Saudi Arabia Chicken News: मुर्गियों पर सऊदी अरब क्यों खर्च करेगा 4.5 बिलियन डॉलर? जानकर दंग रह जाएंगे आप
Saudi Arabia Chicken Crisis: सोचिए, एक ऐसा देश जो रेगिस्तान में बसा हो और जहां 50°C तक तापमान पहुंच जाता हो, वहां मुर्गी पालन में इतनी बड़ी रकम क्यों लगाई जा रही है? सऊदी अरब, जो अब तक खाने-पीने की चीजों के लिए ज्यादातर आयात पर निर्भर था, अब खुद इस दिशा में आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है।
सऊदी अरब अपने खाने का लगभग 80% आयात करता है, लेकिन हाल के सालों में भू-राजनीतिक तनाव, बीमारियों और आपूर्ति चेन में दिक्कतों ने उसे अपनी खाद्य सुरक्षा पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया। यही वजह है कि 'विजन 2030' के तहत सऊदी अरब ने पोल्ट्री (मुर्गी पालन) सेक्टर में 4.5 बिलियन डॉलर (17 बिलियन रियाल) का निवेश करने का फैसला किया है।

रेगिस्तान में मुर्गी पालन का चमत्कार
सऊदी अरब के शकरा (Shaqra) इलाके में बने आधुनिक पोल्ट्री प्लांट्स इस दिशा में एक मिसाल पेश कर रहे हैं। तन्मिया फूड कंपनी जैसे बड़े प्लांट्स रोजाना लाखों पक्षियों का प्रॉसेसिंग कर रहे हैं। इस कंपनी का उत्पादन पिछले एक दशक में 12 गुना बढ़ा है। खास बात यह है कि रेगिस्तान जैसी चुनौतीपूर्ण जगह पर भी यह सफलता मिली है।
क्यों किया जा रहा है इतना बड़ा निवेश?
मुर्गी का मांस दुनिया का सबसे ज्यादा खाया जाने वाला मांस है। सऊदी अरब में युवाओं की संख्या ज्यादा है, जो वेस्टर्न फूड पसंद करते हैं। इसके अलावा, चिकन एक सस्ता और पौष्टिक विकल्प है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाने से सऊदी अरब न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर पाएगा बल्कि दूसरे देशों को भी निर्यात कर सकेगा।
तकनीक और प्लानिंग का कमाल
आज सऊदी के पोल्ट्री फार्म्स में चूजों की मृत्यु दर 4% से भी कम है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। आधुनिक तकनीक और सही तापमान बनाए रखने की वजह से यह संभव हुआ है। इसके अलावा, यहां के पक्षियों को खास आहार दिया जाता है, जिसमें प्रोटीन और पोषक तत्व ज्यादा होते हैं।
महिला सशक्तिकरण और फास्ट-फूड का बढ़ता क्रेज
जैसे-जैसे सऊदी अरब में महिलाएं नौकरी कर रही हैं और घर पर कम समय बिता रही हैं, वैसी स्थिति में तैयार-टू-कुक फूड की मांग बढ़ रही है। कंपनियां अब प्री-मैरिनेटेड चिकन स्ट्रिप्स और क्यूब्स जैसे उत्पाद पेश कर रही हैं, जो केवल 10 मिनट में पक जाते हैं।
वैश्विक स्तर पर असर
सऊदी अरब ने पोल्ट्री सेक्टर में निवेश करने के साथ-साथ ब्राजील, यूक्रेन और अमेरिका जैसे देशों से भी साझेदारी की है। लेकिन, यह पूरी तरह से आयात पर निर्भरता खत्म कर पाएगा या नहीं, यह देखना बाकी है। अनाज और अन्य संसाधनों की जरूरत अभी भी आयात से ही पूरी होगी।
क्या सऊदी अरब 2030 तक आत्मनिर्भर बन पाएगा?
2030 तक 100% लोकल उत्पादन का लक्ष्य ambitious (महत्त्वाकांक्षी) जरूर है, लेकिन इसमें कई चुनौतियां भी हैं। गर्म इलाका होने की वजह से एयर कंडीशनिंग जैसे खर्चे और उत्पादन लागत बढ़ा देते हैं। इसके अलावा, सऊदी सरकार को भारी बजट घाटे का सामना करना पड़ रहा है।
सऊदी अरब का यह कदम उसकी खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में वह अपने आयात पर निर्भरता कितनी कम कर पाता है।












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