भारत के इतने करीब पहुंचने के बाद कैसे फेल हुआ ISIS
बेंगलुरु। आतंकी संगठन आईएसआईएस भारत पर हमले की बड़ी प्लानिंग कर रहा है, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि भारत के इतने करीब पहुंचने के बाद यह संगठन फेल साबित होने लगा। करीब? जी हां हम अफगानिस्तान की बात कर रहे हैं, जहां आईएसआईएस अपनी जड़ें जमा चुका है।

असल में इराक और सीरिया में अल-कायदा से आसानी से आगे निकल जाने वाले आईएसआईएस को लगा कि अफगानिस्तान में भी वो अपना गढ़ बना सकेगा। लेकिन यहां सब कुछ इतना आसान नहीं था। और देखते ही देखते आईएसआईएस अफगानिस्तान में फेल साबित होने लगा, क्योंकि यहां तालिबान का वर्चस्व अभी भी कायम है।
अफगानिस्तान में क्यों कमजोर पड़ा आईएसआईएस-
- सबसे बड़ी चुनौती है तालिबान का चीफ मुल्ला मंसूर, जिसके नेतृत्व में तालिबान को नई मजबूती मिली है।
- मार्च में ड्रोन हमलों में आईएसआईएस के आतंकी ठिकाने और आतंकी दोनों को बड़ी क्षति हुई।
- आईएसआईएस की गलतफहमी कि मुल्ला उमर की मौत के बाद तालिबान बिखर जायेगा।
- अमेरिकी ड्रोन हमलों की वजह से आईएसआईएस नये ठिकाने बनाने में नाकाम साबित हो रहा है।
- आईएसआईएस के तमाम लड़ाके ड्रोन हमलों में मारे गये, जिससे तालिबान को मजबूती मिली।
- अफगानिस्तान में आईएसआईएस के चीफ हाफिज सईद की मौत।
- सिर कलम कर इंटरनेट पर वीडियो डालने जैसे कृत्य अफगानिस्तान के लोग कतई पसंद नहीं करते, चाहे वो आतंकी ही क्यों न हों।
खैर कुल मिलाकर आईएसआईएस अफगानिस्तान में कमजोर पड़ चुका है और एक बार फिर तालिबान मजबूती से यहां पर जम गया है। असल में हाफिज़ सईद लड़ाकों को बांध कर रखने और अपने टीम वर्क के लिये जाना जाता था, उसकी मौत के बाद टीम बिखर गई और उसका खामियाजा आईएसआईएस को भुगतना पड़ रहा है।
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खैर कुल मिलाकर भारत के लिये यह अच्छी खबर है, क्योंकि आईएसआईएस का अफगानिस्तान में पैर जमाना बड़े खतरे की घंटी था। हालांकि यह कहना कि खतरा टल गया, गलत होगा, क्योंकि तालिबान जिस तरह से मजबूत हो रहा है, उससे आगे चलकर भारत को नुकसान पहुंच सकता है।
बिखर सकता है तालिबान भी
तालिबान के बिखरने की भी पूरी संभावनाएं बनी हुई हैं, क्योंकि उसके तमाम लड़ाके अपने सरगना से खुश नहीं हैं और दूसरी बात मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब इस वक्त संगठन का चीफ बनने के लिये लालायित है, इसके लिये संगठन के तमाम लोगों को अपने पक्ष में करने में जुटा हुआ है। ऐसे में तालिबान में दो फाड़ होना लाज़मी है। लेकिन अगर ऐसा हुआ तो आईएसआईएस को उसका फायदा मिल सकता है।












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