TAPI प्रोजेक्ट क्या है, जिसपर भारत-पाकिस्तान साथ मिलकर कर रहे काम, तालिबान ने किया बड़ा वादा
भारत और पाकिस्तान के तनाव और अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की वापसी ने इस प्रोजेक्ट को काफी प्रभावित किया है।

TAPI Gas Pipeline: तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत यानि TAPI गैस पाइपलाइन परियोजना पर काम एक बार फिर से शुरू होने वाला है और इसकी उम्मीद उस वक्त बढ़ी है, जब पाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान ने ज्वाइंट इम्प्लीमेंटेशन प्लान (JIP) पर हस्ताक्षर किए हैं। (तस्वीर- फाइल)
हालांकि, TAPI गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू होगा, इसकी संभावना लगभग नगण्य हो गई थी, लेकिन माना जा रहा है, कि चार देशों के इस प्रोजेक्ट ने फिर से सांस लेना शुरू कर दिया है।
एक बयान के मुताबिक, JIP पर राज्य मंत्री और तुर्कमेन गाज़ के प्रमुख मस्कट बाबायेव और पाकिस्तान के पेट्रोलियम राज्य मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। दोनों देशों के बीच हुआ ये समझौता काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिसके बाद अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट के कामयाब होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
पाकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान में हुआ समझौता
पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ, प्रमुख कैबिनेट सदस्य, और पेट्रोलियम डिवीजन और इंटर स्टेट गैस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने इस हस्ताक्षर कार्यक्रम में भाग लिया।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, पाकिस्तान की दो दिवसीय यात्रा के समापन पर बाबायेव, ऊर्जा उप मंत्री एनागेल्डी सपारोव और बीओडी, टीपीसीएल के सीईओ और अध्यक्ष, मुहम्मेटमिरत अमानोव के नेतृत्व में एक उच्च रैंकिंग वाली तुर्कमेनिस्तान टीम ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इसमें कहा गया है कि जेआईपी परियोजना गतिविधियों में तेजी लाने और निगरानी के लिए एक वरिष्ठ समन्वय समिति (एससीसी) के गठन की परिकल्पना करेगी।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने पीएम के विशेष सहायक जहानजेब खान को पाकिस्तान की ओर से एक फोकल व्यक्ति के रूप में एससीसी के प्रमुख के रूप में काम करने के लिए नामित किया है।

क्या है TAPI गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट?
1990 के दशक में TAPI परियोजना की परिकल्पना की गई थी और ये पाइपलाइन 1814 किलोमीटर लंबी होगी।
TAPI परियोजना ट्रांस-कंट्री पाइपलाइन प्रोजेक्ट है, जिसमें चार देश तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत शामिल हैं।
1,814 किलोमीटर लंबी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन तुर्कमेनिस्तान से निकलती है और भारत पहुंचने के लिए अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर गुजरती है।
इस प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित मार्ग हेरात, कंधार, चमन, झोब, डीजी खान, फिर पाकिस्तान के मुल्तान होते हुए ये गैस पाइपलाइन भारत के पंजाब के फाजिल्का में प्रवेश करेगी।
पहले इस परियोजना का नाम ट्रांस-अफगानिस्तान पाइपलाइन प्रोजेक्ट था, लेकिन बाद में इसमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल हो गये और प्रोजेक्ट का नाम TAPI हो गया।
TAPI गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को कामयाब बनाने के लिए चारों देशों ने मिलकर एक कंपनी का निर्माण किया, जिसका नाम Galkynysh-TAPI पाइपलाइन कंपनी लिमिटेड है। वहीं, TAPI गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को एशियन डेवलपमेंट बैंक की तरफ से वित्तीय मदद मिलती है।
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने घोषणा की है, वह TAPI गैस पाइपलाइन बिछाने के काम को पूरा करने के लिए 30,000 सैनिकों को तैनात करेगी।

कितना है TAPI प्रोजेक्ट का बजट?
TAPI प्रोजेक्ट का बजट करीब 10 अरब डॉलर है और इस प्रोजेक्ट का फाइनल होने के बाद भारत की गैस के लिए रूस पर, और पाकिस्तान की चीन पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
TAPI प्रोजेक्ट के तहत तुर्कमेनिस्तान से गैस की सप्लाई अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत को की जाएगी।
इस गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को लेकर संभावना है, कि तुर्कमेनिस्तान से 33 अरब क्यूबिक मीटर गैस की हर साल आपूर्ति इस प्रोजेक्ट के जरिए की जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, 33 अरब क्यूबिक मीटर गैस से 5 अरब क्यूबिक मीटर गैस अफगानिस्तान को मिलेगी। वहीं, भारत और पाकिस्तान को 14-14 अरब क्यूबिक मीटर गैस की सप्लाई की जाएगी।
इस प्रोजेक्ट को लेकर चारों देशों के बीच समझौता होने में 20 सालों का वक्त लगा और साल 2010 में इस प्रोजेक्ट पर साइन किए गये। वहीं, साल 2013 में जाकर चारों देशों की तरफ से प्रस्तावित गैस कंपनियों को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया।
साल 2015 में तुर्कमेनिस्तान ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया और साल 2019 तक इस प्रोजेक्ट का काम फाइनल करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, पहले भारत और पाकिस्तान के बीच का तनाव बढ़ा और फिर बाद में अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद इस प्रोजेक्ट का काम लेट होता चला गया। वहीं, अब एक बार फिर से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है।
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