिलाओं और जोड़ों को उनके काम और पारिवारिक भूमिकाओं को संतुलित करने में मदद करनी चाहिए। वहीं, जापान के श्रम बाजार को परिवार के अनुकूल बनने की जरूरत है, जबकि घर पर पुरूषों को भी महिलाओं के काम में भागीदारी निभानी होगी। वहीं, कार्यस्थल को महिलाओं के मुताबिक ढालना होगा और महिलाओं की समस्या को ध्यान में रखना होगा। ताकि, जापान की समाज में महिलाओं के साथ आने वाली परेशानियों को कम करते हुए जनसंख्या वृद्धि की तरफ कदम बढ़ाया जा सके।












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