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US Strike on Venezuela: ड्रग्स या तेल? गरीबी-भूखमरी से परेशान वेनेजुएला के पीछे क्यों पड़े हैं ट्रंप

US strike on Venezuela: 3 जनवरी 2026 की सुबह वेनेजुएला के इतिहास का सबसे काला अध्याय बनकर उभरी। राजधानी काराकास में हुए भीषण धमाकों और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने दुनिया को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे ने कि निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी समेत हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया गया है, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है।

जहां वेनेजुएला की 90% आबादी भीषण गरीबी और भूख से जूझ रही है, वहां ट्रंप की इस सैन्य दिलचस्पी के पीछे मानवीय संवेदना नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल खजाना और भू-राजनीतिक वर्चस्व की भूख छिपी है। अमेरिका की नजर अब वेनेजुएला के उस 'काले सोने' पर है, जो वैश्विक तेल बाजार की पूरी तस्वीर बदलने की ताकत रखता है।

US strike on Venezuela

दुनिया का सबसे बड़ा 'तेल खजाना'

वेनेजुएला के पास लगभग 303 अरब बैरल का प्रमाणित तेल भंडार है, जो दुनिया के कुल भंडार का 18% है। यह सऊदी अरब से भी अधिक है। ट्रंप सरकार का मानना है कि मादुरो शासन के तहत इस खजाने का कुप्रबंधन हुआ है। अमेरिका चाहता है कि यहां के तेल क्षेत्रों में शेवरॉन जैसी अमेरिकी कंपनियों का एकाधिकार हो। वेनेजुएला का 'हेवी क्रूड' अमेरिकी रिफाइनरियों के लिए बेहद जरूरी है, और इस पर नियंत्रण पाकर ट्रंप वैश्विक ऊर्जा कीमतों को अपने हिसाब से नियंत्रित करना चाहते हैं।

नार्को-टेररिज्म और 50 मिलियन डॉलर का इनाम

ट्रंप प्रशासन (Donald Trump Venezuela action) ने निकोलस मादुरो को एक राजनेता के बजाय एक 'नार्को-टेररिस्ट' के रूप में पेश किया है। अमेरिका का आरोप है कि मादुरो सरकार 'कार्टेल ऑफ द संस' के जरिए अमेरिका में बड़े पैमाने पर कोकीन की तस्करी कर रही थी। मादुरो की गिरफ्तारी के लिए 50 मिलियन डॉलर का इनाम रखा जाना इस बात का संकेत था कि अमेरिका किसी भी कीमत पर उन्हें सत्ता से हटाना चाहता था।

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रूस-चीन के प्रभाव को जड़ से मिटाना

वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका में रूस, चीन और ईरान का सबसे मजबूत किला रहा है। अमेरिकी विदेश नीति के 'मुनरो सिद्धांत' के अनुसार, पश्चिमी गोलार्ध में किसी भी बाहरी शक्ति का दखल बर्दाश्त नहीं है। मादुरो को हटाकर ट्रंप इस क्षेत्र में रूसी सैन्य उपस्थिति और चीनी आर्थिक निवेश को खत्म करना चाहते हैं। अमेरिका यहां अपनी पसंद की 'कठपुतली सरकार' बिठाकर पूरे लैटिन अमेरिका को एक बार फिर अपने प्रभाव क्षेत्र (Backyard) में लाना चाहता है।

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नेशनल इमरजेंसी और मानवीय संकट

हमलों के तुरंत बाद पूरे वेनेजुएला में नेशनल इमरजेंसी और ब्लैकआउट (बिजली गुल) की स्थिति है। एक ओर जहां लोग धमाकों और भगदड़ से जान बचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं का अभाव और गहरा गया है। ट्रंप की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने वेनेजुएला के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्या मादुरो के हटने से भूख और गरीबी खत्म होगी, या यह देश इराक और लीबिया की तरह एक अंतहीन गृहयुद्ध की आग में झोंक दिया गया है?

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