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TikTok के बिना भी जी सकते हो, भारत से सीखो... अमेरिकी मीडिया ने हिंदुस्तान से दी सीख लेने की नसीहत

TikTok News: संयुक्त राज्य अमेरिका में बहुत जल्द टिकटॉक पर प्रतिबंध लगने वाला है, लेकिन देश की एक बड़ी आबादी, जो चीनी सोशल मीडिया की लत के गिरफ्त में है, वो टिकटॉक पर प्रतिबंध लगने से पहले टेंशन में है, कि बगैर टिकटॉक उनका क्या होगा।

ऐसे में अमेरिकी मीडिया को भारत की याद आई है और CNN ने अमेरिका के लोगों को भारत से सीख लेने की नसीहत देते हुए कहा है, कि भारत ने सालों पहले अचानक टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा दिया था, फिर भी भारत पर कोई फर्क नहीं पड़ा था, लिहाजा अमेरिका के लोगों को भारत से सीख लेने की जरूरत है।

TikTok ban in america

बुधवार को, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक विधेयक पारित किया है, जिससे देश भर में टिकटॉक पर प्रतिबंध लग सकता है। हालांकि, चीनी स्वामित्व वाला ऐप अमेरिकियों के फोन से जल्द ही गायब नहीं हो रहा है, लेकिन देश में इसके 17 करोड़ यूजर्स काफी परेशान हैं।

CNN ने लोगों को सलाह देते हुए कहा है, कि टिकटॉक के बिना भी जिंदगी चल सकती है, टिकटॉक के बिना भी लोगों का अस्तित्व है और ऐसा कैसे हो सकता है, वो दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश से पूछा जा सकता है।

मोदी सरकार ने अचानक लगाया था प्रतिबंध

जून 2020 में, भारत-चीन सीमा पर हिंसक झड़प के बाद, मोदी सरकार ने अचानक टिकटॉक और कई अन्य प्रसिद्ध चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था।

टेक वेबसाइट मीडियानामा के दिल्ली स्थित संस्थापक निखिल पाहवा ने सीएनएम से कहा, "यह याद रखना महत्वपूर्ण है, कि जब भारत ने टिकटॉक और कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था, तो अमेरिका इस फैसले की सराहना करने वाला पहला देश था।"

उन्होंने कहा, कि तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने प्रतिबंध का स्वागत करते हुए कहा था, कि इससे "भारत की संप्रभुता को बढ़ावा मिलेगा।"

मोदी सरकार के इस फैसले ने भारत के करीब 20 करोड़ टिकटॉक यूजर्स को चौंका दिया था, लेकिन अब चार सालों के बाद भारतीय यूजर्स के पास कई विकल्प हैं और लोग अलग अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना हूनर दिखा रहे हैं।

पाहवा ने कहा, "टिकटॉक पर प्रतिबंध से अरबों डॉलर का अवसर पैदा हुआ... 20 करोड़ यूजर्स को किसी और प्लेटफॉर्म की जरूरत थी और ऐसे में कई अमेरिकी कंपनियों ने भारत में बने नये अवसर का लाभ उठाया।"

टिकटॉक के बिना जिंदगी

हालांकि, मोदी सरकार ने एक झटके में जरूर टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन इसके यूजर्स के लिए ये किसी सदमे से कम नहीं था। 2020 तक, टिकटॉक उन भारतीयों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया था, जो सख्त कोविड लॉकडाउन से गुजर रहे थे।

बेंगलुरु स्थित इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विरालो के प्रोडक्ट हेड सप्तर्षि रे ने कहा, कि "भारत में हर कोई बॉलीवुड स्टार बनना चाहता है और टिकटॉक ने छोटे शहरों के लोगों सहित सैकड़ों लोगों को रातोंरात स्टार बनाकर उस सपने को संभव बना दिया था। लेकिन उनकी रचनात्मकता और व्यावसायिक उद्यमों के लिए अन्य रास्ते सामने आने में ज्यादा समय नहीं लगा।"

TikTok ban in america

टिकटॉक पर बैन के बाद अमेरिकी तकनीकी दिग्गजों और घरेलू स्टार्टअप के बीच एक भयंकर लड़ाई शुरू हो गई। प्रतिबंध के एक हफ्ते के भीतर, मेटा के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम ने भारत में अपना टिकटॉक कॉपीकैट, इंस्टाग्राम रील्स लॉन्च करके इसका जबरदस्त फायदा उठाया। वहीं, Google ने भी अपनी शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube शॉर्ट्स भारतीय बाजार में उतार दिया।

एमएक्स टाका टाक और मोज जैसे घरेलू प्लेटफॉर्म की भी लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ और उनका कारोबार भी कई गुना बढ़ गया।

परामर्श फर्म ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के स्वतंत्र निष्कर्षों का हवाला देते हुए, Google के एक प्रवक्ता ने कहा, कि "यूट्यूब क्रिएटिव इकोसिस्टम" ने 2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 2 अरब डॉलर का योगदान दिया।

सप्तर्षि रे के मुताबिक, भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स ने टिकटॉक के लिए शूट किए गए सभी पुराने कंटेंट को तेजी से इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स में ट्रांसफर किया। उन्होंने कहा, "कुछ इंन्फ्लुएंसर ने हरदिन सात रीलें अपलोड कर रहे थे और हरस साल 40 से 50 लाख यूजर्स को अपने अकाउंट के साथ जोड़ रहे थे।"

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टिकटॉक से खतरे में लोगों की सुरक्षा

अमेरिकी अधिकारियों और सांसदों ने लंबे समय से चिंता जताई है, कि चीनी सरकार टिकटॉक की मूल कंपनी बाइटडांस को अमेरिकी यूजर्स से जुटाए गए डेटा को सौंपने के लिए मजबूर कर सकती है।

हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है, कि टिकटॉक को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं काफी हद तक काल्पनिक हैं। वहीं, भारतीय विशेषज्ञों का कहना है, कि राष्ट्रीय डिजिटल जीवन से सुरक्षा हासिल करने का अभी भी ठोस विकल्प नहीं मिला है।

अमेरिकी सांसदों को यह भी डर है, कि टिकटॉक ऐप बीजिंग के लिए प्रोपेगेंडा फैलाने और अमेरिकी नागरिकों को प्रभावित करने के लिए एक उपकरण के रूप में काम कर सकता है। लिहाजा, अमेरिका में अब बहुत जल्द भारत की तरह की टिकटॉक पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

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