तालिबान ने एक से ज्यादा निकाहों पर रोक क्यों लगाई? वजह जानकार चौंक जाएंगे
नई दिल्ली: एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए अफगान तालिबान (Afghan Taliban)ने अपने गुर्गों की एक से ज्यादा शादियों को बैन कर दिया है। गौरतलब है कि यह आतंकवादी संगठन यूं तो कट्टर इस्लामिक शरिया कानूनों पर अमल करते हैं, लेकिन अब उसने दहशतगर्दों के लिए यह नया आदेश जारी किया है। हालांकि, अफगान तालिबान सरगना मौलवी हैबतुल्ला अखुंदजादा का यह हुक्म सभी तालिबानियों पर एक तरह से लागू नहीं होगा और उनमें कुछ चुनिंदा तरह के आतंकवादियों को इन पाबंदियों से रियायत दी गई है। वह चाहें तो चार शादियां कर सकते हैं और उन्हें भाइयों की बेवाओं का शौहर बनने की भी इजाजत है।

तालिबान ने एक से ज्यादा निकाह पर लगाई रोक
वॉयस ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब अफगान तालिबान के आतंकवादी एक से ज्यादा निकाह नहीं कर सकेंगे। वैसे 9 जनवरी को तालिबान सरगना मौलवी हैबतुल्ला अखुंदजादा (Taliban chief Mawlawi Hibatullah Akhundzada) की ओर से जारी लिखित आदेश में इस स्टैंड को शरिया कानून के मुताबिक ही ठहराने की कोशिश करते हुए कहा गया है कि 'हमने इस्लामिक अमीरात के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अगर जरूरत ना हो तो दूसरी, तीसरी और चौथी शादियों से बचने की कोशिश करें।' दो तालिबानी नेताओं ने पश्तो भाषा में जारी उसके बयान को साझा किया है, जिसे तालिबानी लीडरशिप ने संगठन के अंदर जारी कराया है। यही नहीं तालिबान चीफ ने अपने सभी यूनिट हेड से कहा है कि वह इस बात का खास ख्याल रखें कि यह जानकारी हर आतंकी गुर्गे तक पहुंच जाए।

तालिबान पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए फैसला
तालिबान के तीन अधिकारियों ने अपना नाम नहीं बताए जाने की शर्त पर कहा है कि यह फैसला असल में इस आतंकी संगठन को आर्थिक बोझ से बचाने के लिए उठाना पड़ा है, क्योंकि सबके एक से अधिक निकाहों का खर्चा उठाना अब तालिबान के लिए मुकम्मल नहीं रह गया है। एक तालिबानी नेता ने एक से ज्यादा निकाह पर पाबंदी की वजह ये बताई है कि कई शिकायतें मिलने के बाद यह कदम उठाना पड़ा है। क्योंकि, कुछ तालिबानी नेता अपने आकाओं तक इस बात की मांग लेकर पहुंचने लगे थे कि दुल्हन को दिए जाने वाले दहेज (मेहर) की रकम तालिबान ही उठाए। सूत्रों के मुताबिक अफगानिस्तान के कुछ इलाके में इसके लिए 20 लाख अफगानी (करीब 19 लाख रुपये) तक खर्च हो जाते हैं और यह खर्चा वह अपने आकाओं से मांगते थे।

आतंकियों की प्रतिष्ठा का सवाल है!
गौरतलब है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में पश्तून जनजातियों में दूल्हे को निकाह के लिए दुल्हन के परिवार वालों को उसकी कीमत चुकाने की परंपरा है। सूत्र बताते हैं कि सिर्फ निकाह का ही खर्च नहीं आता, इन्हें अपनी पत्नियों को अलग-अलग घरों में रखना पड़ता है और उनकी जरूरत के लिए पैसों की अलग से जरूरत पड़ती है। यही नहीं, तालिबान के आकाओं को इस बात को लेकर भी चिंता रहती थी कि उनके यहां निकाहों की मीडिया में भी खूब चर्चा होती है, जिससे उन्हें बदनामी अलग झेलनी पड़ती है। तालिबानी आका के आदेश में कहा गया है कि, 'इस्लामिक अमीरात के कई नेताओं के पास बहुत ज्यादा पैसे नहीं हैं। इसलिए,ज्यादा शादियां उनकी प्रतिष्ठा, विश्वसनीयता और व्यक्तित्व पर खराब असर डाल सकती हैं।' गौरतलब है कि यह आतंकी संगठन खुद को इस्लामिक अमीरात (Islamic Emirate)कहकर संबोधित करता है।

अय्याशियों के आरोपों से बचने की कोशिश
माना यह भी जा रहा है कि तालिबान ने यह कदम इसलिए भी उठाया है कि वह इस्लाम के नाम पर लोगों से पैसे की जो उगाही करते हैं, उसकी वजह से उनपर लोगों के फंड पर अय्याशियों के आरोप ना लगें। तालिबानी सूत्रों की मानें तो उनके आका ने यह फरमान देकर लोगों और अपने समर्थकों को भी यह संदेश देने की कोशिश की है कि इस्लाम के नाम पर की गई उगाही से वह अपना हित नहीं साध रहे हैं। तालिबान के इस फैसले को इसलिए दिलचस्प माना जा रहा है, क्योंकि इस आतंकवादी संगठन को मुस्लिम धार्मिक कानूनों का कट्टर समर्थक माना जाता है। गौरतलब है कि इस्लाम में मर्दों को एक साथ चार-चार बीवियां रखने की आजादी है। लेकिन, कुछ प्रगतिशील मुस्लिम समाज अब इन प्रथाओं को गलत नजरिए से देखने लगे हैं और इससे दूर रहने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि तालिबान चीफ ने लोगों से कहा है कि उसका आदेश इस्लामी कानूनों के मुताबिक है और इसे धार्मिक नेताओं का समर्थन हासिल है।

इन शर्तों को पूरा करने वालों को चार शादियां करने की छूट
हालांकि, मौलवी हैबतुल्ला अखुंदजादा ने कुछ तालिबानियों को अपने आदेश से छूट भी दी है। इसके तहत तालिबान के जिन आतंकियों के पास निकाहों के लिए खुद के पैसे हैं या फिर उनकी कोई खास जरूरत है, तब वह मजे से चार-चार बीवियों के साथ रिश्ते रख सकते हैं। खास जरूरतों में इन बातों को शामिल किया गया है- जिनकी पहली बीवी से बच्चा ना हो पाए, जो बीवी लड़का पैदा ना कर पाए या फिर जो किसी भाई की बेवा से निकाह करना चाहते हैं। यही नहीं जो तालिबानी किसी दूसरी बेवा से शादी रचाना चाहते हैं,उन्हें भी इसकी इजाजत होगी, लेकिन शर्त ये है कि वह निकाह पर ज्यादा दौलत नहीं लुटाएंगे। (तस्वीरें-सांकेतिक)
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