एमाइलॉयडोसिस बीमारी क्या है? जिससे पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ पीड़ित हैं
मुशर्रफ के परिवार ने उनकी स्थिति के बारे में एक बयान में कहा कि, ‘वह वेंटिलेटर पर नहीं हैं। अपनी बीमारी (एमाइलॉयडोसिस) की जटिलता के कारण पिछले 3 हफ्ते से अस्पताल में भर्ती हैं’।
इस्लामाबाद, जून 11: शुक्रवार शाम पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ की मौत की खबर भारत और पाकिस्तान में वायरल होने लगी और कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाने लगा, कि पाकिस्तान के पूर्व जनरल और राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ की मौत हो गई। हालांकि, बाद में उनके परिवार की तरफ से उनकी मौत की खबर को अफवाह बताया गया, लेकिन कहा गया, कि पूर्व जनरल की तबीयत गंभीर है और वो एमाइलॉयडोसिस नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।

एमाइलॉयडोसिस से जूझ रहे मुशर्रफ
मुशर्रफ के परिवार ने उनकी स्थिति के बारे में एक बयान में कहा कि, 'वह वेंटिलेटर पर नहीं हैं। अपनी बीमारी (एमाइलॉयडोसिस) की जटिलता के कारण पिछले 3 हफ्ते से अस्पताल में भर्ती हैं'। परिवार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि, मुशर्रफ अब जिस स्थिति से गुजर रहे हैं, वहां से उनकी वापसी संभव नहीं है और उनके अंग खराब हो रहे हैं। कृपया, उनके जीवन के लिए प्रार्थना करें'। आईये जानते हैं, अमाइलॉइडोसिस बीमारी क्या है, इसके कारण और उपचार के तरीकों पर एक नजर डालते हैं।

एमाइलॉयडोसिस क्या है?
एमाइलॉयडोसिस एक दुर्लभ बीमारी है, जो तब होती है जब एक असामान्य प्रोटीन, जिसे अमाइलॉइड कहा जाता है, किसी के अंगों में बन जाता है, जो उस अंग के आकार और कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। अमाइलॉइड प्रोटीम, किसी इंसान के हृदय, मस्तिष्क, गुर्दे, प्लीहा और शरीर के अन्य भागों में जमा हो सकता है, जिससे अंग नाकाम होने की स्थिति में आ जाते हैं और इंसान की मौत भी हो सकती है। एमाइलॉयड प्रोटीन सामान्य रूप से शरीर में नहीं पाया जाता है, लेकिन इसे कई अलग-अलग प्रकार के प्रोटीन से बनाया जा सकता है।

शरीर के अंग हो जाते हैं नाकाम
एमाइलॉयडोसिस की कुछ किस्में अन्य बीमारियों के साथ मिलकर होती हैं। हालांकि, इस बीमारी के कुछ लक्षणों का इलाज के जरिए सुधार हो सकता है। एमाइलॉयडोसिस की कुछ किस्में जीवन के लिए खतरा अंग विफलता का कारण बन सकती हैं। एमाइलॉयडोसिस इंसानी शरीर के लिए एक सेकेंड्री बीमारी की तरह होता है, लेकिन कभी कभी एमाइलॉयडोसिस प्राइमरी बीमारी के तौर पर भी विकसित हो जाती है। कभी-कभी, यह जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है, लेकिन आमतौर पर, अमाइलॉइडोसिस बीमारी की वजह अज्ञात रहता है।

एमाइलॉयडोसिस का कारण क्या है?
कई अलग-अलग प्रोटीन अमाइलॉइड जमा कर सकते हैं, लेकिन ये कुछ प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। प्रोटीन का प्रकार और यह कहां एकत्र होता है, यह बताता है कि व्यक्ति को किस प्रकार का एमाइलॉयडोसिस है। एमाइलॉइड पूरे शरीर में या सिर्फ एक क्षेत्र में जमा हो सकता है। इसके अलावा, जबकि कुछ किस्में वंशानुगत होती हैं, अन्य बाहरी कारकों के कारण होती हैं, जैसे कि सूजन संबंधी बीमारियां या फिर लंबे वक्त से चला आ रहा डायलिसिस।

एमाइलॉयडोसिस के लक्षण
एमाइलॉयडोसिस के लक्षण अक्सर सूक्ष्म होते हैं और यह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर में एमाइलॉइड प्रोटीन कहां जमा हो रहा है। जैसे-जैसे एमाइलॉइडोसिस बढ़ता है, एमाइलॉइड का जमाव हृदय, लीवर, प्लीहा, गुर्दे, पाचन तंत्र, मस्तिष्क या तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इस बीमारी से ग्रसित मरीजों में गंभीर थकान, वजन कम होना, पेट, टांगों, टखनों या पैरों में सूजन, स्तब्ध हो जाना, दर्द या हाथ या पैर में झुनझुनी, त्वचा के रंग में परिवर्तन, आंखों के आसपास की त्वचा के बैंगनी धब्बे (पुरपुरा) या चोट के निशान वाले क्षेत्र, चोट लगने के बाद सामान्य से अधिक खून बहना, जीभ की सूजन और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

एमाइलॉयडोसिस बीमारी का इलाज
इस बीमारी का पता लगाने के लिए मरीजों के शरीर के अंदरूनी अंगों का इलाज करने के लए इमेजिंग प्रक्रियाएं, जैसे कि इकोकार्डियोग्राम, न्यूक्लियर चेस्ट टेस्ट या लीवर अल्ट्रासाउंड किया जाता है। एक बार इस बीमारी का पता लगने के बाद एमाइलॉइडोसिस को इलाज के जरिए धीमा किया जा सकता है और इसके लक्षणों को कम करके रोगियों को कुछ समय के लिए मौत से बचाया जा सकता है। हालांकि, वास्तविक इलाज इस बात पर निर्भर करता है, कि व्यक्ति को किस प्रकार का एमाइलॉयडोसिस है। कीमोथेरेपी भी इसके उपचार का एक तरीका है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जा सकता है। वहीं, कुछ दवाएं भी एमाइलॉयडोसिस वाले लोगों में असामान्य प्रोटीन बनाने वाली कोशिकाओं के विकास को भी रोक सकती हैं।












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