कौन-कौन से जीव अगले कुछ वर्षों में विलुप्त हो सकते हैं ? एक नई रिसर्च में सामने आई ये लिस्ट
वेलिंग्टन (न्यूजीलैंड), 19 सितंबर: दुनिया जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग पर बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन जब धरती से विलुप्त हो रहे जीवों की लिस्ट सामने आती है तो सच्चाई खुद ब खुद सामने आने लगती है। जीवों के विलुप्त होने को लेकर कई तरह के शोध चल रहे हैं। लेकिन, कुछ शोध के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वह हमारी सोच से भी ज्यादा गंभीर हैं। क्या जंगली जानवर और क्या समुद्री जीव, विलुप्त होने की कगार पर सबकी लाइन लग चुकी है। इसके लिए बहुत बड़े कारण हमारी इंसानी गतिविधियां ही हैं, जो आधुनिक युग में बहुत ही बेकाबू हुई हैं। इस लेख में जो जानकारी दी जा रही है, उम्मीद है कि वह हमें नींद से जगाने में मददगार साबित हो।

2050 तक विलुप्त हो सकते हैं जीवों की 40% प्रजातियां-रिपोर्ट
पृथ्वी के ज्ञात इतिहास में पांच बार बड़े पैमाने पर जीवों के विलुप्त हो जाने की घटनाएं हो चुकी हैं। जबकि, कई वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसानी हरकतों की वजह से छठी बार ऐसी ही स्थिति पैदा होने की प्रक्रिया भी चल रही है। लाइव साइंस में छपे एक विस्तृत लेख के मुताबिक कुछ वैज्ञानिकों का तो यहां तक दावा है कि पृथ्वी पर अभी जितने भी तरह के जीव और उनकी प्रजातियां मौजूद हैं, उनमें से करीब 40% वर्ष 2050 तक विलुप्त हो सकते हैं। इन भविष्यवाणियों को देखते हुए वैज्ञानिक तरह-तरह के शोध में जुटे हैं। सबसे खराब संभावित हालात और उससे कुछ बेहतर होने की उम्मीद पर भी काम कर रहे हैं।

छठी बार बड़े पैमाने पर विलुप्ति का खतरा
न्यूजीलैंड में ओटागो यूनिवर्सिटी में प्राणि विज्ञान विभाग में ओटागो पैलियोजेनेटिक्स लैबोरेटरी के निदेशक और प्राचीन डीएनए में सीनियर लेक्चरर निक रॉवलेंस ने कहा है, जीवों के व्यापक रूप से विलुप्त होने की छठी घटना काफी हद तक संभावित है। वो बोले- 'मैं समझता हूं कि इसकी बहुत ज्यादा संभावना है।' उन्होंने कहा, 'और, यदि प्रजातियां वैश्विक स्तर पर विलुप्त नहीं भी होती हैं तो भी जो तेजी से बदलती दुनिया से मेल-जोल नहीं कर पाएंगी वह भी सीमित हो सकती हैं, जनसंख्या बहुत घट जा सकती है, स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो सकती हैं और एक तरह से विलुप्ति की कगार पर पहुंच सकती हैं। ' उन्होंने कहा कि अगर इस स्थिति को रोकने के लिए जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो ऐसी स्थिति आने से रोका नहीं जा सकता।

इन जीवों पर है विलुप्त होने का खतरा
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट के मुताबिक करीब 41,000 के मौजूदा समय में विलुप्त होने का खतरा है, जो कि निर्धारित प्रजातियों की लगभग एक-तिहाई हैं। आईयूसीएन और वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) दोंनों के ही मुताबिक कुछ जीवों के विलुप्त होने का खतरा बहुत ही ज्यादा हो चुका है, जिसमें सुमात्रा का ओरांगुटान, सुमात्रा का हाथी, काला गैंडा, हॉक्सबिल समुद्री कछुआ, सुंडा बाघ और क्रॉस रिवर गोरिल्ला शामिल हैं।

