अल ज़वाहिरी के शव का क्या हुआ? अमेरिका ने मौत की पुष्टि कैसे की
अफ़ग़ानिस्तान से पिछले साल अमेरिका ने जब अफ़रातफ़री की स्थिति में अपने सैनिकों को वापस बुलाया था तब राष्ट्रपति जो बाइडन ने वादा किया था कि वह तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान को आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना नहीं बनने देंगे.
बाइडन ने जब ऐसा कहा था तो उनका इरादा स्पष्ट हो गया था कि दशकों पुराना आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध अभी ख़त्म नहीं हुआ है.
अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के क़रीब एक साल बाद राष्ट्रपति बाइडन से शीर्ष अधिकारियों ने संपर्क किया और बताया कि ख़ुफ़िया अधिकारियों ने अल-क़ायदा नेता अयमन अल-ज़वाहिरी के ठिकाने को खोज लिया है.
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद अल-ज़वाहिरी काबुल लौट आए हैं.
अमेरिका अपने सैनिकों को वापस बुलाने और तालिबान के सत्ता में आने के बाद से वहाँ बहुत ही सतर्कता चीज़ों को देख रहा है. बाइडन को एक सलाहकार ने बताया कि तालिबान के आने के बाद से अल-क़ायदा के नेता फिर से लौट रहे हैं.
ज़वाहिरी के बारे में ख़बर थी कि वह काबुल में एक बड़ी चाहारदिवारी के भीतर बने घर में रह रहे थे. ज़वाहिरी के साथ उनकी पत्नी और बेटी भी थीं. यह काबुल का चूरपुर इलाक़ा है. इसे पॉश इलाक़े के तौर पर देखा जाता है. पहले की सरकार में विदेशी दूतावास और राजनयिकों का यह ठिकाना था. अब इस इलाक़े में तालिबान के सीनियर अधिकारी रहते हैं.
अप्रैल महीने की शुरुआत में सीआईए के अधिकारियों ने राष्ट्रपति बाइडन के अधिकारियों को ज़वाहिरी के बारे में बताया था. इसके बाद राष्ट्रपति बाइडन को सूचित किया था कि उन्होंने एक नेटवर्क की पहचान की है जो अल-क़ायदा नेता को समर्थन दे रहा है.
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हमले की कहानी
धीरे-धीरे अमेरिकी सुरक्षा ख़ुफ़िया अधिकारियों ने अल-ज़वाहिरी के घर की गतिविधियों को देखना-समझना शुरू किया. उस घर में कितने लोग रहते हैं और कौन कब बाहर निकलता है, इसे भी समझने की कोशिश की गई.
अमेरिकी जासूसों ने उस घर में एक महिला को भी देखा और उसकी पहचान अल-ज़वाहिरी की पत्नी के तौर पर हुई. अमेरिकी जासूसों को उस महिला का व्यवहार थोड़ा अलग लगा था. इनका कहना है कि वह महिला तकनीक का इस्तेमाल करती थी और कोशिश करती थी कि किसी को यह पता नहीं चले कि उनके पति काबुल के इस घर में रहते हैं.
इस घर में आने के बाद अल-ज़वाहिरी ने कभी कैंपस नहीं छोड़ा. लेकिन अमेरिकी जासूसों ने देखा कि अल-ज़वाहिरी कभी-कभार बालकनी में आते थे.
राष्ट्रपति बाइडन के लिए यह मौक़ा था कि अमेरिका के मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी को ख़त्म किया जाए. ज़वाहिरी का घर सघन आबादी वाले इलाक़े में है. अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के दौरान एक ड्रोन हमले में काबुल में 10 निर्दोष मारे गए थे. इनमें सात बच्चे भी शामिल थे. इस बार ड्रोन हमले को लेकर अमेरिकी सुरक्षा बलों के दिमाग़ में यह बात थी.
मई और जून महीने में अमेरिकी नेता का ध्यान यूक्रेन में जारी युद्ध, गन कंट्रोल क़ानून और जलवायु परिवर्तन पर रहा. लेकिन गोपनीय रूप से राष्ट्रपति बाइडन को अल-ज़वाहिरी को लेकर भी बताया गया था. बाइडन ने ख़ुफ़िया अधिकारियों से कहा कि ज़वाहिरी के ख़िलाफ़ ऑपरेशन में आम लोगों और उनके परिवार के किसी भी सदस्य को कोई नुक़सान नहीं पहुँचना चाहिए.
