यूक्रेन युद्ध में मिली हार तो रूस में तख्तापलट तय? पुतिन जाएंगे तो कौन बनेगा रूस का अगला राष्ट्रपति?
जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने सेना प्रमुख को अपने परमाणु फोर्स को एक्टिव करने का आदेश दिया, तो पहली बार में उनके सेना प्रमुख भी हैरान रह गये थे।
मॉस्को, मार्च 02: यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद रूस को पूरी दुनिया में विरोध का सामना करना पड़ रहा है और जितने प्रतिबंध रूस पर लगाए गये हैं, उसे देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि, रूस की स्थिति आने वाले दिनों में सीरिया, लीबिया या फिर अफगानिस्तान जैसी हो सकती है और अगर ऐसा होता है, तो फिर राष्ट्रपति पुतिन के लिए स्थिति बिगड़ते देर नहीं लगेगी और रूस जैसे देश, जहां लोकतंत्र नाम की चीज नहीं हैं और सत्तावादी ताकतें अकसर सरकार का तख्तापलट करते रहते हैं, राष्ट्रपति पुतिन की सत्ता की तख्तापलट की बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में अगर पुतिन को पद से बर्खास्त किया जाता है, तो फिर रूस का शासन किन हाथों में आ सकता है और रूस का अगला राष्ट्रपति कौन बन सकता है... आईये रूस के बड़े नेताओं पर एक नजर डालते हैं।

खतरे में पड़ सकती है पुतिन की कुर्सी
जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने सेना प्रमुख को अपने परमाणु फोर्स को एक्टिव करने का आदेश दिया, तो पहली बार में उनके सेना प्रमुख भी हैरान रह गये। पुतिन ने साफ कर दिया, कि अगर नाटो देश यूक्रेन की मदद करने की कोशिश करते हैं, तो फिर वो परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से परहेज नहीं करेंगे। पुतिन के आदेश से रूस की सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी सहमत नहीं हैं और पश्चिमी देशों के अत्यंत सख्त प्रतिबंध ने रूसी अर्थव्यवस्था को विकलांग बनाने की पूरी रूपरेखा खींच दी है और अगर रूस की स्थिति बिगड़ती है, तो क्या पता... कल पुतिन जैसा ही कोई सत्तावादी नेता, पुतिन को सत्ता से बर्खास्त कर दे।

सर्गेई शोयगु- रूस के रक्षा मंत्री
सर्गेई शोयगु, जो इस वक्त रूस के रक्षा मंत्री भी हैं, वो राष्ट्रपति पुतिन के बाद रूस के 'दूसरे सबसे लोकप्रिय' राजनेता माने जाते हैं और जब पुतिन ने ‘न्यूक्लियर फोर्स' को एक्टिव करने का आदेश दिया था, तो सर्गेई शोयगु भी हैरान रह गये थे। पूर्वी रूस में स्थिति चादान के रहने वाले रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगु ने यूक्रेन में रूसी हमले को आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब राष्ट्रपति पुतिन ने ‘न्यूक्लियर डेटरेंट फोर्स' को एक्टिव करने का आदेश दिया था, उस वक्त रूसी सेना प्रमुख वालेरी गेरासिमोव के साथ साथ रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगु का चेहरा कैमरे में कैद हो गया था और उनके चेहरे पर हैरानी और स्तब्धता साफ तौर पर देखी गई थी। सर्गेई शोयगु ने साल 2012 में कोई सैन्य अनुभव नहीं होने के बावजूद अपनी भूमिका निभाई थी और साल 2014 में यूक्रेन के ही क्रीमिया पर रूसी आक्रमण का नेतृत्व किया था। सर्गेई शोयगु, राष्ट्रपति पुतिन के काफी करीबी माने जाते हैं और इतिहास गवाह रहा है, सबसे करीबी शख्स ने ही सबसे ज्यादा बार सत्ता का तख्तापलट किया है।

