यूक्रेन में पुतिन ने शुरू किया ‘प्लान बी’ पर काम, जेलेंस्की की जगह ‘दोस्त’ को राष्ट्रपति बनाने की तैयारी
यूक्रेनी मीडिया ने दावा किया है कि, रूस की कोशिश विक्टर यानुकोविच को यूक्रेन का अगला राष्ट्रपति बनाने की है।
कीव/मॉस्को, मार्च 04: यूक्रेन युद्ध लगातार दूसरे हफ्ते में पहुंच गया है और अब रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर काफी प्रेशर बना दिया है और माना जा रहा है कि, रूस अब कीव को कुचले बगैर नहीं रहेगा। इस बीच अब पुतिन के प्लान बी का भी खुलासा हो रहा है और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि रूस का मकसद यूक्रेन के मौजूदा राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की को सत्ता से उखाड़ फेंकना है और उनकी जगह विक्टर यानुकोविच को नया राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है, कि आखिर विक्टर यानुकोविच कौन हैं और पुतिन उन्हें क्यों यूक्रेन का राष्ट्रपति बनाना चाह रहे हैं।

पुतिन के ‘प्लान बी’ हैं विक्टर
यूक्रेनी मीडिया ने दावा किया है कि, रूस की कोशिश विक्टर यानुकोविच को यूक्रेन का अगला राष्ट्रपति बनाने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, मॉस्को प्रशासन यूक्रेन के निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को देश की कमान संभालने के लिए समर्थन दे रहा है। राष्ट्रपति पद से दो बार बेदखल होने का दुर्लभ गौरव प्राप्त करने वाले विक्टर यानुकोविच, एक बार फिर से यूक्रेन के राष्ट्रपति बन सकते हैं और रूसी राष्ट्रपति का ये फैसला अमेरिका और यूरोपीय देशों के जख्म पर मिर्च रगड़ने जैसा होगा, क्योंकि, साल 2014 में अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन में लगाई गई 'आग' की वजह से ही विक्टर यानुकोविच को देश छोड़कर भागना पड़ा था और फिर जेलेंस्की यूक्रेन के राष्ट्रपति बने थे। जेलेंस्की के सत्ता में आने के बाद ही रूस ने पहली बार यूक्रेन पर हमला किया था।

कौन हैं विक्टर यानुकोविच?
कीव इंडिपेंडेंट ने एक ऑनलाइन समाचार पत्र उक्रेइंस्का प्रावदा की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्वीट किया कि क्रेमलिन द्वारा पूर्व राष्ट्रपति को एक विशेष अवसर के लिए तैयार किया जा रहा है। यानि, जेलेंस्की के बाद यानुकोविच अगले राष्ट्रपति हो सकते हैं। विक्टर यानुकोविच का जन्म साल 1950 में तत्कालीन सोवियत संघ के येनाकीयेवो शहर में एक मजदूर परिवार में हुआ था और उनकी मां एक नर्स थीं और विक्टर यानुकोविच को अपनी युवावस्था के दौरान ही हिंसक अपराधों के लिए दो बार जेल जाना पड़ा था। हालांकि, उनकी आधिकारिक जीवनी के अनुसार, इन आरोपों को अंततः रद्द कर दिया गया था।

कोयला उद्योग से करियर की शुरूआत
पूर्वी यूक्रेन में सोवियत संघ के प्रमुख कोयला-खनन उद्योग में एक परिवहन कार्यकारी के तौर पर विक्टर ने अपने करियर की शुरूआत की थी और फिर धीरे धीरे उन्होंने पढ़ाई शुप की और फिर साल 2000 में उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडजी कर ली। उसके बाद वो पूर्वी यूक्रेन की राजनीति में एक्टिव हो गये औऱ फिर डोनेट्स्क क्षेत्र के गवर्नर बन गये। जहां 30 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। गवर्नर बनने के ठीक एक साल बात ही उनका कदम यूक्रेन में काफी बढ़ गया और फिर तत्कालीन राष्ट्रपति लियोनिद कुचमा ने उन्हें नवंबर 2002 में देश का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। वहीं, साल 2004 में विक्टर यानुकोविच ने राष्ट्रपति पद के लए चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की, लेकिन उनकी चुनावी जीत को धोखाधड़ी घोषित कर चुनाव को ही खारिज कर दिया।

यूक्रेन के सबसे लोकप्रिय नेता बने
साल 2006-07 में विक्टर यानुकोविच दोबारा यूक्रेन के प्रधानमंत्रक्षी बने और फिर देखते ही देखते वो यूक्रेन के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बन गये। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी यूलिया Tymoshenko को हराकर 2010 के राष्ट्रपति चुनावों में जीत हासिल की और देश के राष्ट्रपति बन गये और फिर बतौर राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने यूक्रेन को यूरोपीय संघ में शामिल होने से लेकर यूरोपीय देशों के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए जोरदार वकालत करनी शुरू की। लेकिन, यूरोपीय संघ में यूक्रेन के शामिल होने से ठीक पहले नवंबर 2013 में उन्होंने समझौते को खारिज कर दिया, जिसके बाद यूक्रेन उनके खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। 18 से 22 फरवरी 2013 में यूक्रेन में भारी हिंसक और खूनी संघर्ष हुआ, जो कई महीनों तक जारी रहा और कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि, इस हिंसक झड़प की आग अमेरिका और यूरोपीयन देशों ने ही लगाई थी। संघर्ष में कम से कम 88 लोग मारे गये और अंतत: राष्ट्रपति को देश छोड़कर भागना पड़ा।

रूस के साथ संबंध विस्तार
साल 2004 में विक्टर यानुकोविच को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुले तौर पर समर्थन दिया था। हालांकि उन्होंने "मास्को का आदमी" होने की छवि को दूर करने की बहुत कोशिश की, लेकिन, यूक्रेन के खराब आर्थिक हालत में फंसने के बाद उन्होंने यूरोपीय संघ में शामिल होने की दिशा में तर्क देने शुरू कर दिए। हालांकि, वो ये भी कहते थे, कि यूरोपीय संघ में शामिल होने के उनके फैसले से रूस और यूक्रेन के बीच संबंध काफी खराब हो जाएंगे। शख्तार डोनेट्स्क फुटबॉल क्लब के मालिक और अरबपति कारोबारी रिनैट अख्मेतोव,जो यानुकोविच के राजनीतिक सहयोगी थे, उनकी मदद से विक्टर रूसी राष्ट्रपति के करीब आए और जब 2013-14 में वो यूक्रेन से भागे, तो फिर उन्हें रूस में ही शरण मिला और अब एक बार फिर से विक्टर यानुकोविच को यूक्रेन का राष्ट्रपति बनाया जा सकता है, अगर रूस का यूक्रेन पर पूर्ण कब्जा स्थापित हो जाता है।












Click it and Unblock the Notifications