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बाइडन की मंज़ूरी
एक जुलाई को राष्ट्रपति बाइ़डन सीआईए निदेशक विलियम बर्न्स और नेशनल इंटेलिजेंस की निदेशक अवरिल हाइनिस के साथ बैठक की. बाइडन इस बैठक में अल-ज़वाहिरी पर हमले को लेकर काफ़ी गंभीर थे. वह किसी भी सूरत में किसी भी मोर्चे पर कोई चूक नहीं चाहते थे. एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि बाइडन चाहते थे कि इस ऑपरेशन में कोई भी जोख़िम ना उठाना पड़े.
बाइडन ने ऑपरेशन के हर स्टेप के बारे में जानकारी ली. उन्होंने ज़वाहिरी के घर की संरचना के बारे में जाना और हमले के असर के बारे में भी पूछा. बाइडन की यह बैठक व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई थी. यह व्हाइट हाउस के नीचे बंकर की तरह है, जहाँ से राष्ट्रपति विदेश में चल रहे ऑपरेशन पर भी नज़र रखते हैं. अमेरिकी ख़ुफ़िया अधिकारी भी पूरी तैयारी के साथ गए थे ताकि राष्ट्रपति के हर सवाल का जवाब दिया जा सके.
इस बैठक में वकीलों का भी एक छोटा समूह था. वकीलों को यह बताना था कि स्ट्राइक में कौन सी क़ानूनी दिक़्क़तें हो सकती हैं. 25 जुलाई को राष्ट्रपति बाइडन ने सारी चीज़ें समझने के बाद स्ट्राइक की मंज़ूरी दे दी.
अफ़ग़ानिस्तान के स्थानीय समय सुबह 06:18 बजे 31 जुलाई दो हेलफ़ायर मिसाइल एक ड्रोन के ज़रिए ज़वाहिरी की बालकनी में दागी गई. इसमें अल-क़ायदा नेता अल-ज़वाहिरी की मौत हो गई. अमेरिकी ख़ुफ़िया अधिकारियों का कहना है कि ज़वाहिरी के परिवार के किसी भी सदस्य को कोई नुक़सान नहीं हुआ.
शव का क्या हुआ?
इस हमले में घर की खिड़कियाँ टूट गईं लेकिन और कोई नुक़सान नहीं हुआ. हज़ारों मील दूर बैठे बाइडन को हमले की कामयाबी के बारे में सूचना दी गई. रविवार को तालिबान के गृह मंत्रालय ने टोलो न्यूज़ से कहा कि मिसाइल ख़ाली घर में गिरी थी, इसलिए कोई नुक़सान नहीं हुआ. इसके अलावा तालिबान ने कोई और जानकारी नहीं दी.
लेकिन बाइडन प्रशासन का कहना है कि रेड के ठीक के बाद हक़्क़ानी नेटवर्क और तालिबान का हिंसक धड़ा वहाँ पहुँचा और ज़वाहिरी के परिवार को वहाँ से हटा लिया. इन्होंने पूरे ऑपरेशन पर पर्दा डालने की कोशिश की. सोमवार को जब बीबीसी का एक रिपोर्टर उस घर के पास पहुँचा तो तालिबान ने जाने से रोक दिया और धमकी दी. तालिबान ने कहा कि यहाँ कुछ भी देखने के लिए नहीं है.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ख़ुफ़िया अधिकारियों ने कई स्तरों पर इस बात की पुष्टि की है कि हमले में ज़वाहिरी की मौत हो गई. लेकिन अमेरिका का कोई भी अधिकारी काबुल में ग्राउंड पर नहीं था. इन्होंने कोई जानकारी नहीं दी कि ऑपरेशन कैसे कामयाब रहा और इसकी पुष्टि कैसे की गई.
राष्ट्रपति बराक ओबामा की सरकार में नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक रहे जेम्स क्लैपर ने बीबीसी से कहा कि काबुल में अमेरिका के पूर्व सहयोगियों ने पुष्टि की होगी.
अभी तक स्पष्ट नहीं है कि ज़वाहिरी के शव का क्या हुआ. बाइडन प्रशासन का कहना है कि ज़वाहिरी के शव को लेने की कोई कोशिश नहीं की गई.
हालांकि ओसामा बिन-लादेन के शव को बरामद कर समंदर में दफ़्न करने की बात कही गई थी. ओसामा बिन-लादेन की पहचान भी की गई थी. समंदर में इसलिए दफ़्न किया गया था ताकि कट्टरपंथी मज़ार न बना दें.
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