यूक्रेन युद्ध के बीच अगर अचानक राष्ट्रपति पुतिन की मौत हो जाए तो क्या होगा?
आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूस की स्थिति बिगड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिसने रूसी कारोबारियों में चिंता भी है, लेकिन पुतिन ने प्रतिबंधों की वजह से आर्थिक स्थिति बिगड़ने की किसी भी आशंका को खारिज कर दिया है...
मॉस्को/कीव, सितंबर 13: हाल के महीनों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के स्वास्थ्य को लेकर बहुत अटकलें लगाई गईं हैं और कई रिपोर्ट्स में दावे किए गये हैं, कि राष्ट्रपति पुतिन कैंसर जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारी से पीड़ित हैं और उन्हें पार्किंसन जैसी घातक बीमारी भी है। यहां तक की रूसी राष्ट्रपति की जान लेने की भी कोशिश की गई, जिसमें वो बट गये। हालांकि, अभी तक उनके कैंसर के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन क्या होगा अगर कैंसर का दावा सही हो और युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति की अचानक मौत हो जाए?

अगर चली जाए राष्ट्रपति पुतिन की जान?
राजनीतिक विश्लेषक तातियाना स्टानोवाया ने अल जज़ीरा को बताया कि, "वह चाहें तो 10 साल या उससे भी ज्यादा दिनों तक लगातार सत्ता में बने रह सकते हैं और यह वास्तव में परिस्थितियों पर निर्भर करता है।" उन्होंने कहा कि, "मैं वास्तव में उनके स्वास्थ्य की समस्या पर ज्यादा ध्यान नहीं दूंगा।" क्या 69 वर्षीय राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाती है या अन्यथा अचानक वो कार्यालय छोड़ने की घोषणा कर देते हैं तो फिर क्या होगा? रूसी नियमों के मुताबिक, ऐसा होने पर रूस की फेडरेशन काउंसिल के पास राष्ट्रपति चुनाव बुलाने के लिए 14 दिन होते हैं और यदि ऐसा नहीं होता है, तो केंद्रीय चुनाव आयोग चुनाव बुलाने का फैसला करेगा। और इस बीच प्रधानमंत्री के हाथ में राष्ट्रपति का कार्यभार ऑटोमेटिक आ जाएगा। अगर राष्ट्रपति पुतिन की मौत होती है या फिर वो गद्दी छोड़ देते हैं, तो ऐसी स्थिति में फौरन प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तीन कार्यवाहक राष्ट्रपति बनेंगे। हालांकि, मिशुस्तीन को न तो पुतिन के खास करीबी के रूप में देखा जाता है और न ही किसी चुनाव के लिए एक विश्वसनीय जिताऊ उम्मीदवार के रूप में देखा जाता है।

पुतिन के जाने से होगा बड़ा नुकसान
राजनीतिक विश्लेषक स्टैनोवाया का मानना है कि, राष्ट्रपति पुतिन के जाने से रूस की व्यावसायिक हितों, सुरक्षा अधिकारियों जैसे रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और रूसी अभिजात वर्ग के अन्य गुटों के बीच एक पावर वैक्यूम उत्पन्न हो जाएगा। हालांकि, स्टैनोवाया कहते हैं कि, अगर उन्हें कल को कुछ हो भी जाता है (युद्ध के बीच में) तो फिर भी रूस का सिस्टम काफी मजदूत है और उसे नुकसान नहीं पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि, "रूढ़िवादी ताकतें, जैसे सिलोविकी [सुरक्षा अधिकारी] राजनीतिक पहल को जब्त कर लेंगे और इसे संभाल लेंगे। लेकिन अगर बाद में पुतिन को कुछ होता है, (एक साल या उससे अधिक समय में) तो इस मामले में, अस्थिरता के जोखिम बहुत अधिक हो सकते हैं। और ऐसी स्थिति में हम देश में अंतर्कलह देखे सकते हैं और सिलोविची के पास पहल करने की बहुत कम संभावना होगी। अगले साल स्थिति और अधिक भिन्न और कठिन हो सकती है।" स्वतंत्र रूसी मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्टों के अनुसार, रूसी अभिजात वर्ग के सदस्य आश्चर्यचकित थे और चिंतित महसूस कर रहे थे जब पुतिन ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण की घोषणा की थी और ''सैन्य अभियान" को एक आवश्यक कदम घोषित किया था।

कौन होगा अगला राष्ट्रपति?
हालांकि, आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूस की स्थिति बिगड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिसने रूसी कारोबारियों में चिंता भी है, लेकिन पुतिन ने प्रतिबंधों की वजह से आर्थिक स्थिति बिगड़ने की किसी भी आशंका को खारिज कर दिया, हालांकि रूस के अंदर भी यूक्रेन युद्ध में जिस तरह से रूसी सेना फंसी है, और रूस को जितना नुकसान हुआ है, उसके लिए पुतिन की जमकर आलोचना भी की जा रही है। कुछ आलोचकों का तो ये भी कहना है, कि पुतिन सक्रिय होकर युद्ध लड़ ही नहीं रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, क्रेमलिन के कुछ अंदरूनी सूत्र चुपचाप चर्चा कर रहे हैं कि पुतिन के बाद कौन आ सकता है। लेकिन स्टैनोवाया ने कहा कि ऐसी बात गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि, "वास्तव में कोई नहीं जानता [अगला कौन होगा]," स्टैनोवाया ने कहा कि, "उदाहरण के लिए अगर कोई मेदवेदेव को उत्तराधिकारी लिखना शुरू कर देता है, तो इसे मेदवेदेव पर राजनीतिक हमले के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि, कोई भी उत्तराधिकारी बनकर सामने नहीं आना चाहता है, क्योंकि यह आपकी स्थिति को और अधिक कमजोर बनाता है।"

