जब मोदी ने ओबामा और एबॉट को बताया लखनऊ और कैनबरा का रिश्ता
ब्रिसबेन। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में एक ऐसा रिश्ता है जिसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जी-20 सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और ऑस्ट्रेलिया के पीएम टोनी एबॉट से किया। इस जिक्र के साथ ही नरेंद्र मोदी, ओबामा और एबॉट के लिए स्टोरीटेलर यानी कहानीकार के रोल में तब्दील हो गए।

कैनबरा के साथ लखनऊ का इमोशनल बांड
मोदी ने ओबामा और एबॉट को बताया कि ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा को जिस अमेरिकी आर्किटेक्ट वाल्टर बर्ले ग्रिफिन ने डिजायन किया था उनकी कब्र लखनऊ में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने इस बारे में जानकारी दी।
अकबरुद्दीन ने इस चर्चा से जुड़ी कुछ फोटोग्राफ भी अपने ट्विटर एकाउंट पर शेयर की है। इसके साथ ही ग्रिफिन की कब्र की वह फोटो भी अकबरुद्दीन ने शेयर की है जो इस समय लखनऊ में है।

11 फरवरी 1937 को ग्रिफिन जब 61 वर्ष के थे तब उनकी मौत हो गई थी। कैनबरा शहर को डिजाइन करने वाले ग्रिफिन ने अपनी जिंदगी के 28 वर्ष आर्किटेक्ट को दिए है। कैनबरा के अलावा उन्होंने अमेरिकी शहर शिकागो को भी डिजाइन किया था।
उन्हें एल के आकार के फ्लोर को डिजाइन करने का श्रेय दिया जाता है। अपने 28 वर्ष लंबे करियर में ग्रिफिन ने करीब 350 इमारतें डिजायन कीं। ग्रिफिन ने करीब 15 वर्ष लखनऊ में बिताए थे।
लखनऊ से ग्रिफिन का रिश्ता
वर्ष 1935 में ग्रिफिन भारत आए और यहां उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी को अपने हाथों और ख्यालों से संवारा। ग्रिफिन ने भारत में ही रुकने का फैसला किया था। लखनऊ यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी को डिजाइन करने के बाद ग्रिफिन को 40 कमीशंस से भी ज्यादा का जिम्मा सौंपा गया।
इसमें लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन विंग की बिल्डिंग और म्यूजियम के साथ ही मोहम्मदाबाद के राजा के लिए एक लाइब्रेरी, राजा जहांगिराबाद की रानियों के लिए घर, पायनियर प्रेस की इमारत, म्यूनिसिपल कार्यालय के साथ ही कई निजी घरों का निर्माण भी किया। इनके अलावा उन्होंने किंग जॉर्ज फोर का एक मेमोरियल भी डिजायन किया।
ग्रिफिन ने वर्ष 1936-1937 में यूनाइटेड प्रोविंस एग्जिबिशन ऑफ इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर को डिजायन करने की जिम्मेदारी निभाई। उनके 160 एकड़ की इस साइट पर उनके 53 प्रोजेक्ट्स थे जिसमें एक स्टेडियम, एरिना, मस्जिद , इमामबाड़ा, आर्ट गैलरी, रेस्टोरेंट, बाजार, पैवेलियन और इसी तरह की चीजें शामिल थीं।
ग्रिफिन आज भी भारत में उभरते हुए आर्किटेक्ट्स के लिए एक प्रेरणा हैं। वर्ष 1937 में ग्रिफिन की मौत भी लखनऊ के ही किंग जॉर्ज अस्पताल में हुई थी।












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