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त्रिपुरा में गिराई गई लेनिन की मूर्ति लेकिन मॉस्‍को में 94 वर्षों से संभाल कर रखी गई है लाश

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    मॉस्‍को। त्रिपुरा में बीजेपी समर्थकों ने रूस के कम्‍युनिस्‍ट लीडर ब्‍लादीमिर लेनिन की मूर्ति को 'भारत माता की जय' बोलते हुए गिरा दिया। लेनिन रूस के एक ऐसे नेता थे जिन्‍हें लेकर आज तक रूस में काफी विवाद होते रहते हैं। वहीं आप यह सच जानकर भी हैरान रह जाएंगे कि भले ही उनकी मूर्ति को त्रिपुरा में गिरा दिया गया हो लेकिन उनकी लाश को आज तक रूस में संभालकर रखा गया है। जी हां, अगर आप सुनकर चौंक गए हैं तो चौंकिए मत क्‍योंकि राष्‍ट्रपति ब्‍लादीमिर पुतिन नहीं चाहते हैं कि लेनिन का अंतिम संस्‍कार हो और उन्‍हें दफनाया जाए। सिर्फ इतना ही नहीं रूस अपने इस नेता की लाश के रख-रखाव में कई लाख डॉलर भी खर्च कर डालता है।

    रेड स्‍क्‍वॉयर पर लेनिन की लाश देखने उमड़ी भीड़

    रेड स्‍क्‍वॉयर पर लेनिन की लाश देखने उमड़ी भीड़

    रूस की राजधानी मॉस्‍को के एक म्‍यूजियम में लेनिन की लाश को रखा गया है। साल 1917 में लेनि‍न रूस की क्रांति के समय यहीं पर भाषण दिया था और उन्‍हें सुनने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी थी। साल 2016 में पहली बार लेनिन के शव को रेड स्‍क्‍वॉयर पर रखा गया था और उन्‍हें देखने के लिए रोज लोगों की भीड़ उमड़ती है। रूस में आज भी इस बात पर बहस होती है कि लेनिन का पूरे रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्‍कार क्‍यों नहीं कर दिया जाता। रूस में एक ऑनलाइन पोल हुआ भी इसे लेकर कराया जा चुका है और इस पोल में 62 प्रतिशत लोगों ने लेनिन की डेडबॉडी को दफनाने के लिए अपनी रजामंदी जाहिर की थी। लेकिन रूस की सरकार हर बार इस बात से इंकार कर देती है।

    ऑनलाइन पोल में दफनाने की मांग

    ऑनलाइन पोल में दफनाने की मांग

    पिछले 94 वर्षों से उनकी लाश ऐसे ही रखी हुई है। 25 वर्षों से रूस में लगातार ऑनलाइन पोल हो रहे हैं और इन सभी पोल में लोगों ने लेनिन के अंतिम संस्‍कार की बात पर अपना मत जाहिर किया है। रूस में हुए एक और सर्वे में सिर्फ 18 प्रतिशत लोगों ने इस बात का समर्थन किया था कि लेनिन की बॉडी को इस तरह से प्रदर्शनी के लिए रखा जाना चाहिए। रूस के रूढ़‍िवादी चर्च की ओर से भी कहा गया है कि लेनिन को अब दफना देना चाहिए।

     हर वर्ष खर्च होते हैं डॉलर

    हर वर्ष खर्च होते हैं डॉलर

    साल 2016 में रूस की सरकार ने पहली बार उस रकम का खुलासा किया जो हर वर्ष उसके पहले कम्‍यूनिस्‍ट लीडर ब्‍लादीमिर लेनिन के मृत शरीर को संरक्षित करने में खर्च की जाती है। रूस की सरकार की ओर से कहा गया है कि इस वर्ष रूस इस काम में करीब दो लाख डॉलर खर्च करेगी। रूस की प्रॉक्‍योरमेंट एजेंसी ने अपने वेबसाइट पर जो जानकारी दी है, उसमें कहा गया है कि लेनिन की डेड बॉडी को इस खर्च पर जिंदा शरीर की स्थिति में रखने में मदद मिलेगी। लेनिन का शव पहली बार मॉस्‍को के रेड स्‍क्‍वॉयर पर रखा गया था।

    पुतिन नहीं चाहते लेनिन को दफनाना

    पुतिन नहीं चाहते लेनिन को दफनाना

    सोवियत संघ के राष्‍ट्रपति रहे मिखाइल गोर्बाचोव ने लेनिन को दफन करने की वकालत की थी। जबकि रूस के पहले राष्‍ट्रपति बोरिस येल्तिसन ने इसका विरोध किया। साल 1997 में उन्‍होंने बयान दिया था कि वह रेड स्‍क्‍वॉयर को कब्रिस्‍तान में नहीं तब्‍दील होने देंगे। वहीं पुतिन ने कभी लेनिन के शव को लेकर कोई उत्‍साह नहीं दिखाया। पुतिन ने लेनिन को गरीबों पर शासन करने का आरोप लगाया। उन्‍होंने यहां तक कहा कि रूस को लेनिन ने एटम बम की स्थिति में लाकर रखा दिया है। लेकिन इसके बाद भी वह उन्‍हें दफनाने के पक्ष में नहीं हैं। स्‍टालिन को अपना आदर्श मानने वाले पुतिन ने एक बयान में कहा था कि मार्क्‍सवाद बाइबिल की तरह है और लेनिन उसके संत हैं।

    21 जनवरी 1924 को हुई थी मौत

    21 जनवरी 1924 को हुई थी मौत

    रूस की बायोमेडिकल टेक्‍नोलॉजी रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर की ओर से वर्ष 1924 से ही इस डेडबॉडी की देखभाल में पैसे खर्च किए जा रहे हैं। लेनिन की मौत 21 जनवरी 1924 को हो गई थी। 90 के दशक में जब सोवियत संघ टूट गया तो लेनिन के शव को दफनाने की मांग भी तेज हो गई। रूस में कुछ लोग इस खर्च से खासे नाराज हैं और उनका मानना है कि एक ममी की देखभाल में भी इससे कम खर्च लगता है।

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    English summary
    Vladimir Lenin's statue has been pulled down in Tripura but his dead body is still being preserved in Moscow Russia.

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