'पाकिस्तान ला-ला लैंड में जी रहा', कौन है भारत की बेटी अनुपमा सिंह, जिन्होंने UN में दिखाई PAK को उसकी औकात
Indian diplomat Anupama Singh: संयुक्त राष्ट्र के मंच पर एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाकर पाकिस्तान ने भारत को घेरने की कोशिश की, लेकिन इस बार उसे ऐसा जवाब मिला जिसकी गूंज जिनेवा से लेकर इस्लामाबाद तक सुनाई दी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 61वीं बैठक में भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान के आरोपों को न सिर्फ खारिज किया, बल्कि तीखे शब्दों में उसे आईना भी दिखा दिया।
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 23 फरवरी से 31 मार्च तक चल रही परिषद की बैठक में 25 फरवरी को भारत की ओर से बोलते हुए अनुपमा सिंह ने साफ कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि 1947 में हुआ विलय पूरी तरह कानूनी था और इसे पलटने का सवाल ही नहीं उठता।

जब पाकिस्तान ने कश्मीर को लेकर पुराने आरोप दोहराए, तो अनुपमा सिंह ने कहा कि अगर उसे जम्मू कश्मीर में बने दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेल ब्रिज पर भी शक है, तो वह शायद भ्रम की दुनिया में जी रहा है। उनका यह 'ला-ला लैंड' वाला तंज सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा।
यहां पढ़िए अनुपमा सिंह का पूरा बयान?
भारत की ओर से जवाब देते हुए अनुपमा सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
"हम इन बेबुनियाद आरोपों को पूरी तरह अस्वीकार करते हैं। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और आगे भी रहेगा। 1947 में हुआ विलय पूरी तरह वैध था और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप था, इसे अब बदला नहीं जा सकता। अगर किसी तरह का मुद्दा बचा है तो वह सिर्फ इतना है कि पाकिस्तान ने भारत के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है और उसे उसे खाली करना चाहिए। जहां तक चिनाब पर बने विश्व के सबसे ऊंचे रेल पुल की बात है, यदि पाकिस्तान उसे भी काल्पनिक मानता है तो वह शायद हकीकत से दूर किसी ख्वाबी दुनिया में रह रहा है। पाकिस्तान तो वह 'ला-ला लैंड' (भ्रम की दुनिया) में जी रहा है। जम्मू कश्मीर में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं पर हो रहा निवेश खुद सच्चाई बयान करता है। पाकिस्तान को यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस केंद्र शासित प्रदेश का विकास बजट, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF से मांगे गए उसके बेलआउट पैकेज से भी दोगुना से अधिक है।"
अब जानिए कौन हैं भारतीय डिप्लोमैट अनुपमा सिंह? who is Indian diplomat Anupama Singh
- अनुपमा सिंह पिछले नौ सालों से भारतीय विदेश सेवा में हैं। आईएफएस में आने से पहले वह 2012 से 2014 तक केपीएमजी में कंसल्टेंट और फिर सीनियर कंसल्टेंट रहीं। 2014 में उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से प्रशासनिक प्रशिक्षण पूरा किया।
- अनुपमा सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से फाइनेंस में एमबीए हैं और मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर चुकी हैं।
- अनुपमा सिंह ने 2008 से 2011 के बीच सीएफए प्रोग्राम भी किया, जिसमें कॉरपोरेट फाइनेंस और वैल्यूएशन पर फोकस रहा।
- अनुपमा सिंह की रुचि अर्थशास्त्र, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और साहित्य में है। हालिया बयान में उन्होंने पाकिस्तान पर वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया और कहा कि भारत ऐसे देश पर ज्यादा समय बर्बाद नहीं कर सकता जो खुद आर्थिक संकट और जन असंतोष से जूझ रहा है।












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