क्यों नेपाल में अमेरिका से मिले 'मुफ्त तोहफे' पर मचा है कोहराम ? संसद से सड़क तक त्राहिमाम
काठमांडू, 20 फरवरी: नेपाल को अमेरिका 50 करोड़ डॉलर का अनुदान दे रहा है, जिसे उसे लौटाना भी नहीं है। अमेरिका ने इसके लिए कोई शर्तें भी नहीं लगाई हैं। लेकिन, फिर भी रविवार को पूरे दिन इस मसले पर राजधानी काठमांडू की सड़कों से लेकर संसद तक में बवाल की स्थिति बनी रही। सबसे बड़ी बात ये है कि इस डील पर 5 साल पहले ही नेपाल सरकार ने हामी भरी हुई है और मौजूदा सरकार भी इसे अमलीजामा पहनाने की ठान चुकी है, लेकिन हर स्तर पर इसका विरोध खत्म नहीं हो रहा है। दरअसल, इसको लेकर नेपाली जनता के मन में कुछ आशंकाएं हैं, जो सरकार अंत समय तक दूर नहीं कर पाई है।

अमेरिका से 50 करोड़ डॉलर के अनुदान पर नेपाल में कोहराम
नेपाल की राजधानी काठमांडू में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले और पानी की बौछारें छोड़ गई हैं। यह प्रदर्शनकारी एक अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोग्राम का विरोध करने के लिए काठमांडू में सड़कों पर उतरे थे, क्योंकि रविवार को नेपाली संसद में इसे मंजूरी देने के लिए पेश किया गया। रॉयटर्स ने चश्मदीदों और नेपाली अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, उसमें प्रदर्शनकारी काफी उग्र नजर आ रहे हैं और प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हुई झड़पों में उनमें से कुछ के जख्मी होने की भी रिपोर्ट है।

मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (एमसीसी) क्या है ?
मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (एमसीसी) अमेरिका सरकार की एक सहायता एजेंसी है, जो 2017 में ही नेपाल को 50 करोड़ डॉलर के अनुदान देने के लिए राजी हुआ था। इस फंड से नेपाल में 300 किलोमीटर की बिजली ट्रांसमिशन लाइन लगाई जानी है और हिमालय के देश में सड़कों की स्थिति बेहतर की जानी है। नेपाल सरकार का कहना है कि इस समझौते से उसकी 3 करोड़ आबादी में से 2.40 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि नेपाल काफी हद तक विदेशी सहायता पर काफी निर्भर रहता है।

अमेरिका से मिले 'मुफ्त तोहफे' पर क्यों मचा है कोहराम ?
नेपाल सरकार के अधिकारियों का कहना है कि उसे इस सहायता राशि को वापस नहीं करना है। यही नहीं, इसके साथ कोई शर्त भी नहीं लगाई गई है। लेकिन, इसके विरोधियों का कहना है कि यह समझौता नेपाल के कानून और संप्रभुता को कमतर करेगा, क्योंकि इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को संचालित करने वाले बोर्ड पर सांसदों की अपर्याप्त निगरानी रहेगी। लेकिन, संसद में इस समझौते को मंजूरी के लिए रखते हुए नेपाल के संचार और आईटी मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की ने कहा, 'अनुदान देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण टूल होगा।'

अमेरिका की दलील क्या है ?
बड़ी बात ये है कि नेपाल की सत्ताधारी गठबंधन समेत बाकी सभी महत्वपूर्ण राजनीतिक पार्टी के सदस्यों में अमेरिकी पैसे को स्वीकारने या खारिज करने को लेकर राय बंटी हुई है। वहीं नेपाल में अमेरिकी दूतावास ने कहा एमसीसी के 50 करोड डॉलर की सहायता को 'अमेरिकी जनता की तरफ से तोहफा और हमारे राष्ट्रों के बीच एक ऐसी साझेदारी, जो नेपाल में रोजगार और बुनियादी ढांचा का विकास करेगी और नेपालियों के जीवन में सुधार करेगी' बताया है। यही नहीं, शनिवार को जारी इसके बयान में कहा गया, 'इस परियोजना के लिए नेपाली सरकार और नेपाली लोगों ने अनुरोध किया था और इसे पारदर्शी रूप से गरीबी को कम करने और नेपाल की अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए डिजाइन किया गया है।' इसने यह भी कहा एक संप्रभु राष्ट्र के तौर पर नेपाली नेताओं को इसपर फैसला लेना है। (तस्वीरें सौजन्य- ट्विटर वीडियो)












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