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जानिए कौन थीं Margaret Thatcher? जिसने ब्रिटेन की किस्मत बदल दी, US ही नहीं यूरोप की पहली महिला PM बनीं

Who was Margaret Thatcher: राजनीति की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ अपने देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सियासत की तस्वीर बदल देते हैं। ऐसी ही एक नाम थीं मार्गरेट थैचर (Margaret Thatcher) जिन्हें दुनिया ने 'आयरन लेडी' कहा। वो सिर्फ ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री नहीं थीं, बल्कि ऐसी नेता थीं जिन्होंने अपने फैसलों, सोच और दबंग अंदाज़ से एक पूरे दौर की राजनीति को नया मोड़ दिया। जब थैचर सत्ता में आईं, तब ब्रिटेन गहरे आर्थिक संकट, हड़तालों और सामाजिक अस्थिरता से जूझ रहा था। लेकिन थैचर ने न केवल हालातों को पलट दिया, बल्कि अपने कड़े फैसलों जैसे सरकारी कंपनियों का निजीकरण, यूनियनों पर लगाम और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन की ताकत को फिर से स्थापित कर दिया। इस रिपोर्ट में हम जानेंगे उस महिला की कहानी जिसने सिर्फ सत्ता नहीं चलाई, बल्कि राजनीति की परिभाषा बदल दी। जानिए, कौन थीं मार्गरेट थैचर और कैसे बनीं वो 'आयरन लेडी'?

यूरोप की पहली महिला प्रधानमंत्री

13 अक्टूबर 1925 को इंग्लैंड के एक छोटे-से शहर ग्रंथम में जन्मी एक साधारण सी लड़की, मार्गरेट थैचर, इतिहास की सबसे असाधारण महिला नेताओं में से एक बनीं। 1979 से 1990 तक ब्रिटेन की कमान संभालते हुए, उन्होंने न सिर्फ यूरोप की पहली महिला प्रधानमंत्री होने का गौरव हासिल किया, बल्कि लगातार तीन बार चुनाव जीतकर सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का इतिहास भी रच दिया।

Margaret Thatcher

शुरुआती जिंदगी

मार्गरेट एक किराने की दुकान चलाने वाले पिता की बेटी थीं, जो स्थानीय नेता भी थे। उनके भीतर बचपन से ही राजनीति की चिंगारी थी। पढ़ाई में तेज थीं, इसलिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री पढ़ीं और वहीं से छात्र राजनीति में उतर गईं। पढ़ाई के बाद उन्होंने रिसर्च केमिस्ट के रूप में काम किया, लेकिन दिल में राजनीति और वकालत दोनों के लिए जगह थी। 1954 में टैक्स मामलों की वकील बन गईं। 1951 में उन्होंने डेनिस थैचर से शादी की और 1953 में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया।

राजनीति में पहला कदम

1950 में उन्होंने पहली बार संसद का चुनाव लड़ा, लेकिन हार मिली। हिम्मत नहीं हारी। 1959 में फिंचली सीट से जीत हासिल की और संसद पहुंचीं। शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने स्कूलों में फ्री दूध बंद कर दिया - जिससे उन्हें 'थैचर, द मिल्क स्नैचर' कहा जाने लगा। 1975 में पार्टी की हार के दौर में उन्होंने नेतृत्व के लिए चुनौती दी और जीत हासिल कर कंजरवेटिव पार्टी की पहली महिला नेता बनीं।

प्रधानमंत्री के रूप में दमदार कार्यकाल

1979 में 'विंटर ऑफ डिसकंटेंट' के बाद जब जनता सरकार से नाराज़ थी, तब थैचर ने भारी बहुमत से चुनाव जीता। उन्होंने सरकारी कंपनियों का निजीकरण किया, सरकारी खर्चों में कटौती की और ट्रेड यूनियनों पर सख्ती बरती। उन्होंने एयरलाइंस, बिजली, पानी, टीवी-रेडियो जैसी कई सरकारी सेवाओं को बेचा और आम जनता को शेयरधारक बनने का मौका दिया। हालांकि इस दौरान बेरोजगारी और महंगाई बढ़ी, लेकिन फॉकलैंड युद्ध में जीत (1982) और विपक्ष की कमजोरी ने उन्हें 1983 में फिर सत्ता दिला दी।

मजदूर आंदोलन जिसने मनाया 'आयरन लेडी'

1984 में कोयले की खदानें बंद करने के विरोध में मजदूरों ने एक साल लंबी हड़ताल की। लेकिन थैचर टस से मस नहीं हुईं। बिना कोई रियायत दिए उन्होंने मजदूर आंदोलन को खत्म कर दिया। यूनियनों की ताकत तोड़ने वाला यह कदम उनकी सबसे बड़ी जीतों में गिना जाता है। इसी साल ब्रिटेन में हुए बम धमाके में वो बाल-बाल बचीं। यह हमला आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (IRA) ने किया था।

विदेश नीति से मिली ख्याति

उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन की जोड़ी खूब चर्चा में रही। दोनों नेताओं ने सोवियत संघ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। सोवियत मीडिया ने उन्हें आयरन लेडी का नाम दिया जो बाद में उनकी पहचान बन गया। उन्होंने ज़िम्बाब्वे को आजादी दिलाने में भूमिका निभाई लेकिन दक्षिण अफ्रीका के रंगभेदी शासन पर प्रतिबंधों का विरोध कर विवादों में रहीं।

यूरोप से टकराव और सत्ता से विदाई

थैचर यूरोपीय यूनियन की सांझी मुद्रा (Euro) और राजनीतिक एकता की मुख़ालिफ थीं। उनकी पार्टी अंदर से बंटी हुई थी। 1989 में उन्होंने पोल टैक्स लागू किया, जिससे पूरे देश में विरोध भड़क उठा। पार्टी नेताओं ने उनका साथ छोड़ना शुरू किया। 1990 में जब उनके ही साथी नेताओं ने उन्हें चुनौती दी, तब उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया और जॉन मेजर नए प्रधानमंत्री बने।

रिटायरमेंट और अंतिम साल

1992 तक वह संसद में रहीं, फिर हाउस ऑफ लॉर्ड्स में लाइफ पीयर बनीं। उन्होंने थैचर फाउंडेशन शुरू किया और लोकतंत्र को बढ़ावा देने का काम जारी रखा। 2000 के बाद उन्हें डिमेंशिया की समस्या हो गई। 2002 के बाद उन्होंने सार्वजनिक बोलना छोड़ दिया। 8 अप्रैल 2013 को उन्होंने अंतिम सांस ली।

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दुनिया के लिए बनी मिसाल

मार्गरेट थैचर ने दुनिया को दिखा दिया कि नेतृत्व का मतलब जज़्बा, फैसले और निडरता होता है। उन्होंने जो भी किया, पूरे आत्मविश्वास और स्पष्ट सोच के साथ किया चाहे तारीफ़ मिली हो या आलोचना। वो आज भी दुनिया की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में गिनी जाती हैं। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि अगर इरादा पक्का हो, तो कोई भी दीवार 'आयरन लेडी' के आगे खड़ी नहीं रह सकती।

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