भारत के चंद्रयान-3 का चांद पर पहुंचना चीन के लिए क्यों है झटका?
Why is India's Chandrayaan-3 reaching the moon a shock for China?
Chandrayaan-3 landing on the moon: भारत का चंद्रयान-3 चांद पर उतर कर नया इतिहास रच चुका है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अभी तक विश्व का कोई भी देश नहीं पहुंचा था वहां पर भारत अपने चंद्रयान-3 की लैंडिंग करवाकर विश्व चैंपियन बन चुका है।
हालांकि इससे पहले चंद्रमा पर अमेरिका, रूस इसके बाद चाइना पहुंच चुका है लेकिन चांद के साउथ पोल जहां जीवन की सबसे अधिक संभावनाएं है वहां पर पहुंचने वाला भारत पहला देश बन चुका है। चंद्रयान-3 के चांद की सतह पर पहुंचने पर सबसे अधिक झटका चाइना को लगा है! आइए जानते हैं क्यों?

बता दें भारत का पड़ोसी देश चाइना जो हमेशा से धरती की जमीन हो या चांद सभी कब्जा जमाने की फिराक में लगा रहता है। इतना ही नहीं दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने के लिए नकली चांद तक बनाने का दावा कर चुका है। उसके लिए भारत की ये कामयाबी किसी भी हालत में गले से उतरने वाली नहीं है।
चांद पर तीन बार लैंडिंग करने में सफल हुआ था चाइना
रिपोर्ट के अनुसार चाइना ही दुनिया का अकेला ऐसा देश है जो अब तक चांद पर तीन बार पहली ही बार में चांद पर लैंडिंग कर चुका है। जिसमें 2013 में अपने अंतरिक्ष यान चांग-ई-3 की सफल लैंडिंग करने में कामयाब हुआ था। इसके बाद 2019 में अपना चांग-ई-4 चांद पर उतारने में सफल हुआ था लेकिन चांद के दूसरे हिस्से पर वो उतरा है और पर कुछ चीजों की खोज भी है, लेकिन भारत अब जो चांद के इस हिस्से पर कई रहस्य तलाश करेगा और पूरी दुनिया को उसकी जानकारी देगा।
चाइना के दोस्त रूस का लूना-25 हुआ क्रैश
वहीं भारत चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की कामनाएं कर रहा था उसी समय रूस की स्पेस एजेंसी रोस्कोस्मो का अंतरिक्ष यान-लूना-25 चांद की सतह पर पहुंचने से पहले ही 20 अगस्त को क्रैश हो गया था। रूस ने अपना ये यान 11 अगस्त को भेजा था। अगर रूस इसमें सफल हो जाता तो भारत से पहले रूस चांद पर पहुंच जाता ये ये लूना-25 की चांद पर क्रैश लैडिंग सही रूस ही नहीं चाइना के लिए बड़ी असफता भी है। जानिए कयों?
रूस के लूना-25 के फेल होने से चाइना को क्या हुआ नुकसान?
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार रूस और चाइना स्पेस प्रोग्राम में साझोदार है ये इंटरनेशलन लूनर रिसर्च स्टेशन है जो अमेरिका के प्रतिनिधित्व वाला अर्टमिम अकॉर्ड से अलग है। दोनों के बीच में ही जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। याद रहे रूस और चाइना दोनों ही अमेरिका के विरोधी हैं।
वहीं रूस और चाइना ने 2021 में मिलकर चांद की सतह पर इंटरनेशल लूनर रिसर्च स्टेशन बनाने का ऐलान किया था लेकिन लूना- 25 के असफल होने से दोनों ही देशों को बड़ा झटका लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत से पहले अगर रूस का लूना-25 लैंड करता तो चीन के लिए ज़्यादा बेहतर स्थिति होती। याद रहे चीन भारत से लंबे समय से सीमा-विवाद कर रहा है।
लूना-25 हुआ फेल और भारत का चंद्रयान-3 हुआ सक्सेज
नासा के अनुसार रूस के लूना-25 का चांद पर जाने का उद्देश्य चांद की सतह का अध्ययन करना था। जिसमें ये भी पता करना था कि चंद्रमा की सतह किससे बनी है। इसके अलावा चांद के दक्षिणी ध्रुव पर प्लाज्मा और डस्ट तत्व का अध्ययन करना था, लेकिन उसके फेल होने से रूस के साथ उसके साथी चाइन दोनों के इस अरमान पर पानी फिर गया है। वहीं अब जब भारत का चंद्रयान-3 जो सफलतापूर्वक चांद पर पहुंच चुका है तो ये चाइना के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
दुनिया भर को चंद्रयान देगा चांद से जुड़े कई सवालों के जवाब
चांद पर पहुंचा चंद्रयान-3 चांद से जुड़े हुए कई रहस्यों को ढूढ़ेगा ये वो रहस्य है जिसे सुलझाने में अमेरिका, रूस असफल रहा। चाइना ने भी अपना यान चांद पर भेजा लेकिन चांद से जुड़े कई रहस्य ढ़ढ़ने में कामयाब नहीं हुआ। सालों पहले "चांद पर जीवन है" ये तो नासा ने दावा कर दिया लेकिन कैसे जीवन संभव होगा ये रहस्य नहीं ढूढ़ सका। अब भारत का चंद्रयान-3 इन सभी सवालों के जवाब देगा। बता दें भारत का पिछला मून मिशन लैंडिंग करते हुए क्रैश हो गयाा था लेकिन नासा जो चांद के साउथ पोल पर पानी ना होने का दावा कर रथा था वहीं भारतीय मून मिशन ने बताया कि वहां पर पानी मौजूद है।
रूस और चाइना दोनों को लगा झटका
गौरतलब है किे अमेरिका के स्पेस सेंटर नासा जो दुनिया का सबसे उन्नत स्पेस सेंटर माना जाता है उसने भारत की इस कामयाबी पर दिल खोल कर बधाई दी है वहीं अभी तक रूस और चाइना दोनों के स्पेस सेंटर को भारत की चांद की सतह पर पहुंचने पर मानो सांप सूंघ गया है, तभी तक दोनों ही देशों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की।












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