गिनती के बच गए हैं ये जीव
आईयूसीएन ने उन प्रजातियों को अत्यधिक खतरे में वर्गीकृत किया है, जिनकी संख्या पिछले 10 वर्षों में 80 से 90 फीसदी और उससे भी ज्यादा घट गई है और जिनकी आबादी फिलहाल 50 से भी कम रह गई है या बाकी कारणों से उनके पूरी तरह से विलुप्त हो जाने का खतरा है। ऐसी ही कुछ प्रजातियां हैं, जो मुश्किल से 2050 तक ही जीवित रह पाएं। उदाहरण के लिए मुश्किल से 70 अमुर तेंदुआ ही जंगलों में बच गए हैं, जबकि वाक्विटा की संख्या डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अनुसार 10 से भी कम रह गई है। यह दुनिया का बहुत ही दुर्लभ समुद्री स्तनधारी है।

कीट-पतंगों पर भी संकट
लेकिन, विलुप्त होने वाली लिस्ट में सिर्फ यही नामचीन जीव नहीं रह गए हैं। अनेकों ऐसे जीव भी विलुप्त होने की स्थिति में है, जिनके बारे लोग कम जानते हैं। 2019 में एक जर्नल बायोलॉजिकल कंजर्वेशन में एक समीक्षा प्रकाशित हुई थी, जिसके मुताबिक 40% से ज्यादा कीड़ों की प्रजातियां विलुप्त होने वाली हैं। आईयूसीएन की लिस्ट के मुताबिक जो कीट-पतंग विलुप्त हो सकते हैं, उनमें व्हाइट-टिप्पड ग्रासहॉपर, साउदर्न एल्पाइन बश-क्रिकेट, स्वानेपोल ब्लू बटरफ्लाई, फ्रैंकलिन बंबलेबी और सेशेल्स विंगलेस ग्राउंडहॉपर शामिल हैं।

ऐम्फिबीअन किसकी सजा भुगत रहे हैं ?
जर्नल नेचर में 2022 में ही प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार पांच में से दो ऐम्फिबीअन (उभरचर) अब विलुप्ति की कगार पर हैं यानी इनकी 40.7% प्रजाति हमेशा के लिए पृथ्वी से खत्म हो सकती है। इससे पहले 2016 में जर्नल बायोलॉजी लेटर्स की रिपोर्ट में कहा जा चुका है कि 2050 तक क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलिया के नमी वाले इलाके से 35% मेंढक समाप्त हो सकते हैं। जबकि, कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐम्फिबीअन के मामले में यह संकट कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है, क्योंकि उन्हें इसके बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने में बहुत ही दिक्कत हुई।

न्यूजीलैंड में पक्षियों की 80 प्रजातियां गायब
रॉवलेंस ने प्रकृति पर मंडरा रहे खतरे के बारे में कहा है कि 'इसे स्पष्ट करने के लिए आइलैंड की पारिस्थितिकी तंत्र एक आदर्श उदाहरण हैं।' उन्होंने बताया है कि जब इंसान धरती पर आया था तो न्यूजीलैंड में पक्षियों की करीब 230 प्रजातियां थीं, जो कि मौजूदा समय में घटकर लगभग 150 रह गई हैं। यानी पक्षियों की करीब 80 प्रजातियां अकेले इस द्वीप से विलुप्त हो चुकी हैं। लेकिन, इंसानी हरकतों, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वॉर्मिंग ने इस स्थिति को भयावह बना दिया है और जिसकी पहली मार जीवों की कई प्रजातियों पर अगले कुछ दशकों में पड़ने वाली हैं।

जीवों को विलुप्त होने से बचाने के लिए क्या किया जा सकता है ?
पर्यावरण संरक्षण और जीवों को विलुप्त होने से बचाने के लिए दुनिया भर में काफी कोशिशें चल रही हैं। लेकिन, रॉवलेंस कहते हैं, 'हमारे पास जो जैव विविधता बच गई है, उसके लिए हमें यह समझने की जरूरत है कि इसने अतीत और वर्तमान में जलवायु परिवर्तन और मानवी प्रभाव पर किस तरह से प्रतिक्रिया दी है, ताकि हम यह अनुमान लगा सकें कि यह भविष्य में साक्ष्य-आधारित संरक्षण प्रबंधन रणनीतियों को लेकर किस तरह की प्रतिक्रिया दे सकते हैं। कुल मिलाकर अभी बहुत ज्यादा शोध और उसके लिए बहुत ही अधिक मेहनत की आवश्यकता है, लेकिन इसके लिए ज्यादा समय नहीं है और जो करना है, अब तत्काल करना होगा। नहीं तो फिर बहुत देर हो सकती है। (पहली चार तस्वीरें छोड़कर बाकी प्रतीकात्मक)












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