शायद रहस्य ही रह जाए कैसे फैला कोरोना वायरस, WHO विशेषज्ञों ने कहा- ठप पड़ गई चीन के खिलाफ जांच
वाशिंगटन, 26 अगस्त। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोना वायरस के उद्गम स्थल का पता लगाने के लिए भेजी गई अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने कहा है कि यह खोज ठप पड़ गई है और चेताया है कि कि वायरस के रहस्य को सुलझाने के अवसर तेजी से बंद हो रहे हैं।

जांच टीम के वैज्ञानिकों का बड़ा आरोप
इस बीच वाशिंगटन पोस्ट ने बुधवार को बताया था कि वायरस की उत्पत्ति के बारे में राष्ट्रपति जो बाइडेन के आदेश पर शुरू हुई खुफिया जांच अनिर्णायक साबित हुई है।
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ की तरफ से शामिल किए विशेषज्ञों ने कहा कि मूल जांच "एक महत्वपूर्ण मोड़" पर है, जिसमें तत्काल सहयोग की आवश्यकता है, लेकिन सहयोग न मिलने से इसमें ठहराव आ गया है। उन्होंने आगे कहा कि चीनी अधिकारी अभी भी रोगी की निजता संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए कुछ कच्चे डेटा शेयर करने से इनकार कर रहे हैं।
बता दें कि इस साल की शुरुआत में वुहान की लैब से लीक होने के आरोपों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने पर चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों की टीम को वुहान जाने की अनुमति दी थी। जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों को एक दल वहां पर यह जांच करने पहुंचा था कि आखिर महामारी का कारण क्या हो सकता है। वुहान ही वह जगह थी जहां पर 2019 के दिसम्बर में पहली बार कोरोना वायरस के मनुष्य में मिलने का पता चला था। अब तक इस वायरस की चपेट में आकर दुनिया भर में 45 लाख लोगों की मौत हो चुकी है।

जांच में देरी कर बचना चाहता है चीन
मार्च में प्रकाशित विश्लेषण में डब्ल्यूएचओ टीम ने अपने निष्कर्ष में कहा था कि वायरस शायद जानवरों के माध्यम से मनुष्यों में पहुंचा था और उन्होंने प्रयोगशाला रिसाव की संभावना को "बेहद असंभव" बताया था। लेकिन अब डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों ने कहा कि उनकी रिपोर्ट केवल प्रारंभिक चरण में थी। साथ ही यह भी कहा कि इस महत्वपूर्ण जांच के लिए अवसर की खिड़की तेजी से बंद हो रही है और कोई भी देरी कुछ अध्ययनों को जैविक रूप से असंभव बना देगी। उदाहरण के लिए उन्होंने कहा कि समय के साथ शरीर में एंटीबॉडी कम होते जाते हैं, इसलिए 2019 से पहले संक्रमित हुए लोगों के सैंपल लेना और उनका परीक्षण कम सही परिणाम देगा।
यानि कि चीन जांच के लिए सैंपल देने में जितनी देरी करा ले जाता है उसका उतना ही फायदा है और वह साफ-साफ बच सकता है।
इस बीच चीन ने बुधवार को कहा था कि अधिकारियों को अब "अन्य संभावित रास्तों पर ध्यान देना चाहिए जो कोविड-19 की उत्तपत्ति का पता लगाने में मदद कर सकते हैं।" चीन का सुझाव है कि इस जांच का रुख अब अन्य देशों की तरफ मोड़ा जाना चाहिए। चीन का इशारा अमेरिका की तरफ है और उसने आरोप भी लगाया है कि ऐसे बहुत से प्रमाण है कि यह वायरस अमेरिकी की सैन्य प्रयोगशाला में तैयार हुआ है। नए घटनाक्रम में अब चीन ने अमेरिका पर पलटवार तेज कर दिया है।

अमेरिका को घेरने की कोशिश में चीन
उधर डब्ल्यूएचओ के वैज्ञानिकों की आशंका पर चीन के विदेश मंत्रालय में महानिदेशक पद पर तैनात फू कांग ने सहमति जताते हुए कहा कि यह दुख की बात है कि कोविड-19 की उत्पत्ति को खोज करने वाली जांच अब ठप हो गई है लेकिन यह चीन की गलती नहीं थी। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा विज्ञान आधारिक जांच का समर्थन करेगा।
कांग ने अमेरिका पर लैब लीक थ्योरी को हाइप करने और चीन को दोषी ठहराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने आगे जोड़ा कि कोरोना वायरस अमेरिका स्थित उच्च स्तर की प्रयोगशालाओं से जोड़ा जा सकता है। साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका को डब्ल्यूएचओ की टीम को अपने कुछ प्रतिष्ठानों की जांच के लिए आमंत्रित करना चाहिए।












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