क्यों Omicron BA.2 को बुरी खबर बता रहे हैं वैज्ञानिक ? 3 वजहें जानिए जो इसे डेल्टा जैसा ही घातक बना सकता है
टोक्यो, 20 फरवरी: दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क और यूके समेत कई देशों में कोविड-19 के ओमिक्रॉन वेरिएंट के नए सबवेरिएंट बीए-2 के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। ओमिक्रॉन वेरिएंट के सबवेरिएंट बीए-1 को कम गंभीर माना जा रहा था, लेकिन यह भी अत्यधिक संक्रामक है और इसका पहला मामला पिछले साल नवंबर में बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका में सामने आया था, जिसने देखते ही देखते अमेरिका और यूरोप में भयानक रूप ले लिया। भारत में भी इसने कोविड की तीसरी लहर पैदा कर रखी है। लेकिन, अब ओमिक्रॉन के सबवेरिएंट बीए-2 के मामले बढ़ रहे हैं। जापान में हुए एक शोध के बाद इसे बहुत ही बुरी खबर कहा जा रहा है। क्योंकि, यह तेजी से फैलता भी है और इसके डेल्टा जैसे खतरनाक वेरिएंट की तरह घातक होने की भी आशंका है।

स्टील्थ ओमिक्रॉन के नाम से भी जाना जा रहा है बीए-2
एक नए शोध से पता चला है कि ओमिक्रॉन का एक सबवेरिएंट बीए-2 डेल्टा जैसे कोविड वेरिएंट की तरह ही गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। महामारी वैज्ञानिक एरिक फैंग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से गुजारिश की है कि इसे तत्काल वेरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित किए जाने की आवश्यकता है। इसे स्टील्थ ओमिक्रॉन के नाम से भी जाना जा रहा है, जो पहले वाले ओमिक्रॉन से पूरी तरह से अलग गुणों वाला बताया जा रहा है। गुरुवार को ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे बीए-1 से ज्यादा संक्रामक बताया था।

3 वजहें जानिए जो इसे डेल्टा जैसा ही घातक बना सकता है
यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो के वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस सबवेरिएंट बीए-2 में तीन बहुत ही महत्वपूर्ण बातों की पहचान की है। यह गंभीर बीमारी की वजह बनने में सक्षम है, इसमें ओमिक्रॉन सबवेरिएंट बीए-1 की तरह ही कोविड-19 वैक्सीन समेत बाकी इम्यूनिटी को झांसा देने लायक व्यापक गुण हैं। यह सोट्रोविमैब और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसे उपचार को निष्प्रभावी कर सकता है। इस स्टडी को प्रीप्रिंट रिपोजिटरी बायोआएक्सिव पर पोस्ट किया गया है, लेकिन अभी इसकी अभी समीक्षा होनी है।

