Pakistan Budget: पाकिस्तान का बजट आज होगा पेश, क्या देश को डिफॉल्ट होने से बचा पाएंगे शहबाज?
पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और देश की अवाम ने शहबाज सरकार से राहत की उम्मीदें लगा रखी हैं, लेकिन किसी तरह की खुशखबरी मिलने की उम्मीद न्यूनतम है।

Pakistan Budget 2023-24: पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार आज शाम के वक्त नेशनल असेंबली (पाकिस्तानी संसद) में अपना वार्षिक बजट पेश करने जा रही है, जिसका उद्देश्य बेलआउट फंड की रिहाई को संभावित रूप से सुरक्षित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की आवश्यकताओं को पूरा करना है।
खराब आर्थिक हालातों के बीच शहबाज सरकार के लिए ये बजट पेश करना बहुत बड़ी चुनौती मानी जा रही है, क्योंकि जनता को अगर राहत दी जाती है, तो फिर आईएमएफ से कर्ज मिलने की उम्मीद छोड़नी होगी, लेकिन अक्टूबर में होने वाले चुनाव से पहले, आईएमएफ की कड़ी शर्तों को मानना, सरकार के लिए बहुत बड़ी मुसीबत है।
पाकिस्तान के ऊपर डिफॉल्ट होने का खतरा काफी बढ़ा हुआ है और देश की अर्थव्यवस्था दोहरे घाटे और रिकॉर्ड उच्च मुद्रास्फीति के तहत चरमरा रही है, जिसने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पीडीएम गठबंधन की लोकप्रियता को काफी कम कर दिया है।
बजट की मंजूरी के लिए संघीय कैबिनेट की बैठक दोपहर 3 बजे निर्धारित है और वित्त मंत्री इशाक डार शाम 4 बजे के बाद संसद में अपना बजट भाषण देने वाले हैं।
अमूमन देखा यही जाता है, कि सरकार चाहे किसी भी देश की हो, अपने कार्यकाल के आखिरी बजट में जनता के लिए लोकलुभावन योजनाओं की बरसात कर दी जाती है, लेकिन पाकिस्तान में जो हालात हैं, उसे देखकर मुश्किल लगता है, कि सरकार जनता को किसी तरह की राहत दे पाएगी।
पाकिस्तान में आज शाम पेश होगा बजट
इस सप्ताह की शुरुआत में कुछ बजट आंकड़ों की घोषणा की गई थी, जिसमें 1.15 ट्रिलियन ($ 4 बिलियन) का डेवलपमेंट खर्च, और आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए 3.5 प्रतिशत का आर्थिक विकास लक्ष्य तय किया गया है।
समाचार एजेंसी रॉयटर ने सूत्रों के हवाले से बताया है, कि प्रारंभिक बजट प्रस्तावों में सकल घरेलू उत्पाद के 7.7 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे की परिकल्पना की गई थी, जिसमें कुल खर्च 14.5 ट्रिलियन (50.7 अरब डॉलर) और राजस्व संग्रह 9.2 ट्रिलियन (32.2 अरब डॉलर) था।
प्रारंभिक बजट प्रस्ताव में सरकार ने मुद्रास्फीति की दर को 21 प्रतिशत निर्धारित किया है, जबकि मौजूदा वक्त में पाकिस्तान में मुद्रास्फीति 38 प्रतिशत है।
वहीं, आईएमएफ ने गुरुवार को कहा कि वह सरकार के साथ बजट पर चर्चा कर रहा है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार उम्मीद कर रही है, कि आईएमएफ को 6.5 अरब डॉलर के उस कार्यक्रम में से कम से कम 2.5 अरब डॉलर का अनलॉक करने के लिए राजी किया जाएगा, जो पाकिस्तान ने 2019 में समझौता किया था और जो समझौता इस महीने के अंत में खत्म हो रहा है।
आईएमएफ के पाकिस्तान के रेजिडेंट प्रतिनिधि एस्तेर पेरेज़ रुइज़ ने गुरुवार को कहा, "वित्त वर्ष 24 के बजट पर चर्चा का फोकस सामाजिक खर्च बढ़ाने के लिए जगह बनाते हुए ऋण स्थिरता की संभावनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता को संतुलित करना है।"
आपको बता दें, कि पाकिस्तान अपने पिछले बजट में निर्धारित लगभग सभी आर्थिक लक्ष्यों से चूक गया है, विशेष रूप से इसका विकास लक्ष्य, जो शुरू में 5 प्रतिशत निर्धारित किया गया था, इस वर्ष की शुरुआत में इसे घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया।
वहीं, 30 जून को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए विकास दर अब सिर्फ 0.29 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार 4 अरब डॉलर से नीचे गिर गया है, जो मुश्किल से एक महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।
डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार के पास लोकप्रिय बजट पेश करने के लिए पैसे नहीं हैं, ताकि उसे वोट हासिल हो पाए। वहीं, सरकार से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देवे के लिए किसी तरह के प्रोत्साहन की भी उम्मीद नहीं की जा सकती है।

पाकिस्तान बिजनेस काउंसिल (पीबीसी) के सीईओ एहसान मलिक ने कहा, कि शुल्कों और करों में कमी के जरिए कीमतें कम करने की सरकार की क्षमता सीमित है। ऐसा मुख्य रूप से इसलिए है, क्योंकि आवश्यक खाद्य पदार्थों पर करों और शुल्कों का आकार न्यूनतम है।
वहीं, टॉपलाइन सिक्योरिटीज के सीईओ मोहम्मद सोहेल ने कहा, कि बजट में उपभोक्ताओं के लिए कोई बड़ी राहत की संभावना नहीं है, क्योंकि सरकार के पास बहुत सीमित वित्तीय स्थान है।
उन्होंने कहा, कि रुपये-डॉलर की अनिश्चितता के बीच जिंस क्षेत्र में मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार रुपये को स्थिर कर सकती है और मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने में तभी मदद कर सकती है जब वह आईएमएफ से धन प्राप्त करने में सक्षम हो।
कराची होलसेलर्स ग्रॉसर्स एसोसिएशन (KWGA) के अध्यक्ष रऊफ इब्राहिम ने कहा, कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि बजट उपभोक्ताओं के अनुकूल होगा, क्योंकि सरकार IMF के दबाव में टैक्स को बढ़ाने के दबाव में है। उन्होंने कहा, "सरकार निश्चित रूप से आईएमएफ के दबाव के आगे झुक जाएगी।"












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