प्यार आपके दिमाग पर क्या असर डालता है? रिसर्च में पहली बार पता चलीं हैरान करने वाली बातें

प्यार के भी कई तरह के प्रकार होते हैं। प्यार के अन्य रूपों में, जैसे मां-बाप से प्यार, दोस्त से प्यार, भाई-बहन से प्यार...हर स्थिति में मस्तिष्क की प्रतिक्रिया अलग अलग होती है।

LOVE

Love Research: कहते हैं, प्यार दिल से होता है और लाखों शायरी और कविताएं प्यार को लेकर लिखी गईं हैं और कही गई हैं। जब से धरती पर इंसान आए हैं, प्यार उसी दिन से एक खुशनुमा अहसास रहा है और प्यार में पड़ने का मतलब किसी का आपका दिल छूना होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं, कि प्यार आपके दिमाग के साथ क्या करता है? प्यार होने के बाद इंसानों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है? अगर नहीं जानते हैं, तो आइये समझते हैं, कि प्यार को लेकर जो नया रिसर्च किया गया है, उसमें किन बातों का पता चला है।

प्यार में पड़ने पर क्या होता है?

प्यार में पड़ने पर क्या होता है?

रिसर्च में पता चला है कि, प्यार में पड़ने के साथ ही हमारे दिमाग में प्रतिक्रियाएं शुरू हो जाती हैं और हमारे ब्रेन से रसायनों का रिसाव शुरू होने लगता है। बाल्टीमोर में जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में न्यूरोसाइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ गुल डोलेन ने प्यार की वजह से दिमाग पर पड़ने वाले असर के बारे में बात की है। प्रोफेसर डॉ गुल डोलेन के मुताबिक, प्यार होने के बाद हमारे दिमाग का जो हिस्सा सक्रिय होता है, उसका नाम है, हाइपोथैलेमस है। यह बादाम के आकार का होता है और इस क्षेत्र का काम हमारे मस्तिष्क के भीतर गहरे मल्टी फंक्शनल क्षेत्र से हार्मोन ऑक्सीटोसिन जारी करना है, या जिसे प्रोफेसर डोलेन "प्रेम रसायन" कहते हैं।

प्रेम रसायन से प्यार को बढ़ावा

प्रेम रसायन से प्यार को बढ़ावा

ऑक्सीटोसिन रसायन, एक विशेष हार्मोन है, जो स्पेशल बॉन्डिंग को बढ़ावा देता है। यह रसायन, हाइपोथैलेमस में कोशिकाओं द्वारा पिट्यूटरी ग्रंथि में बच्चे के जन्म, स्तनपान, कामोन्माद और आलिंगन के दौरान जारी किया जाता है, जहां इसे बाद में उपयोग के लिए संग्रहीत किया जाता है। डोलेन ने कहा कि, "सबसे पहले हमें स्पष्ट होना चाहिए, कि प्यार से हमारा क्या मतलब है?" उन्होंने कहा कि, "हमारे पास अंग्रेजी में एक शब्द है। यूनानियों के पास अलग-अलग तरह के प्यार के लिए छह शब्द थे।" हमारे पास सेक्स से लेकर दोस्ती के लिए और मानवता तक के लिए अलग अलग शब्द हैं, इसीलिए प्यार को सिर्फ एक शब्द तक सीमित नहीं रखना चाहिए।

कितने तरह के होते हैं प्यार?

कितने तरह के होते हैं प्यार?

प्रोफेसर डॉ गुल डोलेन के मुताबिक, सभी प्यार मस्तिष्क में एक जैसे नहीं दिखते हैं और विभिन्न प्रकार के प्यार, जैसे कि रोमांटिक प्यार, माता-पिता से होने वाला प्यार या दोस्त-से-दोस्त के बीच का स्नेह, ये सभी अलग अलग तरह के प्यार हैं और मस्तिष्क में इनके लिए अलग-अलग ताकत उत्पन्न होते हैं। हालांकि, इन सभी भावनाओं में कुछ हद तक एक ही मस्तिष्क रसायन शामिल है, लेकिन वे सभी एक ही न्यूरॉन्स या मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं से उत्पन्न नहीं होते हैं। प्रोफेसर डोलेन और उनके सहयोगियों के मुताबिक, रोमांटिक प्रेम, मस्तिष्क हाइपोथैलेमस में मैग्नोसेलुलर, या बड़े, न्यूरॉन्स से आता है, जबकि प्यार के बाकी प्रकारों में रसायन, मस्तिष्क के परवोसेलुलर या छोटे न्यूरॉन्स से आता है। प्रोफेसर डोलेन का ये रिसर्च न्यूरॉन जर्नल में पब्लिश किया गया है, जिसमें कहा गया है कि, रोमांटिक प्रेम के दौरान मस्तिष्क से निकलने वाला रसायन जो व्यवहर करता है, वो आपकी इंद्रियों पर हावी हो जाता है।

प्यार में निकलते हैं ऑक्सीटोसिन

प्यार में निकलते हैं ऑक्सीटोसिन

प्रोफेसर डोलेन ने कहा कि, "इनके आकार काफी मायने रखता है।" उन्होंने कहा कि, प्यार में पड़ने से मैग्नोसेलुलर न्यूरॉन्स में ऑक्सीटोसिन के 60,000 से 85,000 अणु रिलीज होते हैं। यह छोटे न्यूरॉन्स की तुलना में, यानि जो दूसरे भावनात्मक प्यार होते हैं, उनसे काफी ज्यादा है। भावनात्मक प्यार के दौरान 7,000 से 10,000 अणु निकलते हैं। एक बार ये रसायन जारी होने के बाद रोमांटिक प्रेम और रोमाटिंग बॉन्डिंग, ऑक्सीटोसिन अणु अलग तरह से काम करते हैं। जब ऑक्सीटोसिन मैग्नोसेलुलर न्यूरॉन्स (रोमांटिक लव ऑक्सीटोसिन कोशिकाओं) को छोड़ देता है, तो यह शरीर के अंदर ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ा देता है और इस दौरान cerebrospinal fluid का अत्यधिक मात्रा में प्रवाह होता है, जिससे पूरा मस्तिष्क भींग जाता है।

प्यार के रसायन से शरीर पर प्रतिक्रियाएं

प्यार के रसायन से शरीर पर प्रतिक्रियाएं

इस प्रक्रिया के दौरान महिलाओं के शरीर के कई ग्रंथियां, जैसे गर्भाशय, स्तन अपन आप सक्रिय हो जाते हैं। इस दौरान शरीर के अंदर कई तरह की दूसरी प्रतिक्रियाएं भी होती हैं, जैसे शरीर का तनाव खत्म हो जाता है और लगाव के साथ साथ उत्साह की भावनाएं प्रबल हो जाती हैं। डोलेन ने कहा कि, "प्यार का रसायन पूरे मस्तिष्क में भर जाता है। यही कारण है कि सब कुछ गुलाब मय लगता है, और आप ध्यान भी नहीं देते हैं, कि आप अभी शौचालय की सीट पर बैठे हैं।"

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