फ्रांस में इमैनुएल मैक्रों की गृह युद्ध की भविष्यवाणी सच साबित? दक्षिणपंथी पार्टी की जीत के बाद भीषण प्रदर्शन

France election Civil War: फ्रांस संसदीय चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टी की जीत के बाद भीषण प्रदर्शन शुरू हो गये हैं और अब सवाल उठ रहे हैं, कि क्या राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नेशनल पार्टी (NR) की जीत के बाद गृहपुद्ध को लेकर जो भविष्यवाणी जताई थी, क्या वो सच साबित हो गई है?

रविवार शाम को फ्रांस की राजधानी पेरिस में सैकड़ों प्रदर्शनकारी संसदीय चुनाव के पहले राउंड के शुरुआती नतीजों के बाद जमा हो गये। पहले राउंड के चुनावी रिजल्ट में मरीन ले पेन की नेशनल पार्टी (NR) को भारी बढ़त मिल गई है और उसे विजेता बताया गया है।

France election Civil War

चुनावी नतीजों के ऐलान के बाद प्रदर्शनकारियों ने पेरिस में शहर की सड़कों पर मार्च करते हुए आगजनी शुरू कर दी, जिसके बाद पेरिस की सड़कों पर जगह जगह आग की लपटें उठती दिखाई दे रही हैं। वहीं, प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ते देखे जा रहे हैं।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पिछले हफ्ते की शुरुआत में चेतावनी दी थी, कि अगर दक्षिणपंथी पार्टी जीतती है, तो देश में गृहयुद्ध के हालात बन जाएंगे। मैक्रों ने पिछले महीने की शुरूआत में अचानक संसदीय चुनाव की घोषणा करते हुए चेतावनी दी थी, कि अगर देश में दक्षिणपंथी या वामपंथी पार्टियों को जीत मिलती है, तो देश में "गृह युद्ध" छिड़ सकता है।

क्या सच हुई मैक्रों की गृहयुद्ध की भविष्यवाणी?

इप्सोस, इफॉप, ओपिनियनवे और एलाबे के एग्जिट पोल के मुताबिक, फ्रांस में पहले राउंड के चुनाव में दक्षिणपंथी RN पार्टी को करीब 34% वोट मिलते दिख रहे हैं, जो राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर आई है।

इमैनुएल मैक्रों ने पिछले महीने की शुरुआत में यूरोपीय संसद के चुनावों में अपनी पार्टी को मिली भारी हार के बाद अचानक संसद को भंग करते हुए संसदीय चुनाव की घोषणा कर दी थी।

फ्रांस में दूसरे राउंड का चुनाव अगले हफ्ते होने वाले हैं और माना जा रहा है, कि दूसरे राउंड में भी RN पार्टी भारी बहुमत से जीत हासिल करने जा रही है। हालांकि, उससे पहले फ्रांस में राजनीतिक सौदेबाजी भी काफी तेज हो गई है, क्योंकि दूसरे नंबर पर लेफ्ट पार्टी आई है और अतीत में, सेंटर-राइट और सेंटर-लेफ्ट पार्टियों ने RN पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए मिलकर काम किया है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस के प्रधानमंत्री गेब्रियल अट्टल ने मतदाताओं से दूसरे चरण में अति दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया है।

जबकि नीले, सफेद और लाल रंग के फ्रांसीसी तिरंगे झंडे लहराते हुए उत्साहित भीड़ को संबोधित करते हुए RN पार्टी की प्रमुख मरीन ले पेन ने अपने समर्थकों और मतदाताओं से भारी वोट देने की अपील की है और ऐसे विचारधारा वाले मतदाताओं को अपनी तरफ मोड़ने की कोशिश की है, जिन्होंने पहले चरण में उनकी पार्टी को वोट नहीं किया है।

अगर दूसरे राउंड की वोटिंग में भी मरीन ले पेन की RN पार्टी जीत हासिल करती है, तो फिर फ्रांस में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री के चुनाव का रास्ता साफ हो सकता है। मरीन ले पेन ने सिर्फ 28 साल के जॉर्डन बार्डेला को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया हुआ है।

वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों ने पहले राउंड के चुनाव में अपनी पार्टी के तीसरे नंबर पर रहने के बाद बयान जारी करते हुए कहा है, कि वो 2027 में अपना कार्यकाल खत्म होने तक पद नहीं छोड़ेंगे।

दूसरे राउंड के मतदान को लेकर क्या उम्मीदें?