क्या जल्द हो सकती है पुतिन की विदाई?
सुरक्षा विशेषज्ञ मार्क गेलोटी ने अल जज़ीरा को बताया कि, "पुतिन को जल्द ही जाते हुए देखना ईमानदारी से कहूं तो, काफी कठिन है। बीमारी की सभी कहानियों के बीच इस बात का कोई सबूत नहीं है, कि वह गंभीर रूप से बीमार हैं, और यह देखते हुए कि युद्ध कितना विनाशकारी हो गया है, मैं उन्हें तब तक रिटायर्ड होते नहीं देख रहा, जब तक कि उन्हें अपने आसपास के लोगों द्वारा ऐसा करने के लिए मजबूर न किया जाए''। उन्होंने भी कहा कि,"कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं हैं और कोई ऐसी गलती नहीं करना चाहेगा, कि वो खुद को उत्तराधिकारी के तौर पर प्रोजेक्ट हो और किसी ऐसे पद के लिए ऑडिशन दे रहा हो, जो अभी खाली भी नहीं हुआ है।" व्लादिमीर पुतिन पिछले 20 सालों से ज्यादा वक्त से रूसी राजनीति में शीर्ष पर हैं और 2000 से 2008 तक और फिर 2012 से वर्तमान समय तक राष्ट्रपति पद पर विराजमान हैं। राष्ट्रपति बने रहने के लिए वो संविधान संशोधन कर चुके हैं, जिसके मुताबिक एक व्यक्ति के लिए दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति बनने पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन पुतिन ने उसे बदल दिया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ऐसा कर चुके हैं।

स्टालिन से भी आगे निकले पुतिन
कुल मिलाकर देखा जाए तो 69 वर्षीय राजनेता व्लादिमीर पुतिन, जिन्होंने फरवरी के अंत में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को एक आवश्यक "विशेष सैन्य अभियान" के रूप में घोषित किया था, उन्होंने सोवियत नेता लियोनिद ब्रेज़नेव की तरफ बतौर राष्ट्रपति 18 साल तक राष्ट्रपति रहने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। वहीं, अगर आप मेदवेदेव के समय के कार्यकाल को भी शामिल कर लेते हैं, जब पुतिन प्रधानमंत्री बन गये और अपने प्यादे मेदवेदेव को राष्ट्रपति बना दिया था, तो पुतिन ने रूस पर सबसे लंबे समय तक शासन किया, जोसफ स्टालिन के सत्ता में रहने के रिकॉर्ड को उन्होंने पीछे छोड़ दिया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 2024 में समाप्त होने वाला है। हालांकि, जब साल 2020 में उन्होंने संविधान को बदला था, जिससे उन्हें 2036 तक दो और छह साल के कार्यकाल के लिए चलने की अनुमति मिल चुकी है, तब तक वो 86 साल के हो चुके होंगे। स्टैनोवाया के अनुसार, यदि अर्थव्यवस्था विफल होती रहती है और सार्वजनिक असंतोष बढ़ता है, तो दूसरा गुट बागडोर को जब्त करने का प्रयास कर सकता है। लेकिन, स्वतंत्र पत्रकार फरीदा रुस्तमोवा, जो रूसी राजनीति और क्रेमलिन साजिश को कवर करती हैं, ऐसी भविष्यवाणियों के खिलाफ चेतावनी देती हैं।

फरीदा रुस्तमोवा की क्या है चेतावनी
फरीदा रुस्तमोवा ने अलजजीरा को कहा कि, "राष्ट्रपति की मृत्यु के मामले में, मृत्यु के फौरन बात सारे कर्तव् और अधिकार प्रधानमंत्री के पास आ जाते हैं। तो क्या मिशुस्टिन सत्ता पर काबिज होने की कोशिश करेंगे''? उन्होंने कहा कि, हमारे पास बताने का कोई तरीका नहीं है।" उन्होंने अल जज़ीरा को फोन पर बताया कि, "हम इन चीजों के बारे में संक्षेप में बात कर सकते हैं, लेकिन किसी भी तरह से हमें इन विचारों पर किसी तरह के पूर्वानुमान के रूप में भरोसा नहीं करना चाहिए। सत्तावादी देशों के बारे में भविष्यवाणी करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि हम नहीं जानते कि क्या होगा। रूस में कोई वैकल्पिक राजनीतिक ताकत नहीं है, जिसके बारे में हम बात कर सकते हैं या फिर एक या दूसरा गुट क्या करेगा।"

पुतिन के लिए ब्रेन वॉशिंग का काम
उन्होंने कहा कि, पुतिन का विरोध करने वाले "केवल कल्पना कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि, रूस में यह ब्रेनवाशिंग का काम काफी कम उम्र से चलता। केवल ऊपर से नीचे तक सुधार हो सकते हैं, क्योंकि पुतिन की प्रणाली बहुत लंबे समय से मौजूद है, इसने पूरी पीढ़ी को 20 साल पहले ही क्या करना है, ये सिखा जिया है। वहीं, रूस में मौजूदा विपक्ष के पुतिन के बाद का कोई भी चुनाव जीतने की संभावना नहीं है, क्योंकि सरकार ने पिछले 20 वर्षों में किसी भी विकल्प पर ध्यान नहीं दिया है।












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