वायरस ऑफ कंसर्न में अपग्रेड करने की मांग
एक्सपर्ट का कहना है ओमिक्रॉन बीए-2 निश्चित तौर पर एक बुरी खबर है। फैंग लिखते हैं, 'बीए-2 गंभीर रूप से बुरी खबर है। बहुत ही तेज ट्रांसमिशन की वजह से और अगर सही में ज्यादा गंभीर बीमारी का कारण बनता है और बीए-1 समेत पहले से प्राप्त बाकी इम्यूनिटी को भी नाकाम करता है तो यह 4 विश्वों से शोधकर्ताओं के मुताबिक वैसे तो बीए-2 को ओमिक्रॉन वेरिएंट ही माना जा रहा है, लेकिन बीए-2 का जिनोमिक सीक्वेंस पहले वाले यानि बीए-1 से काफी अलग है। शोध के मुताबिक, 'और, इससे जाहिर होता है कि बीए-2 की वायरोलॉजिकल विशेषताएं बीए-1 से भिन्न हैं।' एरिक फैंग ने कई ट्वीट में इस सबवेरिएंट के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। इसको लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने अपील की है कि जिस तरह से ओमिक्रॉन बीए-2 के मामले दुनियाभर में बढ़ने लगे हैं, इसे वायरस ऑफ कंसर्न में अपग्रेड किया जाना चाहिए।भी बदतर होगा।' उन्होंने इस ओर भी इशारा किया है कि ओमिक्रॉन बीए-1 से संक्रमित होने के बाद सबवेरिएंट के खिलाफ प्रतिरक्षा तो मिलती है, लेकिन ओमिक्रॉन बीए-2 से नहीं मिलेगी। शोध के आधार पर उनका कहना है कि बीए-2 के भी दो संस्करण हैं।
ओमिक्रॉन बीए-2 बुरी खबर क्यों है ?
दो दिन पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बीए-2 के पहले से पहचाने गए स्ट्रेन के मुकाबले बीए-2 के तेजी से फैलने की चेतावनी दी थी। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा था कि अगर ओमिक्रॉन की और लहर देखने को मिलेगी तो यह बीए-2 की हो सकती है। इसने भी बीए-1 के मुकाबले इसे ज्यादा संक्रामक बताया था,एक्सपर्ट का कहना है ओमिक्रॉन बीए-2 निश्चित तौर पर एक बुरी खबर है। फैंग लिखते हैं, 'बीए-2 गंभीर रूप से बुरी खबर है। बहुत ही तेज ट्रांसमिशन की वजह से और अगर सही में ज्यादा गंभीर बीमारी का कारण बनता है और बीए-1 समेत पहले से प्राप्त बाकी इम्यूनिटी को भी नाकाम करता है तो यह 4 विश्वों से भी बदतर होगा।' उन्होंने इस ओर भी इशारा किया है कि ओमिक्रॉन बीए-1 से संक्रमित होने के बाद सबवेरिएंट के खिलाफ प्रतिरक्षा तो मिलती है, लेकिन ओमिक्रॉन बीए-2 से नहीं मिलेगी। शोध के आधार पर उनका कहना है कि बीए-2 के भी दो संस्करण हैं। लेकिन इसके अधिकारियों ने गंभीरता के मामलों में दोनों में ज्यादा अंतर तब नहीं बताया था। इसी तरह का नजरिया अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डॉक्टर रोशेल वैलेंस्की को कोट करते हुए सीएनएन ने दिया था, 'ऐसा कोई सबूत नहीं है कि बीए-2 वंश, बीए-1 वंश से ज्यादा गंभीर है।'

डब्ल्यूएचओ पहले ही दे चुका है चेतावनी
दो दिन पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बीए-2 के पहले से पहचाने गए स्ट्रेन के मुकाबले बीए-2 के तेजी से फैलने की चेतावनी दी थी। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा था कि अगर ओमिक्रॉन की और लहर देखने को मिलेगी तो यह बीए-2 की हो सकती है। इसने भी बीए-1 के मुकाबले इसे ज्यादा संक्रामक बताया था, लेकिन इसके अधिकारियों ने गंभीरता के मामलों में दोनों में ज्यादा अंतर तब नहीं बताया था। इसी तरह का नजरिया अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डॉक्टर रोशेल वैलेंस्की को कोट करते हुए सीएनएन ने दिया था, 'ऐसा कोई सबूत नहीं है कि बीए-2 वंश, बीए-1 वंश से ज्यादा गंभीर है।'

ओमिक्रॉन भी माइल्ड नहीं है
यही नहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन बार-बार चेतावनी दे चुका है कि ओमिक्रॉन भी हल्का नहीं है, 'यह डेल्टा से कम गंभीर है, लेकिन हम लगातार देख रहे हैं कि ओमिक्रॉन की वजह से काफी लोगों को अस्पतालों में दाखिल होना पड़ रहा है।' इसके अनुसार कोरोना वायरस के सारे वेरिएंट, अल्फा, बीटा और डेल्टा के संक्रमण की तादाद दुनिया भर में घट रही है और ओमिक्रॉन ने उनकी जगह ले लिया है। पिछले हफ्ते विश्व के सबसे बड़े वायरस डेटाबेस पर जो केस अपलेड हुए थे, उसमें कोविड-19 के 4,00,000 सीक्वेंसिंग में से 98% से अधिक मामले ओमिक्रॉन के थे। लेकिन, अब सबवेरिएंट बीए-2 के केस लगातार बढ़ने लगे हैं और दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क और यूके समेत कई देशों में इसके काफी मामले सामने आ चुके हैं।












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