जानें कौन हैं भारतीय मूल के अनिल मेनन, जो नासा की टीम में हुए हैं शामिल, चांद और मंगल पर रखेंगे कदम
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अगले मून मिशन के लिए अपने टीम की घोषणा कर दी है और इसके लिए 10 लोगों को चुना गया है।
वॉशिंगटन, दिसंबर 08: भारतीय मूल के वैज्ञानिक लगातार विज्ञान जगत में इतिहास रच रहे हैं और अब एक और 'भारत का बेटा' धरती से बाहर अनंत आकाश में भारत का नाम रोशन करेगा। भारतीय मूल के लेफ्टिनेंट कर्नल अनिल मेनन उन 10 अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं जिन्हें नासा के भविष्य के मिशन के लिए चुना गया है। अनिल मेनन उन वैज्ञानिकों की टीम में शामिल हुए हैं, जो आगे जाकर चंद्रमा और मंगल ग्रह पर कदम रखेंगे।

नासा के मून मिशन की वापसी
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अगले मून मिशन के लिए अपने टीम की घोषणा कर दी है और नासा ने कहा है कि, पिछली बार की तुलना में इस बार उसके अंतरिक्ष यात्री चांद पर ज्यादा वक्त बिताएंगे और ज्यादा से ज्यादा जानकारियां हासिल करने की कोशिश करेंगे। नासा ने कहा है कि, चांद मिशन के बाद उसका अगला मिशन मंगल ग्रह का होगा, जहां अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की कोशिश की जाएगी। नासा ने अपने मिशन के लिए 10 अंतरिक्षयात्रियों के नामों की घोषणा की है, जिनमें एक नाम डॉ. अनिल मेनन का शामिल है, जो मिशन में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।

मिशन से पहले कड़ी ट्रेनिंग
डॉ. अनिल मेनन के साथ साथ इस टीम के सभी सदस्यों को चांद की यात्रा पर भेजने से पहले काफी ज्यादा कड़ी ट्रेनिंग की जाएगी और कड़ी ट्रेनिंग खत्म होने के बाद अंतरिक्षयात्रियों को अंतरिक्ष की दुनिया में जानकारियां जुटाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए रवाना किया जाएगा। नासा ने सोमवार को टीम के सदस्यों के नाम की घोषणा करते हुए कहा कि, ये सभी सदस्य अमेरिका के ही रहने वाले हैं और अंतरिक्ष और मानवता के काम में लगे रहने वाले 12 हजार से ज्यादा आवेदकों में से 10 अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवारों को मिशन के लिए चुना गया है।

कौन हैं वैज्ञानिक अनिल मेनन?
अनिल मेनन का जन्म यूक्रेनी और भारतीय माता-पिता से हुआ था और उनका पालन-पोषण मिनियापोलिस, मिनेसोटा में हुआ है। 45 साल के अनिल मेनन अमेरिकी वायु सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर काम करते हैं। नासा के अनुसार, वह स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन थे, जिन्होंने स्पेसएक्स डेमो-2 मिशन के दौरान कंपनी के पहले इंसानों को अंतरिक्ष में लॉन्च करने और भविष्य के मिशनों के दौरान मानव प्रणाली का समर्थन करने के लिए एक चिकित्सा संगठन बनाने में मदद की थी। इससे पहले, उन्होंने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक ले जाने वाले विभिन्न अभियानों के लिए नासा में क्रू फ्लाइट सर्जन के रूप में काम किया है। अंतरिक्ष संगठन का दावा है कि वह जंगल और एयरोस्पेस चिकित्सा में फेलोशिप प्रशिक्षण हासिल करने वाले अनिल एक सक्रिय रूप से ट्रेनिंग लेने वाले इमरजेंसी डॉक्टर भी हैं।

आपदाओं में निभा चुके हैं भूमिका
एक डॉक्टर के तौर पर डॉ. अनिल मेनन कई आपदाओं के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। 2010 में हैती में आए भूकंप, नेपाल में 2015 के भूकंप और 2011 के रेनो एयर शो दुर्घटना के दौरान उन्होंने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वायु सेना में, मेनन ने फ्लाइट सर्जन के रूप में 45वें स्पेस विंग और 173वें फाइटर विंग के साथ काम किया है। जहां उन्होंने एफ-15 फाइटर जेट में 100 से अधिक उड़ानें भरीं और क्रिटिकल केयर एयर ट्रांसपोर्ट टीम के हिस्से के रूप में 100 से अधिक रोगियों को ले जाने का भी उन्हें अनुभव है।

डॉ. अनिल मेनन की पढ़ाई-लिखाई
डॉ. अनिल मेनन ने स्टैनफोर्ड मेडिकल स्कूल में इंजीनियरिंग और मेडिसिन का अध्ययन किया और नासा एम्स रिसर्च सेंटर, सिलिकॉन वैली, कैलिफोर्निया में सॉफ्ट टिश्यू मॉडल की कोडिंग पर काम किया है। साल 1999 में उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में न्यूरोबायोलॉजी में बैचलर्स की डिग्री हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने हंटिंगटन नाम की बीमारी पर भी रिसर्च किया है।

32 से 45 साल के हैं अंतरिक्ष यात्री
जिन अंतरिक्ष यात्रियों को नासा ने अपने मिशन के लिए चुना है, उनकी उम्र 32 साल से 45 साल के बीच है। अंतरिक्ष में भेजने से पहले नासा की तरफ से इन्हें अलग अलग तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें स्पेसवॉक सिखाया जाएगा और रोबोटिक्स को लेकर ट्रेनिंग की जाएगी। इसके साथ ही अंतरिक्ष में उन्हें अपने साथियों के साथ कैसे बात करनी है, उसकी भी ट्रेनिंग उन्हें दी जाएगी। इन 10 अंतरिक्षयात्रियों की ट्रेनिंग अगले दो सालों तक चलेगी। ट्रेनिंग पूरा होने के बाद अंतरिक्षयात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के साथ साथ अंतरिक्ष में गहरे मिशनों के लिए भी भेजा जा सकता है। हालांकि, इन्हें मुख्य तौर पर मिशन चंद्रमा के लिए चुना गया है।












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