जानिए क्या है हवाना सिंड्रोम, जिसने कमला हैरिस की वियतनाम यात्रा में बाधा डाली ?
हनोई, 26 अगस्त: अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की वियतनाम यात्रा बुधवार को 'स्वास्थ्य संबंधी असमान्य घटना' की वजह से बाधित हो गई। उन्हें सिंगापुर से वियतनाम पहुंचना था, लेकिन इस 'अज्ञात बीमारी' के चलते उनकी फ्लाइट तीन घंटे की देरी से पहुंची। अमेरिकी दूतावास के मुताबिक स्वास्थ्य से जुड़ी यह विषम घटना वियतनाम की राजधानी हनोई में हुई। 'स्वास्थ्य संबंधी असमान्य घटना' या एनोमेलस हेल्थ इंसिडेंट को कथित 'हवाना सिंड्रोम' नाम की मनोवैज्ञानिक बीमारी के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कई देशों के अमेरिकी राजनयिक पीड़ित हो चुके हैं। 'हवाना सिंड्रोम' का पहला वाक्या 2016 में क्यूबा में सामने आया था, जिसके बाद चीन में भी इसका केस मिला था। इसलिए इसका नाम क्यूबा की राजधानी हवाना पर पड़ा है। तब से लेकर डॉक्टर और वैज्ञानिक इसकी वजहों का पता लगाने में जुटे हैं, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं।

'हवाना सिंड्रोम' के लक्षण क्या हैं ?
जैसा कि ऊपर जिक्र किया कि अमेरिकी सरकार 'हवाना सिंड्रोम' के लिए 'स्वास्थ्य संबंधी असमान्य घटना' का इस्तेमाल करती है। इससे पीड़ित हुए लोगों ने जो इसके लक्षण बताए हैं, उसमें उन्हें बहुत ही चुभने वाली बहुत तीखी आवाज सुनाई पड़ती है और चेहरे पर बहुत ही ज्यादा दबाव महसूस होता है। कई बार इसके बाद दर्द,नाख से खून आना, माइग्रेन, मिचली और चक्कर आने की समस्या देखी गई है। जर्मनी, ऑस्ट्रिया, रूस और चीन में काम करने वाले कई अमेरिकियों ने इस अजीब स्वास्थ्य समस्या की शिकायत की है। जब कमला हैरिस का विमान हनोई पहुंचने में लेट हो रहा था, तो अमेरिका में व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी जेन पास्की ने 25 अगस्त को कहा, '(अमेरिकी अधिकारी) हवाना सिंड्रोम की किसी भी घटना को गंभीरता से लेते हैं।'

हवाना सिंड्रोम क्या है ?
क्यूबा में अमेरिकी राजनयिकों और उनके परिवार वालों ने जो रात में चुभन वाली तेज आवाज सुनने के बाद नाक से खून आने, माइग्रेन और जी मिचलाने की शिकायत की थी, उसके पांच साल बाद भी अमेरिकी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है कि इसका असल कारण क्या है। जबकि, उसके बाद से कई अमेरिकी अधिकारियों ने चीन, रूस और यहां तक कि अमेरिका के अंदर भी अपने साथ हुए इस तरह की स्वास्थ्य परेशानियों की जानकारी दे चुके हैं। इस समस्या को लेकर यह भी आरोप लगे हैं कि रूस या कोई और देश अमेरिकी राजनयिकों को नुकसान पहुंचाने के लिए सोनिक या दूसरी हाई इंटेंसिटी वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे कि अंदरूनी शारीरिक क्षति पहुंचाई जा सके। हालांकि, इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई है। पिछले साल नवंबर में व्हाइट हाउस के पास भी एक अधिकारी ने सिर चकराने की शिकायत की थी और उंगली रूसी खुफिया एजेंसियों की ओर उठी थी, लेकिन रूस इससे हमेशा इनकार करता रहा है।

हवाना सिंड्रोम की जांच में क्या पता चला है ?
वैसे जांच के आधार पर अभी तक वैज्ञानिक या सरकारी अधिकारी निश्चित तौर पर यह कहने की स्थिति में नहीं हैं कि इन हमलों के पीछे कौन है और क्या इसके लक्षण सर्विलांस उपकरणों की वजह से ही पैदा होते हैं ? एक प्रमुख विश्लेषण में एक खास रेडियो फ्रिक्वेंसी एनर्जी को इसके सबसे प्रभावी कारण होने की ओर इशारा किया गया है। पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित नेशनल एकैडमी ऑफ साइंसेज के मुताबिक रेडियो फ्रिक्वेंसी अटैक से दिमाग के काम करने पर असर डाला जा सकता है, जिसमें कोई खास स्ट्रक्चरल डैमेज भी नहीं दिखाई पड़ सकता है। हालांकि, इसने भी इसे ठोस वजह होने का दावा नहीं किया है। कुल मिलाकर इसके कारणों के ठोस प्रमाण अभी तक अज्ञात हैं।

हवाना सिंड्रोम की जांच को लेकर अमेरिका है बहुत ही गंभीर
अमेरिकी संसद हवाना सिंड्रोम से जुड़े हमले को लेकर बहुत ही गंभीर रहा है और दोनों सदनों में इसकी जांच को लेकर व्यापक समर्थन देखा गया है। लेकिन, दिक्कत ये है कि हवाना सिंड्रोम के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं और जो बाइडेन सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। मई में अमेरिकी सीनेटरों ने कहा था कि सरकार रहस्यमयी डायरेक्टेड एनर्जी अटैक की जांच कर रही है। अमेरिका के डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस एवरिल और सीआईए के डायरेक्टर बिल बर्न्स भी एनर्जी अटैक से जुड़ी इन घटनाओं की तहकीकात में जुटे हैं। अमेरिका में इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी से लगता है कि सीआईए ने हाल में हवाना सिंड्रोम की जांच के लिए बनी टास्क फोर्स के लिए जिन्हें नया डायरेक्टर नियुक्त किया है, वह ओसामा बिन लादेन का पता लगाने में अंडरकवर ऑफिसर के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
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