माने जाते हैं रूस के सबसे बड़े सैन्य नेता
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी को हराने वाले जनरल जॉर्ज ज़ुकोव के बाद से रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगु को रूस का सबसे बड़ा सैन्य नेता माना जाता है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध में अगर रूस जीत हासिल नहीं कर पाता है, तो इसकी जिम्मेदारी पुतिन के साथ साथ सर्गेई शोयगु की भी होगी, लेकिन उन्हें पुतिन की तुलना में अधिक व्यावहारिक कहा जाता है और वो सत्ता में आने के बाद पश्चिमी देशों के साथ रूसी संबंधों को फिर से बहाल करने की कोशिश कर सकते हैं और आर्थिक प्रतिबंधों में फंसे रूस को बाहर निकालने की कोशिश कर सकते हैं। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में ‘रसियन स्टडी' के प्रोफेसर वेरा टॉल्ज़-ज़िलिटिंकेविक ने मेलऑनलाइन को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि, 'वह इस समय एक बहुत ही शक्तिशाली व्यक्ति हैं और उन्हें व्यावहारिक व्यक्ति के तौर पर माना जाता है और वो पुतिन के खिलाफ एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि, ‘हम जिस परिस्थिति (तख्तापलट) की बात कर रहे हैं, वो उस वक्त होगा, जब रूसी सेना यूक्रेन में हार गई हो और ऐसी स्थिति में शोयगू ऐसा कह सकते हैं कि, उन्हें युद्ध में फंसाया गया था और यह पुतिन के खिलाफ जा सकता है।'

निकोलाई पेत्रुशेव- रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव
निकोलाई पेत्रुशेव भी रूस के ताकतवर शख्सियतों में से एक हैं और रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी के पूर्व प्रमुख हैं और उस वक्त रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव हैं। सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव के बारे में कहा जाता है, कि वे दुनिया के अंदर बनाए जाने वाले ‘साजिशों, प्लानिंग्स और गुप्त नीतियों' को काफी बारीकि से जानते और समझते हैं। रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी का ही पूर्व नाम केजीबी था, जिसके प्रमुख खुद व्लादिमीर पुतिन रह चुके हैं, लिहाजा समझना आसाना है, कि निकोलाई पेत्रुशेव के पास कितनी ताकत हो सकती है। निकोलाई पेत्रुशेव भी एक ‘तानाशाह' की तरह ही बर्ताव करते हैं और साल 2006 में, जब वो रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी के प्रमुख थे, उस वक्त उनपर रूस के पूर्व एजेंट अलेक्जेंडर लिट्विनेंको को पोलोनियम जहर देकर मारने के आदेश देने के आरोप लगा था। एजेंट अलेक्जेंडर लिट्विनेंको ने उस वक्त रूस के साथ विद्रोह कर दिया था और भागकर ब्रिटेन चला गया था। जांच में जहर देने के आरोप की पुष्टि भी हो गई थी।
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पुतिन को हटाने में सक्षम निकोलाई पेत्रुशेव
एक्सपर्ट्स प्रो टॉल्ज़-ज़िलिटिंकेविक ने कहा कि, ' निकोलाई पेत्रुशेव का नाम एफएसबी प्रमुख के तौर पर काफी बदनाम रह चुका है, लेकिन आप पुतिन और दुनिया भर के कई खुफिया अधिकारियों के साथ देख सकते हैं, यहां तक कि लोकतांत्रिक देशों में भी, कि खुफिया प्रमुख साजिश रचने में माहिर होते हैं और सरकार का तख्तापलट कैसे किया जाए, इसकी प्लानिंग बनाने की दूरदृष्टि उनके पास होती है, लेकिन अगर ऐसा शख्स राष्ट्रपति बनता है, तो वो देश के लिए उपयोगी साबित नहीं होता है।‘ एक्सपर्ट बताते हैं कि, अगर निकोलाई पेत्रुशेव रूस के राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंच जाते हैं, तो वो एक बहुत खराब विकल्प साबित होंगे, हालांकि अभी यह सिर्फ एक संभावना है, लेकिन निकोलाई पेत्रुशेव ‘पागलों' की तरफ दुनिया को देखने वाले शख्स हैं और उन्हें भी रोकना काफी मुश्किल साबित हो सकता है।

वालेरी गेरासिमोव- रूस के सेना प्रमुख
वालेरी गेरासिमोव को राष्ट्रपति पुतिन ने साल 2012 में रूसी सेना का प्रमुख नियुक्त किया था और वो रूस के माहिर रणनीतिकार माने जाते हैं, जिन्होंने 'गेरासिमोव सिद्धांत' बनाया था, जो रूस के लिए रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक, सूचनात्मक और सैन्य रणनीति को जोड़ता है। पिछले दो दशकों से वो रूस के द्वारा उठाए गये कई एक्शन का निर्माण करने में शामिल रहे है और उनकी बदौलत ही रूस साल 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप कर पाया और साल 2014 शीतकालीन ओलंपिक और 2018 फीफा विश्व कप की सफल मेजबानी कर पाया।