हालांकि, मतदान एजेंसियों के दसूरे राउंड अनुमानों में ली मरीन की पार्टी को इसी तरह का समर्थन मिलेगा, ये फिलहाल कहा नहीं जा सकता है, लेकिन कुछ मतदान एजेंसियों के अनुमानों ने संकेत दिया है, कि सुदूर दक्षिणपंथी NR पार्टी फिलहास सबसे अच्छी स्थिति में, नेशनल रैली और उसके सहयोगी सामूहिक रूप से 577 सीटों वाली नेशनल असेंबली में सुरक्षित बहुमत के लिए आवश्यक 289 सीटों के बार को पार कर सकते हैं।

इससे यूरोपीय वित्तीय बाज़ारों में हलचल मच सकती है, यूक्रेन के लिए पश्चिमी समर्थन और फ्रांस के परमाणु शस्त्रागार और वैश्विक सैन्य बल के प्रबंधन पर असर पड़ सकता है।

लेकिन, दूसरे राउंड में सुदूर दक्षिणपंथी NR पार्टी पीछे भी रह सकती हैं, क्योंकि किसी भी एक गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सकता है, ऐसा पोलिंग एजेंसियों ने अनुमान लगाया है।

दो-चरणीय मतदान प्रणाली के कारण पूर्वानुमान लगाना मुश्किल है, और क्योंकि पार्टियां कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन बनाने या अन्य से बाहर निकलने के लिए कई तरह के दांव भी लगा सकते हैं। पहले दौर के शुरुआती आधिकारिक परिणाम रविवार को बाद में आने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति मैक्रों ने क्यों खो दिया समर्थन?

फ्रांस के ज्यादातर मतदाता महंगाई और अन्य आर्थिक चिंताओं के साथ-साथ मैक्रों के नेतृत्व को लेकर भी निराश हैं, जिन्हें अहंकारी नेता के दौर पर देखा जाने लगा है। दक्षिणपंथी नेशनल रैली (NR) पार्टी ने उस असंतोष का फायदा उठाया है, खास तौर पर टिकटॉक जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए।

पेरिस में मतदाताओं के दिमाग में आव्रजन और महंगाई जैसे मुद्दे काफी अहम हो गये हैं, क्योंकि देश में दक्षिणपंथी और वामपंथी गुटों के बीच विभाजन बढ़ता जा रहा था, और राजनीतिक केंद्र में एक बेहद अलोकप्रिय और कमजोर राष्ट्रपति को देखा जा रहा है। इसके अलावा, चुनाव कैम्पेनिंग के दौरान नफरती भाषा भी काफी तेज हो गई है।

मैक्रों ने समय से पहले अचानक चुनाव कराने का आह्वान किया था, क्योंकि जून में यूरोपीय संसद के चुनाव में उनकी पार्टी को नेशनल रैली से हार का सामना करना पड़ा था।

नेशनल रैली का नस्लवाद और यहूदी-विरोधी विचारधारा से ऐतिहासिक संबंध रहा है और उसने फ्रांस में मुस्लिम समुदाय की तरफ से किए गये दंगों को अपने चुनावी कैम्पेन का हिस्सा बनाया है। पिछले साल पेरिस ने भीषण दंगे देखे थे और देश में आपातकाल लागू करने की नौबत आ गई थी। फ्रांस ने पिछले कुछ सालों में कई आतंकवादी हमले झेले हैं। और इन मुद्दों को संभालने में मैक्रों ने लापरवाही दिखाई है, जिससे जनता के बीच उन्हें लेकर नाराजगी काफी बढ़ गई है।

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