अमेरिका से तनातनी के बीच शी अपने 'जिगरी दोस्त' पुतिन से करेंगे मुलाकात, क्या करेंगे बाइडेन?
एससीओ, जिसे नाटो के प्रतिकार के रूप में देखा जाता है, आठ सदस्यीय आर्थिक और सुरक्षा ब्लाक है। एससीओ सबसे बड़े अंतर-क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक के रूप में उभरा है।
मास्को, 7 सितंबर : शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की 15 से 16 सितंबर को होनेवाली बैठक से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच मुलाकात होगी। रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस ने रूसी दूत का हवाला देते हुए बताया कि, बैठक से इतर दोनों कद्दावर नेताओं की मुलाकात होगी। आशा है कि, दोनों देशों के बीच इस मुलाकात के दौरान ताइवान को लेकर अमेरिका का रूख और अन्य विषयों पर चर्चा हो सकती है।

अमेरिका की चीन और रूस से बनती नहीं है
बता दें कि, इस साल 15 से 16 सितंबर को समरकंद (उजबेकिस्तान) में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। इसमें पीएम मोदी, रूस के राष्ट्रपति पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत अन्य शीर्ष नेता शामिल होंगे। वर्तमान में चीन और अमेरिका के रिश्तों में नैन्सी पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद से खटास आ गई है। इतना ही नहीं, चीन को लेकर मानवाधिकार से जुड़े यूएन की एक रिपोर्ट में उइगर और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के साथ हो रहे बुरे बर्ताव का जिक्र किया गया है। जिसकी चीन ने हाल ही में कड़ी निंदा की है। चीन का कहना है कि, ये सब चीन को बदनाम करने की अमेरिका की चाल है।

अमेरिका के खिलाफ लामबंद हो सकते हैं रूस और चीन
दूसरी तरफ ताइवान को लेकर अमेरिकी नीतियों के खिलाफ चीन बाइडेन प्रशासन को कई बार चेतावनी भी दे चुका है। जब अमेरिकी स्पीकर नैन्सी पेलोसी चीन के विरोध करने के बाद भी ताइवान पहुंच गई, इसके बाद चीन ने सबसे पहले अमेरिका को धमकी दी फिर ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास के नाम पर उसे डराने लगा। नैन्सी के बाद अमेरिका ने ताइवान में अपने कई प्रतिनिधियों को भेजा, जिससे बीजिंग और भी जलभुन गया। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी नैन्सी पेलोसी के ताइवान दौरे पर आपत्ति जताई थी। अब देखना है कि, जब उजबेकिस्तान में चीन और रूस के राष्ट्रपति आमने-सामने होंगे तो अमेरिका क्या प्रतिक्रिया देता है। सवाल है कि, जब शी और पुतिन मिलेंगे तो अमेरिका को लेकर उनकी क्या रणनीति होगी। क्योंकि दोनों ही देश अमेरिका से खासा नाराज चल रहे हैं।

एससीओ और नाटो
बता दें कि, एससीओ, जिसे नाटो के प्रतिकार के रूप में देखा जाता है, आठ सदस्यीय आर्थिक और सुरक्षा ब्लाक है। एससीओ सबसे बड़े अंतर-क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक के रूप में उभरा है। 2017 में भारत और पाकिस्तान इसके स्थायी सदस्य बने। एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, किर्गिज गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपतियों द्वारा एक शिखर सम्मेलन में की गई थी।

पीएम मोदी से शहबाज शरीफ कर सकते हैं मुलाकात
दूसरी तरफ, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की होनेवाली बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के बीच मुलाकात हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस समिट में पहुंचेंगे। इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से उनकी आमने-सामने की मुलाकात हो सकती है। हालांकि, अभी कुछ दिनों पहले पाकिस्तान में बाढ़ को लेकर भारत से सहायता मांग रहे वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल के बातों को नजरअंदाज करते हुए पीएम शहबाज शरीफ ने मोदी सरकार और कश्मीर मसले पर विवादास्पद बयानबाजी की थी। इन सबके बीच अब देखना है कि, दोनों देश के राष्ट्रध्यक्षों के बीच समरकंद को बात बनती है या नहीं।












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