Iran Mosque Red Flag: खामेनेई की मौत के बाद मस्जिद पर क्यों लहराया ‘लाल झंडा’, इसका मतलब जानकर होंगे हैरान
Iran Mosque Red Flag Khamenei Death: मध्य पूर्व से आई एक तस्वीर ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं। ईरान के पवित्र शहर कोम में स्थित जमकरान मस्जिद के गुंबद पर लाल रंग का 'इंतकाम का झंडा' फहराया गया है। यह कदम उस वक्त उठाया गया जब ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई।
शिया परंपरा में लाल झंडा शहादत, अन्याय और बदले की प्रतिज्ञा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इस झंडे का उठना सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि गहरा राजनीतिक और सैन्य संदेश भी माना जा रहा है।

क्या है लाल झंडे का मतलब? (Iran Mosque Red Flag of Revenge)
शिया परंपरा में जब किसी बड़े धार्मिक या राजनीतिक नेता की शहादत होती है तो लाल झंडा फहराया जाता है। इसका अर्थ है कि अन्याय हुआ है और उसका जवाब दिया जाएगा। जमकरान मस्जिद पर यह झंडा लगना बताता है कि ईरान के भीतर गुस्सा उफान पर है और समर्थक इसे न्याय और प्रतिशोध की पुकार के रूप में देख रहे हैं।
कोम की यह मस्जिद ईरान में बेहद धार्मिक महत्व रखती है। यहां लाल झंडा लहराने का मतलब है कि संदेश सिर्फ देश के भीतर नहीं, बल्कि पूरी शिया दुनिया को दिया गया है।

कैसे हुई खामेनेई की मौत? (Airstrike in Tehran)
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खामेनेई की मौत तेहरान में शनिवार को हुए एक संयुक्त हवाई हमले में हुई। बताया जा रहा है कि यह हमला संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल की ओर से किया गया था। रविवार को ईरानी मीडिया ने आधिकारिक तौर पर उनकी मौत की पुष्टि की।
इस खबर के बाद तेहरान समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन, शोक सभाएं और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। भारत सहित कई देशों में भी शिया समुदायों ने शोक जताया।
अमेरिका और इजरायल की प्रतिक्रिया (Global Reaction)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान में कहा कि खामेनेई इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक थे और उनकी मौत ईरानी जनता के लिए अपने देश को वापस लेने का मौका है।
वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि कई संकेत बताते हैं कि यह तानाशाह अब जिंदा नहीं है। उन्होंने ईरान की जनता से अपील की कि वे एकजुट होकर शासन को बदलें और अपना भविष्य सुरक्षित करें।
इजरायल डिफेंस फोर्स ने खामेनेई को उस योजना का मास्टरमाइंड बताया जिसका मकसद इजरायल को खत्म करना था और ईरान का प्रभाव पूरे मध्य पूर्व में फैलाना था।
ईरान में क्या हो रहा है? (Mass Mourning)
ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, तेहरान, इस्फहान और जंजान जैसे शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। काले धुएं के गुबार और नारों के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। हजरत मासूमेह दरगाह पर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए गए।
हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में तेहरान के कुछ हिस्सों में जश्न जैसी आवाजें भी सुनाई दीं, लेकिन कुल मिलाकर देश में शोक और आक्रोश का माहौल हावी है।
आगे का रास्ता क्या? (Way Forward for Iran)
ईरान ने अंतरिम व्यवस्था के तहत तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद बनाई है। 66 वर्षीय धर्मगुरु अलीरेज़ा अराफी को अस्थायी परिषद में शामिल किया गया है। वे राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और मुख्य न्यायाधीश ग़ुलामहुसैन मोहसनी एजई के साथ मिलकर काम करेंगे। यह परिषद तब तक सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियां निभाएगी जब तक एक्सपर्ट्स की असेंबली नया नेता नहीं चुन लेती।
लाल झंडे का यह प्रतीकात्मक कदम साफ संकेत देता है कि क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। ईरान-इजरायल टकराव पहले ही चरम पर है और अब खामेनेई की मौत के बाद हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है। मध्य पूर्व की यह आग कितनी दूर तक फैलेगी, इसका जवाब आने वाले दिन तय करेंगे।












Click it and Unblock the Notifications