क्या कर सकते हैं सत्ता का तख्तापलट?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि, ये संभव है, लेकिन इसके लिए उन्हें खुद को पुतिन की आक्रामक कार्रवाइयों से खुद की भागीदारी बनाने से दूरी बनाई रखनी होगी। प्रोफ़ेसर टॉल्ज़-ज़िलिटिंकेविक ने कहा कि, तख्तापलट के बाद उन्हें प्रभारी बनाए रखना संभव है, और इसकी बहुत अधिक संभावना है कि पुतिन को हटाने का फैसला रूस की राजनीतिक अभिजात वर्ग का ही फैसला होगा। रूसियन स्टडी के प्रोफेसर के अनुसार, रूसी इतिहास से पता चलता है कि सेना आमतौर पर शासन परिवर्तन में खुद को शामिल नहीं करती है। उन्होंने कहा कि, 'ऐतिहासिक रूप से, न केवल आज, सेना रूस की राजनीतिक अभिजात वर्ग के बहुत सख्त नियंत्रण में है। प्रो टॉल्ज़-ज़िलिटिंकेविक ने कहा कि, 1960 के दशक की शुरुआत में निकिता ख्रुश्चेव के उन्मत्त निर्णय लेने के मामले में भी यह राजनीतिक अभिजात वर्ग ही था, जिन्होंने उन्हें सत्ता से हटा दिया था।

दिमित्री मेदवेदेव- पूर्व राष्ट्रपति
दिमित्री मेदवेदेव साल 2008 से 2012 के बीच, जब पुतिन का दूसरा कार्यकाल खत्म हुआ था, उस वक्त रूस के राष्ट्रपति भी रह चुके है और इस वक्त वो रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष हैं। सेंट पीटर्सबर्ग में जन्मे दिमित्री मेदवेदेव एक वकील भी हैं और पुतिन ने उन्हें रूस का राष्ट्रपति इसी शर्त पर बनाया था, कि वो राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन को अपना प्रधानमंत्री बनाएंगे और उन्होंने अपना वादा निभाया भी था। दिमित्री मेदवेदेव भी पुतिन के काफी करीबी माने जाते हैं और जब 2012 में जब पुतिन ने फिर से सत्ता संभाली, तो उन्होंने मेदवेदेव को प्रधानमंत्री की भूमिका का उपहार देकर एहसान वापस कर दिया। मेदवेदेव ने आठ साल तक रूस के प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई, इससे पहले कि उन्होंने और ड्यूमा में उनकी सरकार ने व्लादिमीर पुतिन के लिए व्यापक संवैधानिक परिवर्तनों को लागू करने का रास्ता साफ करने के लिए इस्तीफा दे दिया था।

बने सकते हैं राष्ट्रपति पुतिन के विकल्प
हालांकि, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साल 2034 तक खुद को राष्ट्रपति पद पर बनाए रखने का बंदोबस्त कप रखा है, लेकिन दिमित्री मेदवेदेव पुतिन को रोकने का माद्दा रखते हैं। दिमित्री मेदवेदेव के पास राष्ट्रपति पद का भी अनुभव है और सेंट पीटर्सबर्ग के इस वकील को, विशेषज्ञों के अनुसार पुतिन द्वारा खतरा नहीं माना जाता है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि, अगर पुतिन को मजबूरी में आकर पद त्यागना पड़ता है, तो उनके लिए दिमित्री मेदवेदेव सबसे बेहतक विकल्प साबित हो सकते हैं। हालांकि, प्रोफ़ेसर टॉल्ज़-ज़िलिटिंकेविक ने कहा कि, 'अगर पुतिन को हटा दिया जाता है तो रूस की स्थिति असाधारण हो जाएगी और रूस पूरी तरह से पतन के कगार पर पहुंच सकता है।‘

मिखाइल मिशुस्तीन- रूस के मौजूदा प्रधानमंत्री
रूस के वर्तमान प्रधान मंत्री ने कोविड महामारी शुरू होने से ठीक पहले ही रूसी प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण किया था और मेदवेदेव के इस्तीफे के बाद उन्हें नियुक्त किया गया था। रूस के पूर्व टैक्स पुलिस अधिकारी रह चुके मिखाइल मिशुस्तीन की रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन में काफी पकड़ है और वो रूस के भीतर ही पनपे कई असंतुष्ट वर्ग को भी संतुष्ट कर सकते हैं। मॉस्को में जन्मे राजनेता मिखाइल मिशुस्तीन ने अपने काम की बतौलत कोविड के दौर में रूस में काफी लोकप्रियता हासिल की है और प्रोफ़ेसर टॉल्ज़-ज़िलिटिंकेविक ने कहा कि, 'वह देश भर में कई अलग-अलग समूहों को संतुष्ट करेंगे और व्यवस्था की दृष्टि से, वह काफी सौम्य हैं।'












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